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महाराष्ट्र : डॉक्टरों की 'सामूहिक छुट्टी' पर सरकार का अल्टीमेटम, काम पर लौटें, वरना कटेगा 6 माह का वेतन

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महाराष्ट्र : डॉक्टरों की 'सामूहिक छुट्टी' पर सरकार का अल्टीमेटम, काम पर लौटें, वरना कटेगा 6 माह का वेतन

महाराष्ट्र के डॉक्टर पिछले तीन दिन से सामूहिक अवकाश पर हैं...

खास बातें

  1. महाराष्ट्र के डॉक्टर पिछले तीन दिन से सामूहिक अवकाश पर हैं
  2. डॉक्टरों पर हमलों के खिलाफ सुरक्षा की मांग पर अड़े हुए हैं डॉक्टर
  3. कोर्ट ने अवमानना की चेतावनी भी दी थी, लेकिन डॉक्टरों ने नहीं सुनी
मुंबई:

बॉम्बे हाईकोर्ट से मंगलवार को फटकार पड़ने और चेतावनी मिलने के बावजूद महाराष्ट्र के डॉक्टरों ने सामूहिक अवकाश से लौटने से इंकार कर दिया था, सो, बुधवार को छुट्टी पर गए इन सभी डॉक्टरों को सरकार ने अल्टीमेटम देकर रात 8 बजे तक काम पर लौटने का आदेश दिया है. सरकार ने चेतावनी भी दी है कि जो डॉक्टर काम पर नहीं लौटेंगे, उनका छह माह का वेतन काट लिया जाएगा. वैसे, तात्कालिक कार्रवाई करते हुए नागपुर में नागपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के 310 डॉक्टरों को सस्पेंड कर दिया गया है. वैसे, सरकार ने यह भी कहा है कि वह मानती है कि डॉक्टरों की मांग जायज़ है, लेकिन इस वक्त मरीज़ परेशान हैं.

डॉक्टरों पर हो रहे हमलों के खिलाफ राज्यभर के रेज़िडेंट डॉक्टर सोमवार से सामूहिक अवकाश पर हैं, और उनकी छुट्टी के दूसरे दिन मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें काम पर लौटने का आदेश दिया था, लेकिन डॉक्टरों ने सामूहिक छुट्टी वापस लेने से इंकार कर दिया. डॉक्टरों का कहना था कि जब तक राज्य सरकार अस्पतालों में सुरक्षा के इंतज़ाम पुख़्ता नहीं कर देती, तब तक सामूहिक छुट्टी जारी रहेगी.

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डॉक्टरों के सामूहिक अवकाश के खिलाफ दायर की गई जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने डॉक्टरों को साफ चेतावनी भी दी थी, और कहा था कि उनका काम पर न लौटना कोर्ट की अवमानना माना जाएगा, और याचिकाकर्ता के वकील माने के मुताबिक कोर्ट ने यह भी कहा था कि डॉक्टरों को टर्मिनेट करने का अधिकार भी राज्य के पास है.


डॉक्टरों ने अपनी सफाई में कहा था कि यह हड़ताल नहीं, डॉक्टरों का अपना फैसला है, और जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं कर दी जातीं, हम छुट्टी पर ही रहेंगे. उधर, कोर्ट-सरकार-अदालत के बीच जारी इस विवाद में फंसे मरीज़ों की हालत जस की तस बनी रही. मरीज़ और उनके रिश्तेदार पिछले दो दिन से परेशान घूम रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिल पा रही है, हालांकि इस दौरान सरकारी अस्पतालों की एमरजेंसी सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है.



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