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चुनावी ब्लॉग

  • परिमल कुमार की कलम से : बीजेपी के पैराशूटर उम्मीदवार
    दिल्ली में बीजेपी की लिस्ट बहुत सारे ऐसे नामों से भरी है जो कल तक बीजेपी के ख़िलाफ़ थे। पार्टी के भीतर ऐसे बाहरी लोगों को लेकर गुस्सा है। प्रदर्शनों का दौर है कि खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। उम्मीदवार से लेकर विरोध उस चेहरे को लेकर भी है जिसके नेतृत्व में बीजेपी ने चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।
  • राजीव पाठक की कलम से : आखिर किरण बेदी क्यों बनीं नरेंद्र मोदी की पसंद...?
    दिल्ली में बीजेपी को सीटें भले ही ज़्यादा मिल रही हों, लेकिन मुख्यमंत्री पद की दौड़ में केजरीवाल सबसे आगे रहे हैं और यही वजह है कि मोदी और शाह को एक डर ज़रूर रहा होगा कि कहीं यह फैक्टर आखिरी समय में आम आदमी पार्टी को बीजेपी के मुकाबले लाकर खड़ा न कर दे।
  • उमाशंकर सिंह की कलम से : बहस की मांग पर माकन की तान
    माकन ने पहले दिल्ली की राजनीति में अपनी चुनावी उपलब्धियों को गिनाया। फिर इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का चेहरा बन मैदान में उतरे अजय माकन ने केजरीवाल के हथियार से ही केजरीवाल पर निशाना साध दिया।
  • आप के अरविंद बनाम बीजेपी की किरण
    क्या पता किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल के बीच किसी चैनल पर बहस हो भी जाए, लेकिन क्या हम सबको पता भी है कि हम इस बहस से क्या चाहते हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि बस इतना जांचना चाहते हों कि कौन कैसा बोलता है और अंत सब टीवी के एक मनोरंजक कार्यक्रम में बदलकर रह जाए।
  • बाबा की कलम से : केजरीवाल और किरण में कई समानताएं
    दिल्ली का दंगल अब दो लोगों के बीच के लड़ाई बनती जा रही है। जरा दोनों का बायोडाटा देखते हैं। इसमें कई समानताएं हैं। दोनों आईआईटी से पढ़े हैं। किरण बेदी आईआईटी दिल्ली से तो केजरीवाल आईआईटी खड़गपुर से।
  • शरद शर्मा की खरी खरी : केजरीवाल के पुराने दोस्त, खोलेंगे 'आप' की कौन सी पोल?
    इन दिनों दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के दिल्ली के सीएम कैंडिडेट अरविंद केजरीवाल के पुराने सहयोगी रहे लोगों का बीजेपी में शामिल होने का रेगुलर कार्यक्रम चल रहा है। एक के बाद एक जो पुराना केजरीवाल का सहयोगी बीजेपी में शामिल हो रहा है
  • गुजरात के 'कामयाब' चुनावी मॉडल को दिल्ली में लागू करने की अमित शाह की तैयारी
    दिल्ली चुनाव का नया बीजेपी पोस्टर इस बात की तस्दीक करता है कि अब किरन बेदी ही दिल्ली में बीजेपी का चेहरा हैं। सोमवार शाम को रोड शो करके वो रोहिणी से अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत करेंगी।
  • रवीश कुमार : तो 2039 तक हारेगी ही नहीं बीजेपी
    बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली में बूथ कार्यकर्ताओं से कहा है कि हमारा काम चुनाव जीतने के लिए एक ऐसा सिस्टम बनाना है, जिससे अगले 25 साल तक कोई और पार्टी नहीं बल्कि सिर्फ बीजेपी ही विजयी होनी चाहिए। दिल्ली इसका प्रयोग होगा। अगर हम यहां सफल रहें, तो यही तरीका बिहार में भी अपनाएंगे।
  • रवीश रंजन की आंखों देखी : किरण बेदी के नए बीजेपी दफ्तर की कहानी
    किरण बेदी के पोस्टर भले ही 19 जनवरी के बाद पूरी दिल्ली में लगने शुरू हो, लेकिन पंडित पंत मार्ग के बीजेपी दफ्तर के बाहर पहुंचते ही आपको यहां लगे पोस्टर में वह प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय के पीछे खड़ी मुस्कुरा रही है। लेकिन ये पोस्टर महज दिखावे के लिए हैं। असलियत में किरण बेदी का बढ़ा कद किसी से छिपा नहीं।
  • किरण बेदी की क्लास
    था तो स्वागत समारोह, लेकिन किरण बेदी ने इसे लेक्चर समारोह में बदल दिया। उनके भाषण से लगा कि वह सिर्फ मुखौटा बनने नहीं आईं हैं। उन्होंने बीजेपी के कार्यकर्ताओं को सामाजिक क्रांति लाने का कार्यक्रम भी दे दिया और कहा कि अब से बीजेपी का एक-एक कार्यकर्ता समाज सुधारक बनेगा।
  • रवीश कुमार की कलम से : लेक्चरर किरण बेदी को सुनो, वर्ना वह बाहर कर देंगी
    ऐसे तो कोई तभी बात करता है, जब वह मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुका हो या चुनाव में उम्मीदवार बनाया गया हो। हो सकता है कि बीजेपी अपनी सुविधा से किरण बेदी की उम्मीदवारी की घोषणा करे, लेकिन किरण बेदी ने अपनी तरफ से घोषणा तो कर ही दी है।
  • रवीश कुमार की कलम से : दिलचस्प हुआ दिल्ली का दंगल
    तो क्या बीजेपी अन्ना आंदोलन के पुराने साथियों और आप के पुराने नेताओं के दम पर अरविंद केजरीवाल को घेरने जा रही है। यह वो लड़ाई है जिसे कोई हाथ से जाने नहीं देगा। केरजीवाल बनाम किरण की इस लड़ाई में टेंशन तो होगा बॉस।
  • मनीष शर्मा की नज़र से : दिल्ली का दंगल हुआ केजरीवाल बनाम किरण बेदी
    हर सवाल के जवाब में आप हमेशा नहीं कह सकते कि 'मेरे पास तो मोदी है'। झारखण्ड, महाराष्ट्र, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर में बीजेपी को वोट मोदी की लोकप्रियता के साथ-साथ वहां की सरकार के खिलाफ लोगों की नाराज़गी के कारण भी मिले थे। पर दिल्ली का चुनाव इन सबसे अलग है।
  • रवीश कुमार की कलम से : किरण बेदी... क्या भाजपा में...?
