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चुनावी ब्लॉग

  • केरल में बदल गई गद्दी, लेकिन भगवा खिड़की भी खुली
    कर्नाटक में बीजेपी इसी तरह बढ़ी थी, जैसे वह केरल में बढ़ रही है। हालांकि फर्क यह है कि केरल में कांग्रेस को अधिकतर मुसलमानों और ईसाइयों के वोट मिलते हैं। उन्हीं के ज्यादातर संगठन उसके मोर्चे में हैं। कांग्रेस की हिन्दू वोटों में हिस्सेदारी वाममोर्चा से कम है।
  • पश्चिम बंगाल में ममता की शानदार जीत और वाममोर्चे की करारी हार के मायने
    बहरहाल, इन नतीजों का कांग्रेस से भी अधिक बुरा असर वाममोर्चे पर होगा और प्रकाश करात के बाद माकपा की कमान संभालने वाले सीताराम येचुरी के लिए यह अच्छी खबर नहीं है। एक और बात यह कि कम से कम बंगाल के इन नतीजों से 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को कुछ लाभ शायद ही मिले।
  • असम का चुनाव परिणाम, और कांग्रेस की हार के 10 प्रमुख कारण...
    असम विधानसभा चुनाव के नतीजों में अपेक्षा के अनुरूप कांग्रेस की हार हुई है और 15 वर्ष से मुख्यमंत्री रहे तरुण गोगोई चौथी पारी जीतने में नाकाम रहे। परिणाम आने के बाद अब गोगोई की हार के 10 प्रमुख कारण कुछ इस प्रकार समझे जा सकते हैं...
  • क्या चुनावी तुलनाओं के प्रतिशोध में केरल को सोमालिया तक ले गए प्रधानमंत्री...?
    चुनावी राजनीति में थोड़ी किरकिरी तो सबकी हो जाती है। इसी बहाने हम जैसे लोगों को केरल की जनजाति और सोमालिया का अध्ययन करने का मौका मिला, उसके लिए प्रधानमंत्री का शुक्रिया। कई बार किसी का नहीं जानना किसी और के जानने का मार्ग प्रशस्त कर देता है।
  • बंगाल में फिर एक बार ममता सरकार की संभावना!
    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव अंतिम चरण के मतदान के साथ बृहस्पतिवार को संपन्न हो गया। यह चुनाव अब तक सबसे निष्पक्ष चुनाव था। इस चुनाव में किसी दल को न तो अपने विरोधियों को डराने का मौका मिला न ही चुनाव आयोग पर आरोप लगाने का बहाना मिला।
  • असम के भारी मतदान ने बढ़ाया असमंजस
    पांच राज्य - असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पुदुच्चेरी के जनादेश नई सियासी फिज़ा तैयार करेंगे। इसमें असम ही एकमात्र राज्य है जिसके नतीजे कांग्रेस और बीजेपी दोनों के आला नेताओं की सियासत के लिए सबसे अधिक काम के होंगे।
  • पश्चिम बंगाल में हिंसा के बीच लोकतंत्र का आह्वान
    आज, जब पश्चिम बंगाल में विधान सभा के चुनाव अपने अंतिम चरणों में है, तब वही वाम मोर्चा न केवल सत्ता में अपनी वापसी के प्रति उत्साहित है, बल्कि उस प्रदेश में कभी कोई अस्तित्व न रखने वाली भारतीय जनता पार्टी को भी अपने अच्छे प्रदर्शन की पूरी उम्मीद है।
  • पश्चिम बंगाल का मन ममतामयी या वामपंथी...?
    वाममोर्चा-कांग्रेस गठजोड़ की ताकत से इनकार नहीं किया जा सकता। जहां तक भाजपा की बात है, दक्षिणपंथी राजनीति की गुंजाइश अभी भी बंगाल में बनती नहीं दिख रही है। फिर भी बंगाल के नतीजे महत्वपूर्ण हैं और आगे की सियासी दशा-दिशा तय कर सकते हैं।
  • असम विधानसभा चुनाव : सरायघाट के युद्ध का 2016 संस्करण
    आज जब असम निवासी अपने लिए नई सरकार चुनने के लिए एक चरण की वोटिंग कर चुके हैं और 11 अप्रैल को दूसरे और अंतिम चरण का मतदान होना है, तो सवाल उठता है – क्या असम में शांति और विकास की गाड़ी पटरी पर बनी रहेगी...?
  • आखिर क्या कमाल करते चले जा रहे हैं प्रशांत किशोर...
