मुंबई और विशाखापट्टनम में नौसेना के युद्धपोतों पर पहुंच गए हजारों बच्चे

मुंबई और विशाखापट्टनम में नौसेना के युद्धपोतों पर पहुंच गए हजारों बच्चे

नौसेना के युद्धपोत पर बच्चे।

नई दिल्ली:

भारतीय नौसेना के युद्धपोत पर छोटे-छोटे स्कूली बच्चे... सुनने में भले ही अजीब लगे लेकिन ऐसा दिखा मुंबई और विशाखापट्टनम में। जी हां, एक नहीं, हजारों बच्चे नौसेना के कई युद्धपोतों में गए। बच्चों ने नौसेना को करीब से जाना और कई ने तय भी कर लिया कि अगर मौका मिला तो वे भी नौसेना में भर्ती होकर देश की सेवा करेंगे।  

नौसेना के युद्धपोतों पर स्कूलों के बच्चे नौसैना के कामकाज के बारे में समझते हुए।

दुनिया की चौथी सबसे बड़ी भारतीय नौसेना का स्थापना दिवस चार दिसंबर को है। इसी दिन भारतीय नौसेना के युद्धपोत ने 1971 में पाकिस्तान के कराची बंदरगाह को तबाह किया था। तब से इस दिन, यानि चार दिसंबर को नौसेना दिवस के तौर पर मनाया जाता है। करीब 140 युद्धपोत वाली नौसेना के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि थल सेना और वायुसेना की तरह उसकी बहादुरी और ताकत को लोग करीब से देख नहीं पाते।


अगर नौसेना का दमखम देखना हो तो उसे समुद्र में जाना होगा और यह हर किसी के लिए संभव नहीं है। लिहाजा नौसेना दिवस के मौके पर नौसेना मौका देती है कि आम लोगों और बच्चों को, कि वे उन्हें करीब से देखें और महसूस करें कि कैसे नौसैनिक समुद्र में महीनों रहते हैं।

मुबंई के 27 स्कूलों के 1188 विद्यार्थी विमान वाहक पोत विराट, युद्धपोत मैसूर, त्रिखंड , दीपक पर न केवल गए बल्कि वहां पर उन्हें कई अभ्यास दिखाए गए, मसलन युद्धपोत पर हवाई ऑपरेशन,  मैरिन कमांडो ऑपरेशन वगैरह। नौसेनिकों ने बच्चों को दिखाया कि कैसे वे अपनी समुद्री सरहद की हिफाजत में दिन-रात जुटे रहते हैं।

इसी तरह विशाखापट्टनम में तीन हजार से अधिक लोग आईएनएस रणविजय , सुमेधा, ऐरावत जैसे युद्धपोत पर गए। वहां पर युद्धपोत पर ही बच्चों के लिए पेंटिंग और निंबध प्रतियोगता हुई। जो जीते उन्हें अवार्ड भी दिए गए।
प्रतियोगिता में सफल हुए बच्चे।

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