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एकनाथ खडसे और दाऊद इब्राहिम के बीच नहीं हुआ कोई फोन : एटीएस ने हाईकोर्ट से कहा

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एकनाथ खडसे और दाऊद इब्राहिम के बीच नहीं हुआ कोई फोन : एटीएस ने हाईकोर्ट से कहा

महाराष्‍ट्र के पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. कोई आतंकवादी कोण नहीं मिला जिसका हैकर ने आरोप लगाया
  2. हैकर मनीष भांगले ने जांच ठीक से नहीं होने का लगाया है आरोप
  3. 'हम हर बार कूद कर सीबीआई (जांच) पर नहीं पहुंच सकते'
मुंबई:

महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने सोमवार को बॉम्‍बे हाईकोर्ट में कहा कि उसकी प्राथमिक जांच में पाया गया है कि राज्य के पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे और फरार अपराधी दाऊद इब्राहिम के बीच कोई फोन नहीं हुआ था और कोई आतंकवाद संबंध नहीं पाया गया है जिसका एक हैकर ने आरोप लगाया था।

एटीएस के वकील नितिन प्रधान ने न्यायमूर्ति एन एच पाटिल और न्यायमूर्ति पी डी नाईक की खंडपीठ से कहा, ‘‘एटीएस ने प्राथमिक जांच की। कोई आतंकवादी कोण नहीं मिला जिसका हैकर ने आरोप लगाया। खडसे और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद के बीच कोई फोन नहीं हुआ जिसका हैकर ने आरोप लगाया था।’’ हाईकोर्ट गुजरात के हैकर मनीष भांगले की याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें राज्य मशीनरी द्वारा आंशिक जांच का आरोप लगाया गया है एवं इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की गयी है।

भांगले इस साल अप्रैल में पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन कंपनी लिमिटेड की प्रामाणिकरण प्रक्रिया का हैक करने का दावा करते हैं और वहीं से उन्होंने फरार अपराधी दाऊद इब्राहिम के टेलीफोन रिकॉर्ड हासिल किए। भागंले की याचिका के अनुसार इस सूचना में दाऊद और महाराष्ट्र के पूर्व राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे के बीच बातचीत भी शामिल है। प्रधान ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता का यह दावा कि उसके द्वारा प्रदत्त सूचना को राज्य मशीनरी ने हल्के में लिया, सही नहीं है। हम आवश्यक कार्रवाई कर रहे हैं और सीबीआई जांच की जरूरत नहीं है।’’


उन्होंने वैसे तो जांच में किसी आतंकवादी कोण के आने से इनकार किया लेकिन कहा, ‘‘प्राथमिक जांच में कुछ गंभीर चीजें सामने आयी हैं। लेकिन उनकी जांच शहर पुलिस की साइबर अपराध शाखा के विशेषज्ञों द्वारा की जाएगी। एटीएस अपनी प्राथमिक जांच साइबर अपराध शाखा को सौंपेगा जो उसकी जांच करेगी।’’ हाईकोर्ट ने प्रधान का बयान दर्ज करने के बाद भांगले को अपराध शाखा के समय जरूरत के हिसाब से पेश होने को कहा।

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खंडपीठ ने भांगले की याचिका निरस्त कर दिया और कहा, ‘‘हम हर बार कूद कर सीबीआई (जांच) पर नहीं पहुंच सकते। यदि बाद में याचिकाकर्ता महसूस करता है कि जांच सही ढंग से नहीं हो रही है तो वह हाईकोर्ट फिर आ सकता है।’’ भांगले के इस डर पर कि उनकी जान को खतरा है, अदालत ने कहा कि वह पुलिस आयुक्त को प्रतिवेदन दे सकते हैं जो गुण-दोष के आधार पर उस पर फैसला करेंगे।

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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