    उत्तर प्रदेश में प्रशांत किशोर की योजना के तहत कांग्रेस के लिए 100 सीटों का लक्ष्य है। यह बताता है कि प्रशांत किशोर ने कांग्रेस के लक्ष्य प्रबंधन के लिए विश्वसनीयता के पहलू पर कितनी ईमानदारी से सोचा है।
  • जनता भुलाए नहीं भूल पा रही है लुभावने चुनावी वादों को...
    भले ही कुछ करने का समय निकल गया हो, लेकिन मुश्किल हालात में लोगों का हौसला बनाए रखने के लिए दलीलें जमा करके रखने का काम तो फौरन शुरू हो ही जाना चाहिए, क्योंकि कहीं ऐसा न हो कि सरकार के प्रवक्ताओं को ऐन मौके पर कुछ भी न सूझे।
  • पानी की छीना-झपटी के दिन आने की आहट
    पानी का मुद्दा पंजाब के चुनाव के लालच में सन गया है। सतलज यमुना जोड़ नहर का मसला अभी पंजाब और हरियाणा तक सीमित दिख रहा है। जल्द ही यह फैलेगा।
  • पश्चिम बंगाल में एक बार फिर ममता बनर्जी सरकार!
    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार का काम शुरू हो चुका है। हर राजनीतिक दल अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर रहा है। मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दल व कांग्रेस के नए गठबंधन के बीच होगा।
  • बाबा का ब्लॉग : बिहार में अगर 'पूरा होता' महागठबंधन, तो बीजेपी का होता और बुरा हाल
    बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू,कांग्रेस और आरजेडी के महागठबंधन को अन्य पार्टियों ने 19 सीटों पर नुकसान पहुंचाया। बहुजन समाज पार्टी जिसकी बिहार चुनाव में चर्चा भी नहीं हुई, उसने महागठबंधन को सबसे अधिक 11 सीटों पर जीतने से रोक दिया।
  • प्राइम टाइम इंट्रो : बीजेपी के बुज़ुर्गों की नाराज़गी
    बिहार में हार क्या हुई बीजेपी में हार को लेकर एक दूसरे को हराने वाले सामने आ गए हैं। लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, शांता कुमार और यशवंत सिन्हा ने साझा बयान जारी किया है। इस बयान पर हस्ताक्षर यशवंत सिन्हा के हैं।
  • मैं बताता हूं बिहार के विधानसभा चुनाव में कौन जीतेगा - रवीश कुमार
    आप क्या चाहते हैं, क्या होता दिख रहा है, देखने वाला कौन है और क्या होगा इन चार बातों की कसौटी पर किसी भी चुनावी भविष्यवाणी को परखा जाना चाहिए। बिहार की भविष्यवाणी को लेकर लोग दो खेमों में बंट गए हैं।
  • रवीश कुमार : इस वक्त बिहार चुनाव से भी अहम हैं एर्नाकुलम के पंचायत चुनाव...
    केरल में जो हो रहा है, वह सामान्य घटना नहीं है। कंपनियां अगर कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व के तहत किए जाने वाले कार्यों के बदले पंचायतों पर कब्ज़ा कर लें तो क्या होगा। कंपनी के प्रभुत्व वाले कॉरपोरेट के साथ राजनीतिक दल कैसे बर्ताव करेंगे।
  • बिहार : यादव या भूमिहार!
    हमारे राजनीतिक दलों में गजब की क्षमता है। कभी वे सबको हिन्दू-मुसलमान खेमे में गोलबंद कर देते हैं तो कभी अलग-अलग जातियों को बांट देते हैं। बिहार चुनाव ने पूरे जनमत को जाति के फ्रेम में कैद कर दिया है।
  • बिहार : क़स्बों का शहर होना और शहर का कस्बा बने रहना
    बिहार के कस्बाई चरित्र के शहरों में आकांक्षाएं खौल रही हैं, उनका भाप इन बेतरतीब शहरों में निकल नहीं पा रहा है। जैसे तसले के भीतर चावल का पानी तो खौल रहा है लेकिन ढक्कन के कारण एक बार में बाहर नहीं आ पा रहा है।
  • दिखी बदलाव की बयार, अगर साइकिल न होती तो न होता यह बिहार
    बिहार में बाइक-सवार लड़कियां कम दिखती हैं, मगर गली-गली में साइकिल-सवार लड़कियों को देख लगता है कि काफी कुछ बदला है। हमारी राजनीति शायद लड़कियों के बदलाव को बदलना नहीं मानती, मगर आप किसी भी सड़क पर झुंड में या अकेले साइकिल चलाती लड़कियों को देख गदगद हो सकते हैं।
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