विंटेज प्लेन से दुनिया नापने निकली महिला पायलट

विंटेज प्लेन से दुनिया नापने निकली महिला पायलट

दुनिया की सैर पर इस प्लेन में निकली महिला पायलट

नई दिल्ली:

ब्रिटेन से ऑस्ट्रेलिया तक पूरे 16000 मील का हवाई सफ़र और वो भी 1930 के दौर में चलने वाले खुले कॉकपिट वाले एयरक्राफ्ट में। जी हां, ब्रिटिश महिला पायलट ट्रैसी कर्टिस टेलर अपने स्टीयरमेन विंटेज बाइप्लेन से अकेले यह सफ़र तय कर रही हैं।

जोखिम से भरे इस सफ़र के दौरान ट्रैसी जब ग़ाज़ियाबाद के हिंडन एयरफोर्स बेस पर उतरीं तो भारतीय महिला पायलटों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। कल्पना कीजिए कि किसी खुली कार में हवा के थपेड़ों के बीच आपको ब्रिटेन से ऑस्ट्रेलिया तक 16000 मील का सफ़र तय करना पड़े। ब्रिटेन की महिला पायलट ट्रैसी कर्टिस टेलर इस कारनामे को अकेले अंजाम दे रही हैं। 
 


क़रीब 90 साल पुराने स्टीयरमेन एयरक्राफ्ट का कॉकपिट खुला है। किसी आधुनिक विमान की तरह इस एयरक्राफ्ट में दिशासूचक प्रणालियां भी नहीं हैं। तिरपन साल की ट्रैसी अपनी यात्रा के पड़ाव में हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पर उतरी हैं।
 

यहां से वो 26 नंवम्बर को आगरा,वाराणसी और कोलकात्ता होते हुए ढ़ाका के लिए रवाना हो जाएंगी। बर्ड इन ए बाइप्लेन के नाम से जानी जाने वाली ट्रैसी ने अपने पड़ावों में भारत को सबसे शानदार भी बताया। उन्होंने कहा कि उनकी ये यात्रा किसी रिकॉर्ड के नहीं बल्कि 1930 में इस कारनामे को करने वाली महान महिला पायलट एमी जॉनसन के श्रदांजलि के लिए है।
 

ट्रैसी को जब पता लगा कि अब भारतीय महिला पायलट लड़ाकू विमान उड़ा पाएंगी तो उन्होंने इसे महिलाओं की बेहतरी के लिए अच्छा कदम बताया। ट्रेसी ने कहा कि दुनिया के हर देश में एविएशन को महिलाओं की फील्ड नहीं समझा जाता। पुरुषों को एयरक्राफ्ट उड़ाने के मौके आसानी से मिल जाते हैं। मेरे लिए ये उड़ान एक ऊंचाई का सफरनामा है जिसने मुझे एक अलग नजरिया दिया। जब मैं थार के रेगीस्तान में उड़ान भर रही थी तो बहुत ही अच्छा लगा। एक अलग अनुभव महसूस हुआ इसलिए मैं यहां फिर आऊंगी।

वैसे एडवेंचर ट्रैसी के ख़ून में बहता है। इससे पहले वो केपटाउन से गुडवुड तक का सफ़र तय कर चुकी हैं। 1 अक्टूबर को ब्रिटेन से चली ट्रैसी की यात्रा अगले साल की शुरुआत में सिडनी में ख़त्म होगी। हिंडन में भारतीय महिला पायलटों ने ट्रैसी का सम्मान उनके साथ टाइगरमोथ उड़ाकर कदमताल करते हुए किया। भारतीय़ वायुसेना की महिला पायलटों ने ट्रैसी की उड़ान को प्रेरणा भरने वाला बताया और कहा कि अगर उन्हें भी मौका मिला तो वो भी ऐसी कोशिश करना चाहेगी लेकिन ये काफी मुश्किल है।

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