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  • अलका राय: कड़ी चुनौती की बीच क्‍या लहरा पाएंगी जीत का परचम
    मोहम्मदाबाद सीट पर मुख्तार अंसारी के भाई सिबगतुल्लाह के खिलाफ बीजेपी की अलका राय चुनाव लड़ रही हैं. आपको बता दें कि अलका राय के पति और विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के आरोप में मुख्तार जेल में है.
  • नीलकंठ तिवारी: पहली बार चुनाव लड़ रहे बीजेपी प्रत्याशी ने मुकाबले को बनाया दिलचस्प
    काशी में कुल आठ विधानसभा क्षेत्रों में से इस बार वाराणसी दक्षिणी सीट बेहद अहम मानी जा रही है. मोदी के संसदीय क्षेत्र में इस बार यह सीट सबसे अधिक चर्चा में है. वजह है यहां से बीजेपी के दिग्गज व वर्तमान विधायक श्यामदेव राय चौधरी का टिकट काटा जाना. श्यामदेव राय चौधरी लगातार सात बार चुनाव जीत चुके हैं. बीजेपी ने वर्तमान विधायक श्यामदेव राय चौधरी का टिकट काटकर नीलकंठ तिवारी को चुनावी अखाड़े में उतारा है. ऐसी खबरें हैं कि पार्टी ने श्याम देव राय चौधरी को विधान परिषद में भेजने का आश्वासन दिया है. 
  • अजय राय: विरोधियों के सामने गढ़ तोड़ने की चुनौती
    उत्तर प्रदेश में वाराणसी संसदीय सीट की पिंडरा विधानसभा सीट से वर्तमान विधायक अजय राय भी पूर्वाचल के बाहुबलियों में ही शुमार किए जाते हैं. जिले की यह एकलौती विधानसभा है, जिसका इतिहास काफी रोचक रहा है. कभी कोलअसला के नाम से बहुचर्चित यह सीट कम्युनिस्टों का गढ़ हुआ करती थी, लेकिन सीपीआई नेता उदल के इस किले में अजय राय ने ऐसी सेंध लगाई कि पिछले 20 वर्षो से उन्हें हराने में यहां कोई कामयाब नहीं हो पाया.
  • राणा राहुल सिंह: कांग्रेस के इस नेता के लिए सपा ने अपने प्रत्‍याशी का नाम लिया वापस
    राणा राहुल सिंह एक युवा नेता हैं और कांग्रेस पार्टी ने इन्‍हें गोरखपुर शहरी विधानसभा सीट से टिकट दिया है. राणा राहुल सिंह के खिलाफ कांग्रेस ने गोरखपुर शहर सीट से पुरानी सपाई राज कुमारी देवी के बेटे राहुल गुप्ता का टिकट फाइनल किया था, लेकिन कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कठबंधन के बाद सपा ने अपना कैंडिडेट वापस ले लिया था.
  • यूपी चुनाव 2017: क्या देवरिया सीट पर बसपा का खाता खुलवा पाएंगे त्रिपाठी...
    उत्तर प्रदेश का देवरिया जिला बिहार के गोपालगंज और सीवान से सटा हुआ है. चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देवरिया विधानसभा क्षेत्र में कुल  3,25,849  मतदाता हैं. जिनमें 1,81,535 पुरुष मतदाता हैं, जबकि 1,44,305 महिला मतदाता हैं.
  • नारद राय: क्‍या इस बार भी बलिया सीट पर जमा पाएंगे कब्‍जा
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ कैबिनेट में मंत्री रहे नारद राय अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का दामन थाम चुके हैं. नारद राय को मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव का करीबी माना जाता है. नारद राय बलिया से बसपा की टिकट पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं.
  • अंबिका चौधरी: मुलायम के क़रीबी और बसपा के प्रत्‍याशी क्‍या दर्ज कर पाएंगे जीत
    उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार में मंत्री रहे अंबिका चौधरी अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का दामन थाम चुके हैं. अंबिका चौधरी मुलायम के क़रीबी माने जाते थे. इतना ही नहीं हाल ही के दिनों में समाजवादी पार्टी में अंदरुनी कलह के दौरान वो हमेशा मुलायम के साथ खड़े दिखाई देते रहे थे. अंबिका चौधरी ने पिछला विधानसभा चुनाव बलिया की फेफना सीट से लड़ा था. इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी उपेंद्र तिवारी ने उन्हें पराजित किया था.
  • अल्ताफ अंसारी: क्या इस बार रोक पाएंगे बाहुबली मुख्तार अंसारी को?
