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चुनावी ब्लॉग

  • मज़बूत नेतृत्व बनाम मज़बूत विपक्ष की आवाज़ का चुनाव
    हिन्दुस्तान का मतदाता अपनी सरकारों के बारे में किस तरह से सोचता है, उसका एक और परिपक्व उदाहरण दिल्ली चुनाव के नतीजे से मिलने जा रहा है।
  • एक्जिट पोल पर राजीव रंजन का विश्लेषण : केजरीवाल नहीं, अपने 'दंभ' की वजह से हारेगी बीजेपी!
    अब जबकि दिल्ली की जनता ने वोट डाल दिया है, तो हर किसी को नतीजों का इंतजार है। ज्यादातर न्यूज चैनलों के सर्वे बता रहें है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी और बीजेपी के हाथ एक बार फिर दिल्ली की गद्दी आते-आते रह जाएगी।
  • रवीश कुमार : दिल्ली के चुनाव में दर्द-ए-एनसीआर
    दिल्ली बंद है। नोएडा, ग़ाज़ियाबाद, फरीदाबाद और गुड़गांव के लोग असहाय-से टीवी देख रहे हैं। यहां के लोग दिल्ली में काम करते हैं, इसलिए चुनाव की सरगर्मियों में शामिल तो हैं, मगर वोट नहीं दे सकते।
  • उमाशंकर सिंह की कलम से : दिल्ली चुनाव में कहां टिकेगी कांग्रेस
    दिल्ली का चुनाव कांग्रेस पार्टी के लिए भी काफ़ी अहम है। कांग्रेस ने दिल्ली में अपने ढह चुके पुराने गढ़ों में फिर से मज़बूती हासिल करने की पुरज़ोर कोशिश की है, लेकिन इस चुनाव के नतीजे बताएंगे कि दिल्ली में कांग्रेस कहां खड़ी है।
  • इस दिल्ली को भी दिल्ली समझे कोई...
    देश और दुनिया में स्वर्ग बना देने के नारे के साथ दिल्ली कई चुनाव देख चुकी है। ऐसा नहीं है कि कुछ नहीं हुआ। हर बार दिल्ली पहले से कुछ बदल ही जाती है, लेकिन दिल्ली वह नहीं है, जो इंडिया गेट के आसपास की तस्वीरें बताती हैं।
  • बाबा की कलम से : बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना
    विडंबना यह है कि दिल्ली में तृणमूल का भी कोई आधार नहीं, और सीपीएम भी अभी तक केवल एक वार्ड की सीट जीत पाई है, और मजेदार बात यह है कि पश्चिम बंगाल में एक-दूसरे के घनघोर विरोधी दिल्ली में एक ही पार्टी को समर्थन देने की अपील अपने-अपने वोटरों से कर रहे हैं।
  • कांटे का मुकाबला : बीजेपी के सामने अपने वोटरों को बाहर निकालने की चुनौती
    आज दिल्ली चुनाव की सच्चाई यही है... कांग्रेस का वोट खिसककर झाड़ू के पास जा रहा है। बीजेपी के सामने इस बढ़त को काटने के लिए अपने वोटर को बाहर निकालने की चुनौती है। शनिवार को वोटर टर्नआउट अहम संकेत देगा, तैयार रहिएगा...
  • सुशांत सिन्हा की कलम से : 'कौन जीतेगा' सोचने की जगह सोचिए, 'किसे जीतना चाहिए'
    किसी को साफ-साफ नहीं पता कि दिल्ली कौन फतह करने जा रहा है, और इसलिए अब वोटर के लिए वक्त है कि वह 'आपको क्या लगता है, कौन जीतेगा' पूछने कि बजाए खुद से पूछे कि 'मुझे क्या लगता है, किसे जीतना चाहिए'... फैसले की घड़ी आ चुकी है।
  • शरद शर्मा की खरी खरी : केजरीवाल की ईमानदारी पर हमला क्यों?
    मंगलवार 3 फरवरी शाम को रोहिणी की रैली में पीएम नरेंद्र मोदी ने केजरीवाल और आम आदमी पार्टी पर करारा हमला करते हुए कहा कि जिनके पास स्विंस बैंकों के खाते की जानकारी है वो कहते हैं कि हमको किसने चंदा दिया पता नहीं।
  • राजीव पाठक की कलम से : जारी है चुटकियों का दौर, बुरा न मानो चुनाव है
    पिछले कुछ समय से दिल्ली के चुनावी दंगल के लिए प्रचार अपने चरम पर है। रोज़ अलग-अलग नेता भाषण दे रहे हैं, और बहुत गंभीर बातें की जा रही हैं। लेकिन सभी पार्टियों का एक बहुत बड़ा तबका है जो एक ख़ुफ़िया कैंपेन चलाता है।
  • क्या आप दिल्ली को लेकर टेंशन में हैं?
