फिर बाहर निकला शीना बोरा हत्याकांड का जिन्‍न, आत्मकथा में पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त राकेश मारिया ने किया खुलासा

सर्विस से रिटायर हो चुके मारिया ने अपनी आत्मकथा में शीना बोरा हत्याकांड जांच का जिक्र करते हूए लिखा है कि तब मुम्बई पुलिस के सयुंक्त आयुक्त (कानून और व्यवस्था) देवेन भर्ती ने उनसे शीना बोरा के लापता की जानकारी होने की बात छिपाई थी.

फिर बाहर निकला शीना बोरा हत्याकांड का जिन्‍न, आत्मकथा में पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त राकेश मारिया ने किया खुलासा

मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त राकेश मारिया (फाइल फोटो)

खास बातें

  • मुंबई पुलिस अफसरों में पहले भी गुटबाजी का आरोप लगता रहा है
  • राकेश मारिया ने अपनी आत्‍मकथा 'लेट मी से इट नाउ' में ये बातें लिखी हैं
  • साल 2015 में शीना बोरा हत्‍याकांड बेहद चर्चित हुआ था
मुंबई:

साल 2015 के सबसे चर्चित शीना बोरा हत्याकांड (Sheena Bora murder case) का खुलासा करने वाले तब के मुंबई पुलिस आयुक्त राकेश मारिया (Rakesh Maria) ने 5 साल बाद फिर से शीना बोरा हत्याकांड की जांच का जिक्र कर बोतल में बंद उस हत्याकांड के जिन्‍न को बाहर निकाल दिया है. सर्विस से रिटायर हो चुके मारिया ने अपनी आत्मकथा में शीना बोरा हत्याकांड (Sheena Bora murder case) जांच का जिक्र करते हूए लिखा है कि तब मुम्बई पुलिस के सयुंक्त आयुक्त (कानून और व्यवस्था) देवेन भर्ती ने उनसे शीना बोरा के लापता की जानकारी होने की बात छिपाई थी. दूसरी तरफ देवेन भारती का कहना है कि पूरी जांच टीम हर डिवेलपमेंट से अवगत थी और मारिया का आरोप प्रसिद्धि पाने की मार्केटिंग स्ट्रेटजी का हिस्सा है.

31 जनवरी 2017 को राकेश मारिया जब होमगार्ड के डीजी पद से रिटायर हुए थे तब शीना बोरा मामले से जुड़े कई सवाल मीडिया वालों ने उनसे पूछे थे लेकिन जवाब में मारिया ने बस इतना कहा था कि कुछ बातें किताबों में लिखने के लिए भी छोड़ दो. अब 3 साल बाद राकेश मारिया की किताब आ गई है और आते ही शीना बोरा हत्याकांड जांच का जिन्‍न एक बार फिर से बाहर निकल आया है.

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मारिया ने लिखा है कि 7 सितंबर 2015 को खार पुलिस थाने में जब उन्होंने शीना बोरा के सौतेले पिता और मीडिया उद्योगपति पीटर मुखर्जी से पूछा कि जब उसे साल 2012 में शीना बोरा के लापता होने का पता चला तो तब तुमने क्यों कुछ नहीं किया? तब पीटर ने जो कहा उसे सुनकर मैं चौंक गया. पीटर ने बताया कि उसने देवेन भारती को बताया था. मारिया ने लिखा है कि तब मैंने देवेन की तरफ देखा पर वो चुपचाप खड़े रहे. मैं हैरान था कि इतने दिनों तक देवेन ने मुझे ये बात क्यों नहीं बताई जबकि हम कई बार साथ मे इस केस की जांच के लिए आते थे.

हैरानी की बात है कि उसी के दूसरे दिन मुम्बई पुलिस आयुक्त राकेश मारिया को प्रमोट कर होमगार्ड का डीजी बना दिया गया. ऐसा माना जाता है कि मारिया को शीना बोरा केस में ज्यादा रुचि लेने और पीटर मुखर्जी को बचाने के संदेह में उन्हें हटाया गया था.

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मुंबई के हाई प्रोफाइल पुलिस अफसर राकेश मारिया के नाम 1993 मुम्बई बम धमाकों की जांच के साथ इंडियन मुजाहिदीन आतंकी संगठन और 26/11 आतंकी हमले जैसे दर्जनों अहम मामलों की जांच को अंजाम तक पहुंचाने के लिये जाने जाते थे. लेकिन साल 2012 में हुई शीना बोरा हत्या की गुत्थी को 3 साल बाद सुलझाने का इनाम मिलने की बजाय बदनामी से आहत हैं.

इसलिए अपनी किताब में उन्होंने देवेन भारती पर पीटर मुखर्जी को जानने के साथ शीना बोरा के लापता होने की जानकारी होने की बात उनसे छिपाने का आरोप लगाया है.

दूसरी तरफ देवेन भारती ने बयान जारी कर कहा है कि मारिया ऐसे परिवार से आते हैं जो बॉलीवुड से जुड़ा है. ऐसा लगता है स्क्रिप्ट राइटर्स का उनपर गहरा प्रभाव है और ये उनकी किताब और वेब सीरीज की पब्लिसिटी के लिए मार्केटिंग स्ट्रैटिजी लगती है. जहां तक शीना बोरा केस की बात है वो मामला अदालत में है और तब जांच से जुड़े सभी पुलिस वाले हर डिवेलपमेंट से अवगत थी.

राकेश मारिया ने अपनी किताब 'लेट मी से इट नाउ' में उनके अचानक से तबादले के संदर्भ में तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हुए एसएमएस के आदान प्रदान को भी हूबहू छापा है. मारिया ने उनकी जगह अहमद जावेद को मुंबई पुलिस आयुक्त बनाये जाने पर लिखा है कि क्या उन्होंने बताया था कि वो भी सोशली पीटर मुखर्जी को जानते थे? इस संदर्भ में पूछे जाने पर जावेद अहमद ने उल्‍टे राकेश मारिया को ही नसीहत दी कि लिखने के पहले बुनियादी तथ्यों की जानकारी लेनी चाहिए.

मुंबई पुलिस अफसरों में पहले भी गुटबाजी का आरोप लगता रहा है. अपनी कमीज सबसे सफेद बताने की कोशिश में दूसरों पर कीचड़ उछालने की कोशिश में ये भूल जाते हैं कि खामियाजा तो खाकी को ही भुगतना पड़ता है.

 
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