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चुनावी ब्लॉग

  • राजीव रंजन की कलम से : राजनीतिक दल नहीं, जम्मू-कश्मीर में जीता लोकतंत्र
    आतंकवाद के 26 सालों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि जब अलगाववादियों के बॉयकाट के आह्वान की जम्मू-कश्मीर के मतदाताओं ने न केवल अवहेलना की है, बल्कि वे आतंकी धमकियों के आगे भी नहीं झुके।
  • मनीष कुमार की कलम से : क्या होगा झारखंड में?
    जानकारों का कहना है कि प्रचार और मतदान के दौरान जैसे रुझान रहे हैं, उससे स्पष्ट हैं कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होगी और अपनी सहयोगी एजेएसयू के साथ अगली सरकार बनाएगी। शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा बीजेपी के बाद दूसरी बड़ी पार्टी बनेगी।
  • मनीष कुमार की कलम से : लोकसभा चुनाव के सदमे से कब उबरेगी कांग्रेस?
    लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर पार्टी लोकसभा चुनाव के नतीजों के सदमे से कब उबरेगी, और कब अपने कार्यकर्ताओं-नेताओं के साथ एक सशक्त विकल्प की भूमिका निभाएगी, या वह झारखंड विधानसभा चुनाव की तरह ही कुछ और राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी हाथ पर हाथ धरे बैठी रहेगी।
  • राजीव रंजन की कलम से : अब तो भाजपा नेता से प्रधानमंत्री बन जाइए मोदी जी
    खास बात यह है कि पीएम ने यह बात चुनावी भाषण के दौरान कही... किसी बंद कमरे या किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं... यह शायद पहला मौका था, जब किसी प्रधानमंत्री ने फौज को कश्मीर की चुनावी राजनीति में घसीटा हो।
  • झारखंड में तीसरे चरण का मतदान कल : बीजेपी-जेएमएम के बीच छिड़ा पोस्टर युद्ध
    विज्ञापनों की इस लड़ाई में एक बात स्पष्ट है कि जिस बीजेपी को कांग्रेस से चुनौती मिलनी चाहिए थी, उसे क्षेत्रीय दल से टक्कर मिल रही है। अब चुनाव में जीत-हार किसी की भी हो, लेकिन बीजेपी को भी मालूम है कि उनके विरोधी अब उन्हीं के चुनाव लड़ने के तरीकों से सीखकर उन्हीं पर हमले कर रहे हैं।
  • नीता शर्मा की ग्राउंट रिपोर्ट : स्थायी सरकार चाहते हैं कश्मीर के लोग
    श्रीनगर में जब बाढ़ आई थी, तब लाल चौक के इलाके में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। बेशक यह इलाका शहर के बीच में बसा है, लेकिन मदद इन लोगों तक बहुत देर से पहुंची थी। बाढ़ के दो महीने बाद भी यहां हालात ज्यादा नहीं बदले हैं।
  • ग्राउंड रिपोर्ट : जम्मू-कश्मीर चुनाव में किसे मिलेगा कश्मीरी पंडितों का साथ?
    घाटी में सैलाब के असर से उबरते लोगों के सामने अब चुनाव हैं, लेकिन उनके मुताबिक चुनने को कुछ नहीं। घाटी के कश्मीरी पंडितों को बीजेपी अपने साथ मान रही है, लेकिन हकीकत यह है कि वे भी बंटे हुए हैं।
  • नीता शर्मा की नज़र से : बीजेपी के लिए आसान नहीं है कश्मीरी पंडितों का भरोसा जीतना...
    बेशक बीजेपी कश्मीरी पंडितों के भरोसे राज्य की सत्ता तक पहुंचने की उम्मीद कर रही हो, और दावा कर रही हो कि वह 62,000 विस्थापित कश्मीरी पंडितों को बसा देगी, लेकिन हकीकत यह है कि कश्मीरी पंडित बीजेपी से खफा हैं।
  • नीता शर्मा की नजर से : कश्मीरी पंडितों पर बीजेपी की निगाह
    जम्मू−कश्मीर के चुनावों में सबकी नज़र कश्मीरी पंडितों पर है। क्या वे चुनावी समीकरण बदल डालेंगे, हकीकत यह है कि कश्मीर घाटी में लौटे पंडित वहां अपने−आप को अजनबी महसूस करते हैं तो बाहर असुरक्षित।
  • निधि कुलपति की नज़र से कश्मीर : कड़वे हैं ये चुनाव...
    जम्मू कश्मीर में लोगों के लिए सैलाब के बाद ज़िंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। वादा किया गया राशन नहीं मिल रहा़, बढ़ती ठंड और मुश्किल से मिलते सिलेंडर और उस पर मिलते बिजली के बिल हैरान परेशान कर देने वाले हैं।
  • नीता शर्मा की नजर से : जम्मू-कश्मीर में उलटफेर कर पाएगी बीजेपी?
