मुंबई में नागरिकता कानून के खिलाफ आज़ाद मैदान में जुटे हजारों लोग

‘नेशनल एलायंस एगेंस्ट द सिटीजन एमेंडमेंट एक्ट (सीएए), प्रोपोज्ड नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) एंड नेशनल पोपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर)’ की महाराष्ट्र इकाई ने इस ‘महा-मोर्चा’ प्रदर्शन का आयोजन किया था.

मुंबई में नागरिकता कानून के खिलाफ आज़ाद मैदान में जुटे हजारों लोग

खास बातें

  • इस मौके पर सीएए-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव पारित किये गये
  • संसद के सत्र में इस नये नागरिकता कानून को वापस लिए जाने की मांग
  • ‘मोदी, शाह से आजादी’ सीएस और एनआरसी से आजादी’ जैसे नारे लगाये गए
मुंबई:

देशभर में CAA और NRC के खिलाफ विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है. मुंबई के आज़ाद मैदान में शनिवार के दिन CAA के खिलाफ किये गए प्रदर्शन में हज़ारों की तादाद में भीड़ शामिल हुई. आज़ाद मैदान में शनिवार दोपहर से ही बड़े पैमाने में लोग जुटने लगे. देशभर में CAA के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के तर्ज पर ही मुंबई के आज़ाद मैदान में भी इस कानून का विरोध किया गया. मैदान में जहां हज़ारों की भीड़ इस कानून का विरोध कर रही थी तो वहीं मंच से अभिनेता सुशांत सिंह ने इसे गलत बताया.

शनिवार को आजाद मैदान में शनिवार को उर्दू कवि फैज अहमद की लोकप्रिय कविता ‘हम देखेंगे' के पाठ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी के बीच बड़ी संख्या में महिलाओं समेत हजारों लोगों ने सीएए-एनआरसी-एनपीआर व्यवस्था के खिलाफ आह्वान दिया.

‘नेशनल एलायंस एगेंस्ट द सिटीजन एमेंडमेंट एक्ट (सीएए), प्रोपोज्ड नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) एंड नेशनल पोपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर)' की महाराष्ट्र इकाई ने इस ‘महा-मोर्चा' प्रदर्शन का आयोजन किया था. मुंबई के विभिन्न हिस्सों, नवी मुंबई, ठाणे जैसे उपनगरीय क्षेत्रों और महराष्ट्र के अन्य हिस्सों से लोग इस प्रदर्शन में पहुंचे थे.

तिरंगा लहराते हुए और सीएए-एनआरसी-एनपीआर की निंदा करने वाली तख्तियां अपने हाथों में लिये प्रदर्शनकारियों ने ‘मोदी, शाह से आजादी' सीएस और एनआरसी से आजादी' जैसे नारे लगाये. प्रदर्शनकारियों ने यह कहते हुए (एनपीआर या ऐसे किसी अन्य कवायद के दौरान) दस्तावेज नहीं दिखाने का संकल्प लिया कि वे अनादि काल से भारत के नागरिक हैं. इस मौके पर सीएए-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव भी पारित किये गये. उन्होंने मांग की कि संसद के सत्र में इस नये नागरिकता कानून को वापस लिया जाए. (इनपुट भाषा से...)

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