    चुनाव दिल्ली का, लेकिन दिल धड़क रहा है पूरे देश का। हर कोई पूछ रहा है कि दिल्ली में क्या होगा। कई लोग ठीक वैसे ही तनाव से गुज़रने लगे हैं जैसे विश्वकप के दौरान आखिरी के दस ओवरों के दौरान होता है। नाखून चबाने लगते हैं तो आंखें बंद कर अपने कुल देवताओं का जाप करने लगते हैं।
  • उमाशंकर सिंह की कलम से : हम भी हैं रेस में...
    तक़रीबन सारे राजनीतिक पंडित और पूरा मीडिया यह मान कर चल रहा है कि कांग्रेस इस चुनाव में कहीं नहीं है। मुक़ाबला सिर्फ बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच है। अनुमान यहां तक लगाया जा रहा है कि कांग्रेस को इस बार आठ सीट मिलनी भी मुश्किल होगी। उसकी सीटें घट सकती हैं।
  • रवीश कुमार की कलम से : दिल्ली के इन डूबे मकानों को कौन बचाएगा
    नाली-सीवर न डालने से बरसात का पानी जमा होता गया। साल-दर-साल खड़ंजा बिछाते रहे, और सड़क ऊंची होती चली गई। इतनी ऊंची कि हर घर की छत सड़क से नीचे चली गई। अब लोग स्टूल और बेंच लगाकर अपने घर से बाहर निकलते हैं।
  • शरद शर्मा की कलम से : कैसे की जाती है राजनीति, सीखने लगी है आम आदमी पार्टी
    पहले बहुत जल्दी में रहने वाली यह पार्टी अब राजनीति सीख रही है, इसलिए डेडलाइन और टकराव से बचते हुए पांच साल में दिल्ली बदलने की बात कर रही है।
  • मनोरंजन भारती की कलम से : दिल्ली के दंगल में नर्वस नजर आ रही है बीजेपी?
    बीजेपी की दिक्कत यह थी कि उनके पास केजरीवाल के मुकाबले चेहरा नहीं था और केजरीवाल दिल्ली के दंगल को केजरीवाल बनाम मोदी करना चाहते थे। ऐसे में बीजेपी ने सोचा कि लड़ाई के मोहरों को बदल दिया जाए।
  • अखिलेश शर्मा की कलम से : बीजेपी क्यों नहीं चाहती कांग्रेसमुक्त दिल्ली...?
    बीजेपी इसी उम्मीद में है कि कांग्रेस से छिटका उसका परम्परागत वोट इस बार उसके साथ चाहे कुछ संख्या में ही सही, लेकिन वापस आए, ताकि उन वोटों का आम आदमी पार्टी के पक्ष में ध्रुवीकरण रुक सके। वैसे आसार कम ही दिखते हैं कि बीजेपी की यह उम्मीद पूरी हो सके।
  • सर्वप्रिया की कलम से : केजरीवाल की 8 चालों ने दी भाजपा को शह
    बेदी जी आपकी शब्दावली में अगर कहा जाये तो राजनीति डिग्री से नहीं, 3 डीस (3Ds) से आदमी सीखता है। 'धक्के', 'धोखे' और 'दर बदर की ठोकरे'। लगता है आपके आंदोलन और धरना क्लासमेट अरविन्द केजरीवाल राजनीति के बारे में अब काफी कुछ सीख गए हैं।
  • सर्वप्रिया सांगवान की कलम से : क्या किरण को अपना पायेगी दिल्ली भाजपा?
    बीजेपी ने चुनाव से 20 दिन पहले किरण बेदी को मैदान में उतार कर अपना मज़बूत और आश्चर्यजनक दांव चल तो दिया है लेकिन क्या दिल्ली भाजपा के कार्यकर्ता पार्टी के फैसले से सहमत हैं? जो दिल्ली में हाल फिलहाल हो रहा है उससे कम से कम ये ज़ाहिर है कि कार्यकर्ताओं में अपनी नई उम्मीदवार को लेकर उत्साह नहीं है।
  • अनियमित कॉलोनियों पर सियासत
    आज दिल्ली के साठ लाख लोगों से जुड़े मुद्दे पर चर्चा होगी। तीनों पार्टी के नेताओं से विनम्र निवेदन हैं कि जो भी कहें आरोप या प्रत्यारोप या दावा सब इसी मुद्दे से संबंधित हों।
  • परिमल कुमार की नजर से : टक्कर में थे फिर भी टिकट कटे
    बीजेपी के बहुत सारे नेता इस बात से दुखी हैं कि कई ऐसे लोगों के टिकट काट दिए गए, जो बहुत कम वोटों से हारे, लेकिन दूसरी तरफ निगम चुनाव हारने वालों को भी टिकट दे दिया गया।
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