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  • क्या अनुपमा जायसवाल बहराइच में खिला पाएंगी कमल?
    पीएम मोदी, अखिलेश यादव की आक्रामक रैली और तीखी जुबानी जंग के बाद यूपी की बहराइच सीट सुर्खियों में आ गई है. अब दोनों पार्टियों के लिये यहां से चुनाव जीतना नाक का सवाल बन गया है. बीजेपी ने इस चुनावी रण से अनुपमा जायसवाल को उतारा है. पिछले विधानसभा चुनाव (2012) में अनुपमा जायसवाल को सपा के वकार अहमद शाह ने हरा दिया था. अनुपमा जायसवाल भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री है. 
  • यूपी चुनाव 2017: साफ छवि के सूर्यभान सिंह दे सकते हैं विपक्षी दलों को कड़ी टक्कर
    उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर निर्वाचन क्षेत्र में करीब 3,05,599 मतदाता हैं, जिनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या करीब 1,64,899 है. अभी इस सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है. सुल्तानपुर सीट पर लगातार दो बार से सपा विधायक अनूप संडा ने जीत दर्ज की है, लेकिन इस बार उनके लिए जीत की हैट्रिक मारना मुश्किल माना जा रहा है. पहले सपा में अंतर्कलह और फिर बीजेपी के लिए पीएम मोदी का जबरदस्त प्रचार संडा की जीत की राह में रोड़ा बन सकता है.
  • अयोध्या: क्या बीजेपी को उसका गढ़ वापस दिला पाएंगे वेद प्रकाश गुप्ता?
    उत्तर प्रदेश में अपने गढ़ अयोध्या को वापस अपनी झोली में डालने के लिए बीजेपी ने वेद प्रकाश गुप्ता को चुनावी अखाड़े में उतारा है. अयोध्या सीट बीजेपी के लिए खासा मायने रखती है. अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा उन कुछेक मुद्दों में से एक है जिनके बलबूत बीजेपी ने दो सीट से दिल्ली की कुर्सी तक का सफर तय किया है. 
  • अमेठी: एक राजा की दो रानियां मैदान में, कांग्रेस की अमिता सिंह को बीजेपी की गरिमा की चुनौती
    अमेठी राजपरिवार में चल रही विरासत की लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई थी कि राजमहल में रह रही राजा संजय सिंह की दोनों पत्नियों के बीच सियासी जंग शुरू हो गई. उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में दोनों एक दूसरे के आमने-सामने हैं. कांग्रेस ने अमेठी को अपनी परंपरागत सीट होने का दावा करते हुए अमिता सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है.
  • गरिमा सिंह को मिली अमेठी में एक बार फिर कमल खिलाने की जिम्‍मेदारी
    अमेठी राजपरिवार में चल रही विरासत की लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई थी कि राजमहल में रह रही राजा संजय सिंह की दोनों पत्नियों के बीच सियासी जंग शुरू हो गई. उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में दोनों एक दूसरे के आमने-सामने हैं. भारतीय जनता पार्टी ने जहां गरिमा सिंह को अमेठी सीट से प्रत्याशी बनाया है तो कांग्रेस ने अमेठी को अपनी परंपरागत सीट होने का दावा करते हुए अमिता सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है.
  • गठबंधन के बावजूद कांग्रेस की अमिता सिंह से है सपा के गायत्री प्रजापति की जंग
    समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच भले ही गठबंधन हो, लेकिन कुछ ऐसी सीटें भी है जहां दोनों पार्टियां आमने-सामने हैं. अमेठी सीट भी उनमें से एक है, जहां कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों ने अपने उम्‍मीदवार उतारे हैं. समाजवादी पार्टी ने अपने सीटिंग एमएलए गायत्री प्रजापति को टिकट दिया है.
  • इस बार बीजेपी से चुनावी मैदान में हैं दिग्गज नेता ज्वॉय सिंह
    कई पार्टियों के टिकट पर कई मर्तबा लंगथाबल विधानसभा सीट से चुनाव जीत चुके ओकराम ज्वॉय सिंह (ओ. ज्वॉय सिंह) इस बार बीजेपी के टिकट पर मैदान में हैं. मणिपुर की सियासत में ओ. ज्वॉय सिंह विपक्ष में रहकर भी अहम भूमिका निभाते आए हैं. उनका ऊंचा राजनीतिक कद और लंबा-चौड़ा अनुभव बीजेपी के काफी फायदेमंद साबित हो सकता है.  इस बार लंगथाबल विधानसभा सीट से ज्वॉय सिंह का मुकाबला कांग्रेस नेता एल. तिलोतमा देवी और मणिपुर नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट (एमएनडीएफ) के एम दिनेश से होगा.
