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रेलमंत्री के पास योजनाओं का पिटारा, नहीं रुक रहा मुंबई लोकल में हादसों का सिलसिला

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रेलमंत्री के पास योजनाओं का पिटारा, नहीं रुक रहा मुंबई लोकल में हादसों का सिलसिला

प्रतीकात्मक फोटो

खास बातें

  1. 15 अगस्त से 20 अगस्त के बीच हादसों में 60 लोगों की मौत
  2. सुरक्षा पर नहीं ध्यान, सुविधाएं सिर्फ घोषणाओं तक सीमित
  3. छह महीने से एसी लोकल ट्रेन कारशेड में खड़ी
मुंबई:

मुंबई की लोकल के लिए रेलमंत्री ने एक बार फिर योजनाओं का पिटारा खोला है लेकिन केन्द्र सरकार में उनके ही सहयोगी ने इस पिटारे पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इन सबके बीच लोकल ट्रेन लाइनों पर मौत के आंकड़े पूरे हफ्ते खतरनाक तरीके से बढ़ते रहे. गत 15 अगस्त से 20 अगस्त तक लोकल ट्रेनों से हुए हादसों में 60 लोगों की मौत हो चुकी है.  
    
सोमवार को मुंबई में रेलवे के कार्यक्रम के दौरान सामाजिक न्याय राज्यमंत्री रामदास आठवले पूछ बैठे कि एसी लोकल कब चलेगी, लेकिन केन्द्रीय मंत्रिमंडल में अपने सहयोगी मंत्री के सवाल का जवाब शायद प्रभु के पास भी नहीं है. छह महीने से एसी लोकल कारशेड में पड़ी है. ट्रेन के दरवाजे, एसी, मोटर काम नहीं कर रहे. इसकी ऊंचाई भी इसके संचालन में आड़े आ रही है. बहरहाल करोड़ों की इस ट्रेन के आराम फरमाने के बावजूद रेलमंत्री ने दनादन फुटओवर ब्रिज, एस्कलेटर, वाई-फाई जैसी आसमानी बातों की झड़ी लगा दी. यह भूलकर कि दो साल पहले किए गए, डबल-डेकर ट्रेन, ऐलिविटेड कॉरीडोर जैसी कई योजनाएं अधूरी हैं. और तो और ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी सुधारने वाले कैब सिग्नलिंग को भी रेड सिग्नल दिखा दिया गया है.

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मुंबई सबअरबन सिस्टम फिलहाल फिक्स ब्लॉक पर काम करता है. यानी एक ट्रैक पर चल रही दो ट्रेनों में खास अंतर रखा जाता है. इन ब्लॉक्स को सिग्नलिंग क्षेत्र कहा जाता है. वहीं एमयूटीपी में शामिल किए गए कैब सिग्नलिंग से मोटरमैन को केबिन में ही ट्रेन की लोकेशन, गति और दो ट्रेनों की दूरी की जानकारी मिल जाती. इससे ट्रेनों की निरंतरता बढ़ती, भीड़ कम होती और  शायद लोकल पर लगा कातिल का टैग हटता.


लेकिन फिलहाल इस मुद्दे पर मंत्रीजी सियासत-सियासत खेल रहे हैं. उन्होंने कहा यह काम 15-20 साल पहले हो जाने चाहिए थे, लेकिन नहीं हुए. अब इसमें वक्त तो लगेगा. मुंबई की लोकल की पहली जरूरत है सुरक्षा. रोज औसतन नौ लोगों की मौत का सबब बनने वाली उपनगरीय रेल सेवा में हर साल लगभग 3500 लोगों की मौत होती है. फिर भी लगता सरकार की प्राथमिकता वाई-फाई है सुरक्षा नहीं.



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