मुंबई में सड़क के गड्ढों पर जारी है राजनीति, मुंबईकर को राहत नहीं

मुंबई में सड़क के गड्ढों पर जारी है राजनीति, मुंबईकर को राहत नहीं

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

मुंबई:

मुंबई की सड़कें सियासी हो गई हैं, इन गड्ढों पर शहर में जमकर सियासत हो रही है। वहीं आम जनता को ट्रैफिक की टीस से रोज रूबरू होना पड़ रहा है। मेयर अब सड़कों पर उतरी हैं, चूंकि अगले साल बीएमसी चुनाव हैं लेकिन मुंबईकर को मुश्किलों से निजात मिलने का भरोसा नहीं है।

मुंबई की मेयर स्नेहल आंबेकर तीन दिनों से शहर की सड़कों का जायजा ले रही हैं, सड़क की मरम्मत के नाम पर कांग्रेस ने बीएमसी में सत्ता पर काबिज शिवसेना-बीजेपी पर करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है जिसके जवाब में मेयर का कहना है मैं दहिसर गई थी गड्ढों को देखने, आज भी वही काम कर रही हूं, ये सड़कें अहम हैं और हम मुंबईकरों की मदद करना चाहते हैं। मैंने व्यक्तिगत तौर पर ये सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि किसी ब्लैकलिस्टेड ठेकेदार को ठेका ना मिले।

हर साल मुंबई में मॉनसून के दिनों में हज़ारों गड्ढे निकल आते हैं, जिसमें सड़कों में गड्ढे या गड्ढों में सड़कों का फर्क मुश्किल हो जाता है। बीएमसी कह रही है इस साल लगभग 500 गड्ढों की शिकायतें उसी मिलीं, जिसमें ज्यादातर की मरम्मत हो गई जबकि लोगों का कहना है कि इनकी तादाद कम से कम 4 गुना है। मरम्मत में इस्तेमाल सामग्री घटिया है जिसकी वजह से चंद दिनों में हालात जस के तस हो जाएंगे।

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रोज पश्चिमी उपनगर में टैक्सी चलाने वाले चंगेज़ खान का कहना है कि यहां ढेर सारे गड्ढे हैं और ट्रैफिक के हालात बहुत बुरे हैं, गाड़ियों को चलने में घंटों लग जाते हैं। हालांकि बीएमसी इन आरोपों को गलत बता रही है। स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन यशोधर फणसे ने कहा, 'हम इन अहम जंक्शन को देख रहे हैं, जहां लोगों को ज्यादा दिक्कत होती है। छुट्टी के दिन भी हम काम कर रहे हैं। पहले एमएमआरडीए ने इन सड़कों का ठेका दिया था, लेकिन वो ठेकेदार कहीं नजर नहीं आ रहे, लिहाजा हम इन्हें ठीक कर रहे हैं।'

बीएमसी कमिश्नर ने गड्ढों की मरम्मत के लिए 48 घंटे की डेडलाइन दी थी, लेकिन हालात बता रहे हैं कि सड़क पर ये मियाद प्रशासन के लिये मायने नहीं रखती।