    समाजवादी पार्टी ने मऊ विधानसभा की सदर सीट से इस बार अल्ताफ अंसारी को टिकट दिया है. इस सीट से अल्ताफ अंसारी को बसपा के उम्मीदवार बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी से कड़ी टक्कर मिलेगी. मुख्तार अंसारी का इस क्षेत्र में जबरदस्त दबदबा है. वह मऊ से कुल चार बार विधायक रह चुके हैं. 
  • स्वामी प्रसाद मौर्य: बसपा छोड़ बीजेपी से जुड़ने का फैसला क्‍या होगा सही साबित
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कुशीनगर के पंडरौना से स्वामी प्रसाद मौर्य बीजेपी के उम्मीदवार है. स्वामी प्रसाद मौर्य ने बहुजन समाज पार्टी का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थामा है. स्वामी प्रसाद मौर्य की छवि मजबूत नेता के रूप में जानी जाती है. आमतौर पर कहा जाता है कि स्वामी प्रसाद मौर्य ऐसे नेता है जो जिस भी पार्टी में रहे, अपने आसपास के इलाके के मतदाताओं को प्रभावित रखने की ताकत रखते हैं.
  • सूर्य प्रताप शाही: क्‍या इस बार जीत दर्ज कर पाएंगे बीजेपी के ये उम्‍मीदवार
    भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही इस बार के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पथरदेवा सीट से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार हैं. सूर्य प्रताप शाही पिछले दो दशकों में प्रदेश की भाजपा सरकार में न केवल कैबिनेट मंत्री रहे, बल्कि इनके पास गृह मंत्रालय, आबकारी व स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण महकमे भी रहे. सूर्य प्रताप शाही 1985 में पहली बार विधायक चुने गये थे. यह विधानसभा सीट परिसीमन के बाद कुशीनगर के नाम पर हो गयी है.
  • मऊ सदर विधानसभा सीट: क्या मायावती की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे 'बाहुबली' मुख्तार अंसारी
    मऊ विधानसभा की सदर सीट से बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी बीएसपी के टिकट से चुनावी मैदान में हैं. सपा से बेआबरू होने के बाद अपनी सीट बचाने का दबाव तो उन पर है ही पर साथ में उन पर मायावती की उम्मीदों का भी बोझ है. जेल में रहते हुए वे अपनी सीट और मायावती की उम्मीदों पर कैसे खरे उतरते हैं, यह बड़ा सवाल है, क्योंकि वे इस बार बीजेपी के निशाने पर हैं. 
  • मणिपुर चुनाव: बीजेपी के लिए कितने फायदेमंद साबित होंगे राधाबिनोद कोइजाम
    मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री राधाबिनोद कोईजाम इन विधानसभा चुनावों में बीजेपी के पाले में हैं. सितंबर, 2015 में बीजेपी ज्वॉइन करने से पहले वह अन्य कई पार्टियों में रह चुके हैं. वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की मणिपुर इकाई के अध्यक्ष भी रहे. 2007 में उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के टिकट पर थंगमेबंद हिजम लेखई विधानसभा सीट से चुनाव जीता. 15 फरवरी, 2001 को उन्होंने मणिपुर के 15वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. हालांकि उनकी सरकार बहुत छोटी अवधि (1 जून, 2001) के लिए रही. पीपुल्स डेमोक्रेटिक एलायंस की गठबंधन सरकार उसी वर्ष गिर गई. 
  • यूपी चुनाव 2017: अखिलेश के करीबी तेज नारायण पांडेय पर सपा को है पूरा भरोसा!
    अयोध्या में बीजेपी को मात देना हर एक राजनीतिक दल के लिए किसी बड़े चैलेंज से कम नहीं है. 1992 में बाबरी मस्जिद कांड के बाद कोई भी राजनीतिक दल बीजेपी को यहां मात नहीं दे पाया था, लेकिन समाजवादी पार्टी के तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय ने 2012 के विधानसभा चुनावों में ये कारनाम कर दिखाया था और फैजाबाद सीट पर सपा का झंडा लहराया था. उन्होंने 2012 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लल्लू सिंह को अयोध्या की फैजाबाद विधानसभा सीट पर मात दी थी.
