दिल्ली-मुंबई फ्रेट कॉरिडोर के लिए नेशनल पार्क की जमीन लिए जाने को लेकर विवाद

दिल्ली-मुंबई फ्रेट कॉरिडोर के लिए नेशनल पार्क की जमीन लिए जाने को लेकर विवाद

मुंबई:

दिल्ली-मुंबई फ्रेट कॉरिडोर के लिए संजय गांधी नेशनल पार्क की जमीन के इस्तेमाल को लेकर विवाद बढ़ता दिख रहा है। इस कॉरिडोर के लिए मुंबई के 58 हेक्टरयर जंगल की ज़मीन का इस्तेमाल होगा, जिसमें से 10 हैक्टर ज़मीन संजय गांधी नेशनल पार्क की भी होगी। वन विभाग ने इस ज़मीन की डी- रिज़र्व कर दिया है। हालांकि जानकर इस कदम को जानवरों और पर्यावरण के लिए खतरनाक मान रहे हैं।

हालांकि नेशनल पार्क प्रशासन का कहना है कि यह ज़मीन व्यहवारिक तौर पर पहले से ही रेलवे की है। संजय गांधी नेशनल पार्क के निदेशक विकास गुप्ता ने कहा कि 10 हेक्टेयर का यह हिस्सा पहले से ही रेलवे का है। वसई- दीवा ट्रैक वहां पहले से मौजूद है और इसी के पैरेलल अब यह नया कॉरिडोर ट्रैक बनेगा।

पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े जानकर इस कदम को जानवरों और पर्यावरण के लिए खतरनाक मान रहे हैं। वाइल्डलाइफ कंसर्वशन ट्रस्ट के चेयरमैन अनीश अंधेरिया कहते हैं, 'इससे जनवरों की सुरक्षा को बहुत खतरा होगा।

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इस नए ट्रैक से जानवरों को सुरक्षित रखने के लिए नेशनल पार्क ने रेलवे को कुछ सुझाव भी दिए हैं। इन सुझावों के तहत रेलवे को ट्रैक के पैरेलल फेंसिंग करने को कहा गया है और साथ ही दो अंडर पास और ओवर ब्रिज बनाने को भी कहा गया है, जिससे कि जानवर पटरियों के सीधे संपर्क में कम से कम आए।

वन विभाग अभी इस बारे में बात करने से कतरा रहा है। इस बाबत संपर्क किए जाने पर राज्य के वन मंत्री सुधीर मुंगेटिवार ने कहा कि अभी ऐसी कोई जानकारी नहीं है। कानून के मुताबिक काम करेंगे।