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चुनावी ब्लॉग

  • भगोड़े विजय माल्या ने सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया को दी बधाई, तो लोगों ने किया ट्रोल
    भगोडे विजय माल्या ने कांग्रेस नेता सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया को ट्वीट कर दी बधाई तो ट्रोलर्स ने घेर लिया.
  • ऐसे 200 मंदिर जो नेताओं को वोट और नोट नहीं देते...इसीलिए गिर रहे हैं..
    टैक्सी ड्राइवर बोला इस इलाके में अवैध पत्थर निकालने का काम पूरी दमदारी से चलता है. रात को आने का मतलब है अपराध और अपराधियों के बीच फंसना. फिर बोला बीस साल से गाड़ी चला रहा हूं सिर्फ एक बार शनिचरा मंदिर आया हूं... पहले पता होता तो गाड़ी ही नहीं लाता... मुझे और तनाव हो गया कि बड़ी जोखिम इस यात्रा में मोल ले ली... खैर तीन-चार छोटे गांव से गुजरते हुए मैं बटेश्वर मंदिर पहुंचा. दस फिट से लेकर चालीस पचास फीट तक बने सैकड़ों प्राचीन मंदिरों को देखकर मेरे भीतर खून का संचार बढ़ गया...एक ऐसा अद्भुत नजारा जो कल्पना से परे था. गुप्तकालीन बने मंदिरों की छतें सपाट थी फिर कुछ मंदिरों के ऊपर गुंबद दिखे... इस मंदिर के बीच एक सरोवर है जो बताता है किसी समय ये जगह शैव संप्रदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण रही होगी. सैकड़ों मंदिर और उसके अंदर रखे शिवलिंग अलग-अलग आकार के थे. जो गुप्त काल से प्रतिहार काल तक के मंदिरों के स्थापत्य कला के क्रमिक विकास को शानदार तरीके से दर्शा रहे थे. तमाम प्राचीन मूर्तियां अच्छी हालत में इधर-उधर बिखरी पड़ी थी.
  • मी लॉर्ड - कनार्टक के बाद, इंसाफ सोने न पाए
    नोटबंदी के नाम पर आम जनता को महीनों परेशान किया गया, तो फिर कनार्टक के सभी विधायकों का नारको टेस्ट क्यों न हो, जिससे भ्रष्ट व्यवस्था के माफिया तंत्र के पर्दाफाश से 'रियल न्यू-इंडिया' बन सके.
  • कर्नाटक में नैतिक कौन, अनैतिक कौन...?
    यह सच है कि कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर, यानी JDS के बीच तीखा टकराव रहा. कांग्रेस आरोप लगाती रही कि JDS दरअसल BJP की 'बी टीम' है. इस लिहाज़ से BJP की यह शिकायत जायज़ है कि अब चुनाव के बाद कांग्रेस और JDS का गठबंधन 'अपवित्र' और जनादेश-विरोधी है. इस 'अपवित्र' को इस बिना पर सही नहीं ठहराया जा सकता है कि ठीक यही काम BJP ने हाल ही के दिनों में गोवा सहित तीन राज्यों में किया है और आज जो लोग कर्नाटक में कांग्रेस की कोशिश को 'लोकतंत्र के साथ खिलवाड़' बता रहे हैं, वही BJP के कृत्य को अमित शाह का रणनीतिक पौरुष बताकर ताली बजा रहे थे.
  • कर्नाटक चुनाव पर मेरी अंतिम राय, मेरे हिसाब से यह होने वाला है...
    मेरा मानना है कि कर्नाटक में BJP का जीतना देश के लिए अच्छा होगा. जीत के बाद प्रधानमंत्री दिल्ली आएंगे और कुछ काम करेंगे. अगर हार गए, तो वह अभी से उस राज्य की तरफ चले जाएंगे, जहां चुनाव होने वाले होंगे.
  • राहुल गांधी के PM बनने की बात से इतनी हलचल क्यों...?
    अब राहुल गांधी देश में जहां-जहां जाएंगे और बोलेंगे, जनता उनसे यही उम्मीद लगाएगी कि वह देश के लिए भविष्य की योजनाएं भी बताएं. हालांकि किसानों और बेरोज़गारों की चिंताओं को वह पहले से उठा रहे हैं, लेकिन अब किसानों और बेरोज़गारों के लिए मांग उठाने का वक्त नहीं बचा. उन्हें अब वैसी योजनाओं का खाका लेकर आना पड़ेगा, जिनमें इन दोनों वर्गों की समस्याओं का समाधान हो.