  • क्‍या संघर्षों से लड़ने वाली पूजा पाल के हिस्‍से इस बार लगेगी सफलता...
    उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में कई चेहरे उतरे हैं. इनमें से कई नाम ऐसे हैं जो कई कारणों से प्रमुख बनते हैं. इन्‍हीं में से एक है इलाहाबाद पश्चिमी सीट पर निर्वतमान विधायक पूजा पाल. पूजा ने जिस तरह राजनीति के गलियारों में सफलता पाई है, वह उन्‍हें भीड़ से अलग बनाता है. आईए नजर ड़ाले उनके सफर पर...
  • रघुराज प्रताप सिंह: क्‍या इस बार टूट पाएंगा जीतने का इनका रिकॉर्ड
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का चरण जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, राजनीतिक दलों के बीच जोर-आजमाइश भी बढ़ती जा रही है. उप्र के प्रतापगढ़ जिले की सात विधानसभा सीटों पर इस बार भी कुंडा सीट अहम मानी जा रही है. इसका कारण है प्रदेश सरकार के मंत्री रघुराज प्रताप सिंह 'राजा भैया'.
  • यूपी की 'हॉट सीट' से मैदान में उतरे हैं अनुग्रह नारायण सिंह
    कांग्रेस प्रत्याशी विधायक अनुग्रह नारायण सिंह इन चुनावों में इलाहाबाद उत्तरी विधानसभा क्षेत्र से मैदान में हैं. पिछले विधानसभा चुनावों में अनुग्रह नरायण सिंह ने अपने कड़े प्रतिद्वंदी बीएसपी के हर्षवर्धन बाजपेई को हार का स्‍वाद चखाया था. साल 2012 के उन चुनावों में बीजेपी के उदयभान करवरिया तीसरे नंबर पर आए थे और चौथे नंबर पर रहे थे सपा के शशांक त्रिपाठी.
  • क्‍या चुनावी समीकरण बदल पाएंगे सिद्धार्थ नाथ सिंह!
    बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पार्टी का जाना माना चेहरा सिद्धार्थ नाथ सिंह इन चुनावों में इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से मैदान में हैं. खुद सिद्धार्थ इस सीट से उनके चुनाव लड़ने को पीएम मोदी का ‘एक्सपेरिमेंट’ बता रहे हैं.
  • दीप नारायण सिंह: क्‍या इस बार लगा पाएंगे हैट्रिक
    दो बार से एमएलए चुने जा रहे समाजवादी पार्टी के दीप नारायण सिंह एक बार फिर गरौठा क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं. उनके सामने सीट बचाने की चुनौती है. दीप नारायण सिंह यूपी विधानसभा में समाजवादी पार्टी से विधायक हैं. 2012 के उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इन्होंने उत्तर प्रदेश की गरौठा विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीता था. इन्‍हें 700030 वोट मिले थे.
  • मणिपुर: आसान नहीं होगा सुसिंद्रो मेती के लिए चुनाव जीतना
    बीजेपी ने मणिपुर विधानसभा चुनाव की खुरई सीट से इस बार भी एल सुसिंद्रो मेती पर भरोसा जताया है और उन्हें इसी सीट से टिकट दिया है. वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस एन. बिजॉय सिंह ने 5089 मतों के अंतर से हरा दिया था. इस बार भी मेती के सामने बिजॉय सिंह ही हैं. पिछले कुछ समय में इस सीट से बीजेपी ने अपनी स्थिति को मजबूत किया है, इसलिए इस बार मुकाबला कड़ा होगा. 
  • गोवा चुनाव 2017: लुइजिन्हो फ्लेरियो के लिए इम्तिहान की घड़ी
    गोवा की सियासत में अच्छी पैठ बना चुके अपने नेता लुइजिन्हो फ्लेरियो को कांग्रेस ने नेवलिम विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा है. 26 अगस्त, 1951 को जन्मे फ्लेरियो वर्ष 2013 से कांग्रेस के महासचिव हैं. इसके अलावा वह वर्ष 1998–99 के बीच दो बार गोवा के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. बीजेपी नेता पर्रिकर के केंद्रीय राजनीति में आने के बाद लुइजिन्हो फ्लेरियो के जरिए राज्य में अपनी खोई जमीन वापस पाने की जुगत में है. 
