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मुंबई के मैकेनिकल इंजीनियर ने खुदखुशी की घटनाएं रोकने के लिए बनाई अनूठी रॉड...

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मुंबई के मैकेनिकल इंजीनियर ने खुदखुशी की घटनाएं रोकने के लिए बनाई अनूठी रॉड...

मुंबई के इंजीनियर शरद अशानी ने एंटी सुसाइड फैन रॉड बनाई है.

खास बातें

  1. इंजीनियर शरद अशानी ने एंटी सुसाइड फैन रॉड की ईजाद
  2. पंखे से लटककर आत्महत्या की कोशिश हो जाएगी नाकाम
  3. शरद ने अनोखे अविष्कार को पेटेंट करवाया
मुंबई: एक अनुमान के मुताबिक देश में सालाना करीब 60 हजार के लोग खुदकुशी करते हैं. इनमें सबसे ज्यादा संख्या अपने घर में  पंखे से लटककर खुदकुशी करने वालों की होती है. लेकिन अब मुंबई के एक मैकेनिकल इंजीनयर ने ऐसी एंटी सुसाइड फैन रॉड बनाई है जो खुदकुशी को नाकाम कर देती है.

शरद अशानी क्रॉम्पटन कंपनी से रिटायर हो चुके मैकेनिकल इंजीनियर हैं. वे मुंबई के मुलुंड क्षेत्र में रहते हैं. शरद अशानी बताते हैं कि साल 2004 में उन्होंने जब मॉडल नफीसा जोसफ की पंखे से लटककर खुदकुशी की खबर पढ़ी तभी मन में आया था कि ऐसा कुछ करें कि पंखे से कोई खुदकुशी न कर पाए. इसके बाद से उन्होंने अपने आइडिया पर काम करना शुरू किया.  

शरद के मुताबिक पंखे को छत से लटकाने के लिए जिस सामान्य रॉड का इस्तेमाल होता है उन्होंने उसमें फेरबदल किया. उन्होंने सामान्य रॉड के बजाय एक ऐसी रॉड बनाई है जो दो हिस्सों में है. उसके बीच में एक मजबूत स्प्रिंग कुछ इस तरह फिट की गई है कि दोनों टुकड़े मिलकर बिल्कुल एक रॉड बन गए हैं. एक पंखा अमूमन 6 किलो का होता है जबकि इसमें लगी स्प्रिंग उसका तीन गुना यानी करीब 18 किलो भार सहन कर सकती है. मतलब यह कि आमतौर पर यह विशेष रॉड सामान्य रॉड की तरह काम करती है लेकिन जैसे ही उस पर 20 किलो से ज्यादा का वजन पड़ता है, यानी कोई उससे लटककर खुदकुशी की कोशिश करता है तो वह बीच से दो हिस्सों में बंट जाती है. रॉड के बीच में लगी स्प्रिंग के जरिए पंखा अपनी जगह से काफी नीचे आ जाता है और खुदकुशी  करने वाले के सिर में भी नहीं लगता क्योंकि स्प्रिंग उसे ऊपर वाले हिस्से से जोड़े रखती है. इसी तरह बिजली का तार उसके अंदर कैप लगाकर जोड़ा गया है जिससे तार टूटने के बाद अगर कोई गलती से पंखे का बटन दबा दे तो करंट भी न लगे.
 
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शरद के मुताबिक एंटी सुसाइड फैन रॉड इस बात को ध्यान में रखकर बनाया गया है कि सभी तरह के सीलिंग फैन में लग सके. शरद इस अनोखे अविष्कार को पेटेंट करवा चुके हैं. उन्होंने इसे गोल्ड लाइफ नाम दिया है. शरद के मुताबिक अभी वे इसे प्रायोगिक तौर पर ही बना रहे हैं इसलिए इसकी कीमत 150 से 200 रुपये तक है. बड़े पैमाने पर उत्पादन होने के बाद कीमत घट सकती है.


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