  • कर्नाटक बना कुरूक्षेत्र: क्‍या कांग्रेस के आखिरी किले को ध्‍वस्‍त कर पाएगी बीजेपी
    प्रधानमंत्री पहले यहां 15 रैलियां करने वाले थे अब वे 21 रैलियां करेंगे. यानि बीजेपी ने सबकुछ दांव पर लगा दिया है यहां तक की प्रधानमंत्री को भी. मगर सबसे बडा सवाल उठता है कि आखिर कर्नाटक बीजेपी के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है.
  • गुजरात चुनाव : हिले-हिले से मेरे सरकार नजर आते हैं!
    पिछले 24 घंटों में गुजरात में बहुत कुछ बदला है. जो जहां था अब वह वहां नहीं है. यह नए गणित और समीकरणों की शुरुआत भी है. बीजेपी अब तीन बड़े शहरों अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा की कर्जदार है, जिसने उसे मुसीबत से उबार लिया. सूरत ने तो मानो 180 डिग्री की पलटी खाई. जहां कैमरे व्यापारियों को नारे लगाते और लाठी खाते मजदूरों को दिखाते थे वहां जश्न बीजेपी का है.
  • गुजरात विधानसभा चुनाव में क्या कमाल कर पाएंगे राहुल गांधी?
    अभी तक बीजेपी नेताओं को लगता था कि प्रधानमंत्री और अमित शाह की जोड़ी के सामने कोई नहीं टिक सकता. मगर तभी राहुल गांधी की एंट्री होती है. गुजरात में वो भी द्वारका मंदिर से पूजा करने के बाद. 
  • अब BJP को मुस्लिमों का ज़्यादा ध्यान रखना होगा...
    अब बीजेपी के पास न सिर्फ राज्य को बेहतर तरीके से चलाने की ज़िम्मेदारी आयद होती है, बल्कि यह ज़िम्मेदारी भी उसी की है कि उन पर भरोसा करने वाले, और भरोसा नहीं करने वाले मुस्लिम समाज समेत समूची जनता बेखौफ नई सरकार को अपनी सरकार मान सके, क्योंकि दादरी कांड और मुज़फ़्फ़रनगर दंगों में समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव सरकार को लापरवाही और ढिलाई का कसूरवार बताने का मौका बीजेपी के हाथ से जा चुका है...
  • यूपी विधानसभा चुनाव 2017 : 'गधे' पर अखिलेश यादव की बयानबाजी, एक तीर से दो निशाने
    यूपी में आजकल गधों को लेकर राजनीति होने लगी और इसमें जुबानी जंग तेज है. शुरुआत सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने की और फिर इस पर लगातार बयानबाजी चली आ रही है. एक जानवर किसी चुनाव में इतना महत्वपूर्ण हो जाएगा, कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा.
  • मोदी जी, यह विकास पुरुष की भाषा नहीं है
    हम उदारवादी जब भी एनडीए सरकार के काम पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करते हैं या फिर प्रधानमंत्री को उत्तर प्रदेश के कल्याण के बारे में बोलते हुए सुनते हैं, वह ऐसा कुछ कह देते हैं कि हम वापस इतिहास में पहुंच जाते हैं.
  • रवीश कुमार का ब्‍लॉग: क्या लगता है आपको, यूपी में कौन जीतेगा!
    यूपी में कौन जीत रहा है, इस सवाल के दागते ही फन्ने ख़ां बनकर घूम रहे पत्रकारों के पाँव थम जाते हैं. लंबी गहरी साँस लेने लगते हैं. उनके चेहरे पर पहला भाव तो यही आता है कि दो मिनट दीजिये, नतीजा बताता हूँ लेकिन दो मिनट बीत जाने के बाद चेहरे का भाव बदल जाता है.