  • गौरीगंज सीट से कांग्रेस के मोहम्‍मद नईम के सामने सपा के राकेश प्रताप सिंह दे रहे टक्‍कर
    उत्‍तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन के बावजूद दोनों पार्टियों ने 14 सीटों पर अलग-अलग उम्‍मीदवार उतारे हैं. अमेठी संसदीय क्षेत्र की गौरीगंज सीट भी उनमें से एक है. यहां कांग्रेस ने मोहम्मद नईम एक बार फिर चुनाव मैदान में उतरा है तो वहीं समाजवादी पार्टी ने इस सीट से मौजूदा विधायक राकेश प्रताप सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है.
  • प्रतीक भूषण सिंह: पिता से विरासत में मिली राजनीति को आगे बढ़ाने की जिम्‍मेदारी
    उत्तर प्रदेश में इस बार का विधानसभा चुनाव न सिर्फ सत्ता हासिल करने की लड़ाई है बल्कि अनेक नेताओं की अगली पीढ़ी को सियासी विरासत सौंपने का भी मौका है. इनमें एक नाम प्रतीक भूषण सिंह का भी है. प्रतीक भूषण सिंह सांसद बृज भूषण सिंह के बेटे हैं और पहली बार चुनाव में अपनी किस्‍मत आजमा रहे हैं.
  • क्या बहराइच से सपा की जीत का सिलसिला तोड़ पाएंगे बसपा प्रत्याशी अजीत प्रताप सिंह
    बहराइच सदर सीट से बसपा ने अजीत प्रताप सिंह को टिकट दिया है. अजीत प्रताप सिंह की टक्कर सपा के दिग्गज नेता वकार अहमद शाह की पत्नी रूबाब सईदा और बीजेपी की अनुपमा जायसवाल से है. पिछले विधानसभा चुनाव में अजीत प्रताप सिंह बसपा के टिकट पर ही प्रयागपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़े थे. लेकिन वह कांग्रेस मुकेश श्रीवास्तव उर्फ ग्यानेन्द्र प्रताप से हार गए थे.  ग्यानेन्द्र प्रताप ने उन्हें 27026 मतों के अंतर से हराया था.
  • क्या अनुपमा जायसवाल बहराइच में खिला पाएंगी कमल?
    पीएम मोदी, अखिलेश यादव की आक्रामक रैली और तीखी जुबानी जंग के बाद यूपी की बहराइच सीट सुर्खियों में आ गई है. अब दोनों पार्टियों के लिये यहां से चुनाव जीतना नाक का सवाल बन गया है. बीजेपी ने इस चुनावी रण से अनुपमा जायसवाल को उतारा है. पिछले विधानसभा चुनाव (2012) में अनुपमा जायसवाल को सपा के वकार अहमद शाह ने हरा दिया था. अनुपमा जायसवाल भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री है. 
  • यूपी चुनाव 2017: साफ छवि के सूर्यभान सिंह दे सकते हैं विपक्षी दलों को कड़ी टक्कर
    उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर निर्वाचन क्षेत्र में करीब 3,05,599 मतदाता हैं, जिनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या करीब 1,64,899 है. अभी इस सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है. सुल्तानपुर सीट पर लगातार दो बार से सपा विधायक अनूप संडा ने जीत दर्ज की है, लेकिन इस बार उनके लिए जीत की हैट्रिक मारना मुश्किल माना जा रहा है. पहले सपा में अंतर्कलह और फिर बीजेपी के लिए पीएम मोदी का जबरदस्त प्रचार संडा की जीत की राह में रोड़ा बन सकता है.
  • अयोध्या: क्या बीजेपी को उसका गढ़ वापस दिला पाएंगे वेद प्रकाश गुप्ता?
    उत्तर प्रदेश में अपने गढ़ अयोध्या को वापस अपनी झोली में डालने के लिए बीजेपी ने वेद प्रकाश गुप्ता को चुनावी अखाड़े में उतारा है. अयोध्या सीट बीजेपी के लिए खासा मायने रखती है. अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा उन कुछेक मुद्दों में से एक है जिनके बलबूत बीजेपी ने दो सीट से दिल्ली की कुर्सी तक का सफर तय किया है. 
  • अमेठी: एक राजा की दो रानियां मैदान में, कांग्रेस की अमिता सिंह को बीजेपी की गरिमा की चुनौती
    अमेठी राजपरिवार में चल रही विरासत की लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई थी कि राजमहल में रह रही राजा संजय सिंह की दोनों पत्नियों के बीच सियासी जंग शुरू हो गई. उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में दोनों एक दूसरे के आमने-सामने हैं. कांग्रेस ने अमेठी को अपनी परंपरागत सीट होने का दावा करते हुए अमिता सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है.
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