    ये सब अटकलें हैं। चुनाव के समय ऐसा होता है। अटकलें लेखन-विश्लेषण का हिस्सा बन जाया करती हैं, पर नज़र लगाए रखिए। किरण बेदी अगर बीजेपी में आईं तो सिर्फ एक उम्मीदवार के तौर पर नहीं देखी जाएंगी।
  • निधि का नोट : क्या दिल्ली में मिल पाएगा किसी एक पार्टी को बहुमत...?
    जंतर-मंतर में कुछ लोगों से बात की... युवा तो सीधे अरविंद केजरीवाल के साथ खड़े नज़र आए, लेकिन नौकरीपेशा तबका बीजेपी का और उम्रदराज लोग कांग्रेस का नाम लेना नहीं भूले... तो क्या किसी एक पार्टी को मिल पाएगा बहुमत...?
  • उमाशंकर सिंह की समीक्षा : मेहबूबा ने मोदी को वाजपेयी बनने की दी चुनौती!
    गवर्नर से मिलने के बाद पीडीपी नेता मेहबूबा मुफ़्ती ने मीडिया के ज़रिए बीजेपी पर दबाव बनाने की सीधी कोशिश की। उन्होंने तो बीजेपी के साथ सरकार बनाने की संभावना से इनकार किया और न ही बीजेपी के साथ जाने की कोई बात ही की। उल्टा 55 विधायकों के साथ की बात कर ऐसा तीर छोड़ा जो कई दिशाओं में एक साथ जाता प्रतीत होता है।
  • राजीव रंजन की कलम से : कैसे बीजेपी बन गई कश्मीर का 'बाजीगर'
    पहली बार कश्मीर घाटी में बीजेपी को ढाई फीसदी के करीब वोट मिले। पहली बार उसके 33 उम्मीदवार घाटी में चुनावी मैदान में थे। पिछले चुनाव में बीजेपी को महज पूरे कश्मीर में सिर्फ 14 हजार ही वोट मिले थे जबकि इस बार ये बढ़कर 48 हजार तक पहुंच चुका है।
  • झारखंड की नई सरकार से माइनिंग से जुड़ी कंपनियों को भी हैं कई उम्मीदें
    इस देश की कुछ बड़ी कम्पनियां जैसे एक दूसरे की कट्टर प्रतिद्वंद्वी टाटा स्टील और स्टील अथोरेटी ऑफ इंडिया या यूरेनियम उत्पादन में लगे यूरेनियम कार्पोरेशन ऑफ इंडिया कम से कम झारखंड में साफ-सुथरी सरकार चाहती है।
  • मनीष कुमार की कलम से : झारखंड की नई सरकार रोक पाएगी भ्रष्टाचार?
    झारखंड में नई सरकार का गठन अगले कुछ दिनों में हो जाएगा। चुनावी रुझान से साफ़ है कि इस बार जनता ने बहुमत की सरकार बनाने का प्रयास किया है। यह प्रयास कितना सार्थक हो पाएगा वो तो परिणाम से पता चल पाएगा। लेकिन, लोगो में सबसे ज्यादा इस बात को लेकर जिज्ञासा है कि अगली सरकार का भ्रष्टाचार के मुद्दे पर क्या रुख होगा।
  • मनीष कुमार की कलम से : कौन बनेगा झारखंड का मुख्यमंत्री?
    सब नामों की चर्चा तो करते हैं, लेकिन असल जवाब, जिसमें एक प्रश्न भी छिपा होता है वह यह कि इस सवाल का जवाब केवल दो व्यक्तियों के पास है। वे हैं - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह।
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