मुंबई में विरोध प्रदर्शनों ने चौपट किया यातायात, अदालत के आदेश की अवमानना

मुंबई में विरोध प्रदर्शनों ने चौपट किया यातायात, अदालत के आदेश की अवमानना

मुंबई में अदालत के आदेश संबंधी जानकारी का बोर्ड।

खास बातें

  • दक्षिण मुंबई में धरना, प्रदर्शन पर 18 साल से लगी है पाबंदी
  • छत्रपति शिवाजी टर्मिनस और दादर में प्रदर्शनों ने ठप किया ट्रैफिक
  • पुलिस ने किया आयोजकों पर एफआईआर दर्ज करने का दावा
मुंबई:

मुंबई में 10 दिनों के अंदर दो बड़े मोर्चों ने दक्षिण मुंबई में ट्रैफिक की समस्या पैदा कर दी। शहर घंटों तक जाम की स्थिति में फंसा रहा वह भी दक्षिण मुंबई में जहां मोर्चों और धरने पर पाबंदी का आदेश बॉम्बे हाईकोर्ट तकरीबन 18 साल पहले दे चुका है।

बॉम्बे हाईकोर्ट की अवमानना
राज्य पुलिस के पूर्व मुखिया और तब हाईकोर्ट तक गुहार लगाने वाले डॉ पीएस पसरीचा पूछ रहे हैं कि पुलिस इस रास्ते में रैली की इजाजत दे कैसे रही है? पसरीचा के मुताबिक 18 साल से उस नियम का पालन होता आ रहा है, कभी किसी ने विरोध नहीं किया। लेकिन अब अचानक ऐसा क्या हुआ कि मोर्चे सड़कों पर निकलने लगे हैं। इससे तो लोगों को मन बढ़ेगा और यह बॉम्बे हाईकोर्ट की अवमानना भी है।

 

सड़कों पर यातायात हुआ ठप
दक्षिण मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के पास वाली सड़क सोमवार 25 जुलाई को दोपहर 3 बजे से लेकर शाम को लगभग 6 बजे तक  थमी सी रही। कम्यूटर विभाग में अस्थाई कर्मचारियों ने स्थाई करने की मांग को लेकर मोर्चा निकाला था। इसके  पहले दादर में 24 जून को अंबेडकर भवन गिराए जाने के खिलाफ 19 जुलाई को हजारों की भीड़ इसी रास्ते पर पहुंची थी। इस रास्ते पर मोर्चा या रैली निकालने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने पाबंदी लगा रखी है।

मुंबई पुलिस इस मामले में कुछ कहने से बच रही है लेकिन उसका दावा है कि ट्रैफिक को बाधित करने वाली ऐसी सभी रैलियों में आयोजकों के खिलाफ वह मामला दर्ज करती है। 19 और 25 जुलाई को निकली रैली के आयोजकों के खिलाफ भी उसने एफआईआर दर्ज की है।

 

आजाद मैदान में मोर्चा, धरना की इजाजत
लोकतंत्र में लोगों को विरोध करने या अपना मत रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन यह ध्यान रखते हुए कि उनके अधिकार दूसरों के अधिकारों का हनन न करें। इसीलिए अदालत ने आजाद मैदान में लोगों को आजादी से अपनी बात रखने की इजाजत दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि मोर्चा प्रदर्शन इस मैदान के बाहर न हों। ऐसे में सवाल उठता है कि फिर हजारों की भीड़ कैसे सड़क को ही मैदान में तब्दील किए दे रही है। उन्हें इसकी इजाजत कौन दे रहा है?

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