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बसपा-सपा साथ-साथ! मायावती ने फिर उठाया ईवीएम में गड़बड़ी का मुद्दा, रामगोपाल ने किया स्वागत

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खास बातें

  1. मायावती ने ईवीएम मसले को कोर्ट में ले जाने का फैसला किया
  2. रामगोपाल यादव ने कहा, संदेह दूर करने का जिम्मा सरकार का
  3. सरकार निर्वाचन आयोग को फंड मुहैया नहीं करा रही
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश चुनावों में हार के बाद मायावती ने फिर से ईवीएम की विश्ववसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सोमवार को मायावती ने संसद परिसर में साफ कहा कि उन्होंने अब इस मसले को लेकर कोर्ट जाने का फैसला किया है. समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने मायावती के कदम का स्वागत किया है. इस तरह आपस में दो घोर विरोधी दल इस मुद्दे पर एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं.

विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के सदमे से मायावती अब भी पूरी तरह नहीं उबर पाई हैं. सोमवार को संसद पहुंचीं मायावती ने फिर से ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने कहा कि वे अब इस मामले को इसी हफ्ते कोर्ट लेकर जाने वाली हैं. मायावती ने कहा, "हम अगले 2-3 दिन में ईवीएम मामले को कोर्ट में लेकर जाएंगे."

विधानसभा चुनावों में हार के बाद पिछले एक हफ्ते में यह दूसरा मौका है जब मायावती ने यह मुद्दा उठाया है. दरअसल ईवीएम मुद्दे को कोर्ट ले जाने का फैसला कर मायावती ने इस संवेदनशील मसले पर फिर राजनीतिक बहस छेड़ दी है. उनका यह बयान ऐसे वक्त पर आया है जब चुनाव आयोग साफ शब्दों में कह चुका है कि मौजूदा ईवीएम व्यवस्था विश्वसनीय है और ईवीएम पर उठ रहे सवाल बेबुनियाद हैं.

उधर समाजवादी पार्टी ने मायावती के फैसले का स्वागत किया है. सपा महासचिव और सांसद राम गोपाल यादव ने एनडीटीवी से कहा कि जनता के मन से संदेह जल्दी निकल जाए, ये जिम्मेदारी सरकार की है.

राम गोपाल यादव ने एनडीटीवी से कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी संदेह व्यक्त किया था और कहा था कि पारदर्शिता होनी चाहिए. ईवीएम के साथ पेपर ट्रेल लाने की बात थी. कोर्ट के आदेश के बाद इलेक्शन कमीशन ने तीन बार सरकार को फंड के लिए लिखा लेकिन सरकार ने जवाब नहीं  दिया. मेरठ में 20 पोलिंग स्टेशनों पर ईवीएम मशीन नई व्यवस्था के साथ लगी थीं. उनमें से अधिकतर में हम जीते. पोस्टल बैलेट्स में भी 90% वोट हमें मिले. ईसी की नियत पर हमें जरा भी संदेह नहीं है. लेकिन चुनाव आयोग बार-बार सरकार से व्यवस्था को मजबूत करने के लिए फंड्स की गुज़ारिश कर रहा है लेकिन सरकार फंड मुहैया नहीं करा रही है."

जाहिर है...चुनावों में मिली करारी हार ने ईवीएम के मामले पर अब दो आपसी विरोधियों को एक ही मंच पर खड़ा होने के लिए मजबूर कर दिया है.


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