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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से तीन तलाक में आई कमी, भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन का दावा

तीन तलाक के खिलाफ मुहीम चलाने वाली संस्था भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की मानें तो फैसले के बाद से देश भर में फैली उनकी शरिया अदालत में नहीं के बराबर मामले आये हैं.

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से तीन तलाक में आई कमी, भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन का दावा

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

मुंबई: मुस्लिम समाज में एक बार में तीन बार तलाक कह कर पत्नी को सभी हकों से वंचित कर देने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम समाज में अनोखी जागरुकता आयी है. तीन तलाक के खिलाफ मुहीम चलाने वाली संस्था भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की मानें तो फैसले के बाद से देश भर में फैली उनकी शरिया अदालत में नहीं के बराबर मामले आये हैं. अगस्त महीने में फैसला आने के बाद से अब तक मुंबई, तमिलनाडु और कर्नाटक की शरिया अदालतों में एक भी नया मामला नहीं आया है. जयपुर की शरिया अदालत में 2 मसले आए हैं लेकिन वो भी सुलझने की कगार पर हैं. जबकि अकेले मुंबई में साल 2016 में कुल 31 मामले आए थे और फैसला आने के पहले इस साल 4 मसले आए थे. लेकिन उसके बाद से एक भी नहीं आए.

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बीएमएमए की सहसंस्थापक शफिया नियाज़ बताती हैं कि समाज की महिलाओं से बातचीत से पता चलता है कि अदालत के फैसले के बाद लोगों को ये पता चल गया है कि अब सिर्फ तीन बार बोल देने भर से तलाक़ नहीं हो पाएगा. तलाक के लिए जरूरी शर्तों और नियम का पालन करना होगा.

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महिला आंदोलन से जुड़ी खातून शेख की मानें तो फैसले के बाद इसे डर कहिये या जागरुकता कि पहले तीन तलाक दे चुके पति भी  अब पूर्व पत्नी को हक देने की बात करने लगे हैं. खातून शेख के मुताबिक अदालत के फैसले के बाद कई महीने पहले तलाक़ दे चुके 2 पति आए और पत्नी को उसका हक़, मेहर और मेंटेनेंस देने के साथ काजी के जरिये तलाक की प्रक्रिया पूरी करने की बात कही. खातून के मुताबिक ये उनके लिए नई बात है क्योंकि इसके पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था.

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तीन तलाक़ पर ऐतिहासिक फ़ैसले से क्या समाज में बदलाव दिखेगा?तीन तलाक पर कानून अभी नहीं बना है, इसलिए भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने मुंबई पुलिस आयुक्त से मांग की है कि तीन तलाक की शिकायत मिलने पर पुलिस उसमें घरेलू हिंसा कानून के तहत कार्रवाई करे ना कि नए कानून के इंतजार में मूकदर्शक बनी रहे.


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