  • दिगंबर कामत: क्या करा पाएंगे कांग्रेस की सत्ता में वापसी?
    गोवा की मडगांव विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे दिगंबर कामत के लिए ये चुनाव कड़ा इम्तिहान है. उन पर कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने की जिम्मेदारी है. साल 2007 से 2012 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे कामत के काम और उनके चेहरे को पिछले विधानसभा चुनाव में जनता ने नकार दिया था.  8 मार्च, 1954 को मडगांव में जन्मे कामत स्विमिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. उनके पास बीएससी की डिग्री है. 
  • गोवा चुनाव 2017: गोम्स की अगुवाई में कितना उभरेगी 'AAP'
    पूर्व नौकरशाह एल्विस गोम्स ने जुलाई, 2016 में आम आदमी पार्टी का दामन थामा. गोम्स ने गोवा प्रशासन में 20 साल से ज्यादा काम किया है. आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने गोम्स को गोवा में मुख्यमंत्री पद का अपना उम्मीदवार बनाने की घोषणा की. गोम्स दक्षिणी गोवा की कुनकोलिम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. आप में शामिल होने के लिए उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी. उस समय वह आईजी जेल तथा शहरी विकास सचिव थे.
  • गोवा चुनाव 2017: बीजेपी के लिए बड़ी मुसीबत साबित हो सकते हैं वेलिंगकर
    सुभाष वेलिंगकर गोवा में आरएसएस के प्रमुख रह चुके हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से बगावत कर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोलने के कारण उन्हें अगस्त, 2016 में पद से हटा दिया गया था.  उन्हें आरएसएस प्रमुख के पद से हटाए जाने के विरोध में आरएसएस के करीब 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा दे दिया था. आपको बता दें कि वेलिंगकर करीब पिछले 54 सालों से आरएसएस से जुड़े हुए थे.
  • लक्ष्मीकांत पारसेकर: किस्मत का फैसला करेगा ये विधानसभा चुनाव
    इस बार गोवा विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर के भविष्य का फैसला करेंगे. वर्तमान में वह मेंड्रम विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और इस बार भी बीजेपी ने इन्हें इसी सीट से उतारा है. 4 जुलाई, 1956 को गोवा के परनेम ताल्लुका के हर्मल गांव में जन्मे पारसेकर को मनोहर पर्रिकर के केंद्र की राजनीति में जाने के बाद नवंबर, 2014 में मुख्यमंत्री बनाया गया था.  पारसेकर ने पणजी के सेंटर ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट इंस्ट्रक्शन एंड रिसर्च से एमएससी और बीएड किया है. वह हर्मल के एक स्कूल में प्रिंसिपल भी रहे हैं. मुख्यमंत्री बनाने जाने से पहले वह राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रहे. वह आरएसएस के भी काफी करीब रहे हैं
  • सूरजकुमार: क्या मां के त्याग की लाज रख पाएंगे मुख्यमंत्री के पुत्र?
    इस बार मणिपुर विधानसभा की खंगाबोक सीट के नतीजों पर सबकी नजरें होंगी. खंगाबोक सीट से मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के 29 वर्षीय पुत्र सूरजकुमार ओकराम अपनी मां ओकराम लंधोनी की जगह चुनाव लड़ रहे हैं. खंगाबोक सीट से लगातार दो बार से विधायक लंधोनी ने अपने बेटे के लिए यह सीट छोड़ी है.  कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे सूरजकुमार इस चुनाव के साथ ही अपनी सियासी पारी शुरू करने जा रहे हैं. वह अबकी बार मणिपुर के चुनाव में सबसे युवा प्रत्‍याशी भी हैं. गौरतलब है कि पूर्वोत्‍तर के इस राज्‍य में मुख्‍यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्‍व में कांग्रेस लगातार चौथी बार सत्‍ता में आने के लिए मैदान में है. 
  • ठाकुर विश्वजीत सिंह: क्या बीजेपी की उम्मीदों पर उतरेंगे खरे
    ठाकुर विश्वजीत सिंह को बीजेपी ने थोंगजू विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा है. पिछले विधानसभा चुनावों में उन्होंने इसी सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार बिजोए कोएजम को हराया था. इस क्षेत्र में कुल  28258 मतदाता हैं जिनमें से 13546 पुरुष और 14712 महिला मतदाता है. 
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