  • मायावती के संघर्ष को अन्य नेताओं के समकक्ष न रखे मीडिया
    इन दिनों मायावती की चर्चा इस बात पर काफी हो रही है कि मीडिया में उनकी चर्चा नहीं हो रही. खुद मायावती भी इसे अब अपनी रैलियों में कहने लगी हैं. रैलियों में जाकर महसूस किया कि मायावती जिस समाज से आती हैं, उस समाज के लोग उन्हें बहुत आशा भरी निगाहों से देखते हैं, उन्हें किसी हीरो की तरह मानते हैं. मायावती एक बार पूरे 5 वर्षों के लिए सरकार चला चुकी हैं तो अब उनका मूल्यांकन दो तरह से किया जाएगा कि उन्होंने अपने समाज के लिए क्या किया और एक मुख्यमंत्री के तौर पर कैसी रहीं.
  • यूपी चुनाव : हर छोटे-बड़े दल ने पाल रखी हैं उम्मीदें
    उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए मतदान अपने दूसरे चरण में पहुंच चुका है, लेकिन अभी भी कुछ राजनीतिक दलों में चुनावी रणनीति को लेकर असमंजस बरक़रार है. ये दल कोई छोटे या महत्त्वहीन नहीं, बल्कि ऐसे दल हैं जो एक न एक प्रदेशों में सत्ता में हैं.
  • यूपी की जूलियटों, खोल दो अपनी लटों को...बचा लो अपने रोमियो को
    प्रेम तो रोमियो और जूलियट दोनों को हुआ था, लेकिन एंटी रोमियो दल बनाने वालों को रोमियो ही क्यों खलनायक दिखा, इसके कारण गूगल जगत में ज्ञात नहीं हैं. रोमियो और जूलियट की प्रेम कहानी की पृष्ठभूमि में परिवारों की दुश्मनी है, जिसे यूपी में हिन्दू और मुसलमान की दुश्मनी में बदल दिया गया है.
  • मुरादाबाद में मुकाबला : विलायती बनाम बादशाही दवाखाना
    मुरादाबाद की दीवारों पर लिखे नारों से सावधान. आपको भ्रम हो सकता है कि यहां मुकाबला सपा, बसपा और भाजपा के बीच नहीं है बल्कि गुप्त रोग का प्रकट इलाज करने वाले बादशाही दवाखाना और विलायती दवाखाना के बीच है. चुनाव आयोग ने दीवारों पर लिखे तमाम दलों के नारों को पुतवा दिया है. लिहाजा नेताओं से ज्यादा सेक्स समस्या को दूर करने वालों के घोषणापत्र लाल और नीली स्याही से लिखे नजर आते हैं. मुरादाबाद स्टेशन रोड की दीवारों से लगा कि सेक्स रोग महामारी की शक्ल ले चुका है या ये हो सकता है कि दवाखाना वाले ही महामारी बन चुके हैं.
  • पंजाब के गेस्ट लेक्चरर की व्यथा-कथा - मत सुनिहो ऐ राजा जी...
    शिक्षकों की दुनिया की यह विचित्र हकीकत है. अकेले नहीं बोल सकते, तो हर राज्य के शिक्षक मिलकर तो बोल सकते हैं. अपना हक मांग सकते हैं. डरकर तो देख ही लिया है, उससे एडहॉक के अलावा क्या मिला. इसलिए मांगकर देख लीजिए. हो सके, तो लड़कर भी देख लीजिए.
  • उत्तर प्रदेश के दंगल में सुल्तान बनेगा लोकतंत्र...
    उत्तर प्रदेश के चुनाव, चाहे वे लोकसभा के हों या विधानसभा के, उस पर उस प्रदेश की ही नहीं बल्कि पूरे देश की नजर हमेशा से ही रही है, सो इस बार भी है. गणना वाली राजनीतिक प्रणाली में सबसे बड़ी जनसंख्या वाले राज्य की हैसियत भी बड़ी हो जाती है, वह तो है ही, लेकिन इस बार के चुनाव परिणाम और चुनावी परिदृश्य, दोनों अपने अंदर इससे कई गुना अधिक अर्थों को समेटे हुए हैं.
  • तमिलनाडु में इतिहास पलटने वाला एक फैसला
    तमिलनाडु की जनता ने पिछले 26 वर्षों से किसी एक दल को पांच वर्ष से ज्यादा शासन करने का अधिकार नहीं दिया, लेकिन इस वर्ष के नतीजे ने इस समीकरण को पलट कर रख दिया है।
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