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मुंबई की आर्थर रोड जेल में कैदियों का इलाज अब टेलीमेडिसिन के जरिये

आर्थर रोड जेल के अधीक्षक हर्षद अहिरराव ने बताया कि जेल में ओपीडी है और डॉक्टर भी हैं, लेकिन गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए कैदियों को जे जे अस्पताल ले जाना पड़ता है.

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मुंबई की आर्थर रोड जेल में कैदियों का इलाज अब टेलीमेडिसिन के जरिये
मुंबई: जेल में बंद कैदियों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना और उन्हें ले आना एक बड़ी जिम्मेदारी का काम होता है क्योंकि उस दौरान कैदियों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प होती है और कई बार आरोपी भागने में भी कामयाब हो जाते हैं. हाल ही में घोटाले के आरोप में गिरफ़्तार विधायक रमेश कदम का पुलिस के साथ बदसलूकी का वीडियो भी वायरल हुआ था. लेकिन अब इस समस्या से बचने के लिए आर्थर रोड जेल प्रशासन ने टेलीमेडिसिन की शुरुआत की है.

टेलीमेडिसिन यानी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये जेजे अस्पताल के बड़े डॉक्टरों से कंसल्ट कर उनका इलाज जेल में ही करना. आर्थर रोड जेल के अधीक्षक हर्षद अहिरराव ने बताया कि जेल में ओपीडी है और डॉक्टर भी हैं, लेकिन गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए कैदियों को जे जे अस्पताल ले जाना पड़ता है.

रोजाना 35 के करीब कैदी गंभीर बीमारी का हवाला देकर जेजे अस्पताल में ले जाने के लिए दबाव डालते हैं. इससे पुलिस पर इन्हें ले जाने और लाने का दबाव तो बढ़ता ही है, कैदियों के भागने और उनके बाहरी लोगों के संपर्क में आने का खतरा रहता है वो अलग.

इसलिये इस टेलीमेडिसिन योजना के तहत जेल में ही उनका इलाज करने की शुरुआत हुई है और इसमें सफलता भी मिल रही है.

हालांकि सोनोग्राफी और एमआरआई जैसे टेस्ट के लिए आरोपियों को अस्पताल ले जाना अब भी जारी है. लेकिन पहले जहां रोजाना 35 के करीब कैदियों को अस्पताल ले जाना पड़ता था अब वो संख्या घटकर 15 के करीब हो गई है. इससे पुलिस पर दबाव भी कम हुआ है और कैदियों का इलाज भी बेहतर हो पा रहा है.

जेल एडीजी बी के उपाध्याय ने बताया कि अभी ये योजना प्रायोगिक तौर पर आर्थर रोड जेल और पुणे के येरवडा जेल में शुरू की गई है. लेकिन इसकी सफलता को देखते हुए जल्द ही इसे राज्य की दूसरी जेलों में भी लागू किया जाएगा.


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