मुंबई : सरकारी अस्पतालों में गैर COVID-19 मरीजों को इलाज के लिए करना पड़ रहा है लंबा इंतजार

एक अधिकारी ने बताया कि राज्य प्रशासन पर COVID-19 के मरीजों के वास्ते और चिकित्सा सुविधा तैयार करने का भी काफी दबाव है. उन्होंने बताया कि मौजूदा अस्पतालों के अलावा सरकार ने शहर में कोई COVID-19 उपचार केंद्र तैयार नहीं किया.

मुंबई : सरकारी अस्पतालों में गैर COVID-19 मरीजों को इलाज के लिए करना पड़ रहा है लंबा इंतजार

प्रतीकात्मक तस्वीर

खास बातें

  • मुंबई के अस्पताल कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों से जूझ रहे हैं
  • इलाज के लिए गैर COVID-19 मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं.
  • मुंबई में COVID-19 के मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई
मुंबई:

मुंबई के अस्पताल कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों से जूझ रहे हैं वहीं निगम और राज्य सरकार के अस्पतालों के बाह्य रोगी विभागों (ओपीडी) में इलाज के लिए गैर COVID-19 मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं. मई के पहले हफ्ते से मुंबई में COVID-19 के मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. इससे राज्य और निगम संचालित अस्पतालों पर दबाव ही नहीं बढ़ा है बल्कि गैर COVID-19 मरीजों खासकर गर्भवती महिलाओं की उपेक्षा हो रही है. सरकारी केईएम अस्पताल और इसके बगल में बृहन्मुंबई महानगरपालिका द्वारा संचालित नायर अस्पताल अध्ययन का विषय हो सकते हैं कि COVID-19 के बढ़ते मामलों के कारण अस्पतालों का संसाधन कितना सीमित हो चुका है.

नायर अस्पताल को COVID-19 के मरीजों के लिए समर्पित कर दिया गया और मरीजों से अस्पताल के पूरी तरह भर जाने पर सरकार ने संक्रमण से प्रभावित लोगों के इलाज के लिए केईएम अस्पताल में 400 बेड को आरक्षित कर दिया. इससे गैर COVID-19 मरीजों पर गहरा असर पड़ा है. ऐसे में अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लग रही है. केईएम अस्पताल के डीन डॉ हेमंत देशमुख ने बताया, ‘हम मरीजों को मना नहीं कर सकते. हालांकि बेड की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है. अपने बीमार परिजन के लिए बेड पाने की उम्मीद में कई लोगों को रात तक इंतजार करना पड़ा.'

एक अधिकारी ने बताया कि राज्य प्रशासन पर COVID-19 के मरीजों के वास्ते और चिकित्सा सुविधा तैयार करने का भी काफी दबाव है. उन्होंने बताया कि मौजूदा अस्पतालों के अलावा सरकार ने शहर में कोई COVID-19 उपचार केंद्र तैयार नहीं किया. सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं को दिक्कतें हो रही हैं. एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया, ‘गैर COVID-19 मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गयी है लेकिन प्रशासन को गर्भवती महिलाओं के मुद्दे के समाधान के लिए जूझना पड़ रहा है, क्योंकि निजी अस्पतालों में उन्हें मना कर दिया जाता है और सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने को कहा जाता है.'



(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
 
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