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100 साल पुराने पटना संग्रहालय को बचाने के लिए अभियान चालाने वाले को 'धमकी'

पुष्पराज ने आगे कहा, "हम चुप नहीं बैठने वाले. जब तक मौलिक कलाकृतियां, मूर्तियां और दुर्लभ पांडुलिपियां बिहार संग्रहालय से पटना संग्रहालय में वापस नहीं चली आती, तब तक हम अपने अभियान को और तेज करेंगे."

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100 साल पुराने पटना संग्रहालय को बचाने के लिए अभियान चालाने वाले को 'धमकी'

100 साल पुराने पटना संग्रहालय को बचाने के लिए अभियान चालाने वाले को 'धमकी' (नीतीश कुमार फाइल फोटो)

पटना: पटना के 100 साल पुराने संग्रहालय को बचाने के अभियान में जुटे व्यक्ति ने रविवार को दावा किया कि उनके अभियान को रोकने के लिए नीतीश कुमार की सरकार द्वारा उनको धमकाया जा रहा और उन पर दबाव बनाया जा रहा है. 'यक्षिणी को बचाओ, पटना संग्रहालय को बचाओ' अभियान के कार्यकर्ता और संयोजक पुष्पराज, पटना के पुराने संग्रहालय से नए संग्रहालय में बहुमूल्य कलाकृतियों, मूर्तियों और दुर्लभ पांडुलिपियों के स्थानांतरण के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं.

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नए संग्रहालय का उद्धाटन सोमवार को गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के दिन होना है. उन्होंने कहा, "पिछले एक महीने में मेरे इस अभियान को रोकने के लिए बिहार सरकार ने मुझ पर विभिन्न तरीकों से दवाब बनाया." पुष्पराज ने हालांकि इस बात पर जोर दिया कि समर्थन जुटाने के लिए यह अभियान अब और तेज होगा. पुष्पराज ने आईएएनएस को बताया, "हम पटना संग्रहालय को बचाने और भारत एवं विदेशों से अधिक समर्थन जुटाने के लिए अपने अभियान को और तेज करेंगे."

पुष्पराज ने आगे कहा, "हम चुप नहीं बैठने वाले. जब तक मौलिक कलाकृतियां, मूर्तियां और दुर्लभ पांडुलिपियां बिहार संग्रहालय से पटना संग्रहालय में वापस नहीं चली आती, तब तक हम अपने अभियान को और तेज करेंगे."

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उन्होंने कहा, "हम राज्य सरकार पर पटना संग्रहालय को बचाने के लिए अगले एक साल तक अपने अहिंसक आंदोलन को जारी रखकर दबाव बनाएंगे." बिहार संग्रहालय के अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) जे.पी.एन. सिंह के अनुसार, पटना संग्रहालय के 80 प्रतिशत प्रदर्शन-वस्तुओं को स्थानांतरित किया जाएगा. इसमें बौद्ध, जैन और सिख धर्म से संबंधित
कलाकृतियां शामिल हैं.

पटना संग्रहालय 2300 साल पुरानी देदारगंज यक्षी मूर्तिकला को भी खो देगा. पटना संग्रहालय दुनिया भर में यक्षिनी की शानदार संग्रह के लिए जाना जाता है. कई शिक्षाविद, इतिहासकार, विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों, शोधकर्ताओं और कार्यकर्ताओं को यह आशंका है कि पटना संग्रहालय, जोकि अप्रैल 2017 में अपने 100वें साल पूरा कर चुका है, धीमे-धीमे खत्म हो सकता है.

उन्होंने बिहार संग्रहालय से पटना संग्रहालय में दुर्लभ एवं अमूल्य पुरातात्विक प्राचीन वस्तुएं और कलाकृतियों के स्थानांतरण के खिलाफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक पत्र भी लिखा है. उन्होंने कहा, "हम हमारी साझी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाले प्राचीन काल की वस्तुओं के भविष्य के साथ हो रही इस गड़बड़ी का विरोध करते हैं." रोमिला थापर और इरफान हबीब सहित विश्व के विख्यात इतिहासकारों ने भी राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ एक याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं.


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