    इस बार जम्मू−कश्मीर के चुनावों में क्या बीजेपी वाकई उलटफेर कर पाएगी। अब वह अपने मिशन 44 के आगे जाकर 50 सीटें लाने की बात कर रही है। उसे उम्मीद है कि इस बार उसे घाटी में भी समर्थन मिलेगा।
  • राजीव रंजन की कलम से : धारा 370 रोक सकती है मोदी का विजयी रथ
    कश्मीर के विधानसभा चुनावों में अनुच्छेद 370 को हटाने का मुद्दा भाजपा के गले की फांस बन गया है। हालत यह है कि इस मुद्दे को घोषणापत्र में शामिल करने और अनुच्छेद 370 से किसी भी तरह की छेड़छाड़ को लेकर भाजपा के कश्मीर से मैदान में उतरने वाले उम्मीदवार ही विरोध में उठ खड़े हुए हैं।
  • उमाशंकर सिंह की कलम से : कश्मीरी नेता सज्जाद लोन की पीएम मोदी से मुलाकात के मायने
    कश्मीर की सर्द हवाओं को मोदी-लोन की मुलाक़ात ने गर्म कर दिया है। जैसा कि लोन ख़ुद बताते हैं वे पहले भी दिल्ली आकर नेताओं से मिलते रहे हैं, लेकिन तब इतनी बड़ी ख़बर नहीं बनती थी। इस बार बन रही है तो इसके कई मायने हैं।
  • उमाशंकर की कलम से : बीजेपी का मिशन कश्मीर
    बीजेपी लोकसभा में 272+ की तर्ज पर जम्मू और कश्मीर विधानसभा में 44+ का लक्ष्य लेकर चल रही है तो क्यों और कैसे इसे थोड़ा बीजेपी के नज़रिए से देखना होगा।
  • अखिलेश शर्मा की कलम से : अमित शाह की अगुवाई में नई और 'तेज़ रफ्तार' बीजेपी
    सरल भाषा में कहें तो बीजेपी चाहती है कि राज्यसभा में उसे खुद बहुमत मिले, ताकि अगले लोकसभा चुनाव से पहले अपने हिसाब से संसद में कानून बनवा सके। इसके लिए राज्यों की लड़ाइयां जीतना जरूरी है, और अमित शाह इसी दिशा में काम कर रहे हैं।
  • बाबा की कलम से : महाराष्ट्र में बवाल
    महाराष्ट्र में जो कुछ हुआ है वह भारतीय राजनीति में अवसरवादिता की पराकाष्ठा है, जहां सभी इस उम्मीद में जीते हैं कि अब उनका ही नंबर आने वाला है। बीजेपी को लगा कि इससे सुनहरा अवसर और कब मिलेगा, जब पार्टी के कार्यकर्ता आत्मविश्वास से लबालब हैं।
  • बाबा की कलम से : सबका अपना-सपना, महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनना!
    महाराष्ट्र में महादंगल चल रहा है। कांग्रेस-एनसीपी, बीजेपी-शिवसेना सभी ऐसे लड़ रहे हैं मानो अजनबी हों। जबकि बीजेपी−शिवसेना गठबंधन 25 सालों से साथ हैं और कांग्रेस−एनसीपी 15 सालों से साथ सरकार चला रही है। मगर बात बन नहीं रही है।
  • चुनाव डायरी : कैसी होगी नरेंद्र मोदी सरकार?
    अगर जनमत सर्वेक्षणों के रुझान परिणाम में बदलते हैं तो नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए सरकार बन सकती है। सवाल ये है कि किस तरह की होगी ये सरकार और मोदी के मंत्रिमंडल में कौन-कौन शामिल हो सकता है और किसे कौन सा मंत्रिमंडल मिल सकता है?
  • चुनाव डायरी : चुनाव प्रक्रिया पर उठते सवाल
    बनारस के अर्दली बाज़ार के मतदान केंद्र पर ऊषा जी से मुलाक़ात हो गई। हाथ में मतदाता पहचान पत्र लिए मत देने के लिए भटक रही थीं। ऊषा वोट नहीं डाल पाईं क्योंकि उनका नाम मतदाता सूची में विलोपित श्रेणी में रख दिया गया। फ़ार्म 7 के ज़रिये घोषणा कर वोट डलवाया जा सकता था, मगर उन्हें वो फ़ार्म भी नहीं मिल सका।
  • चुनाव डायरी : 'कमल निशान और नंबर तीन'
    दरअसल, बनारस चुनाव में ईवीएम पर नरेंद्र मोदी का नाम तीसरे नंबर पर है। इसीलिए बीजेपी मतदाताओं को उनके नाम, ईवीएम पर क्रम और चुनाव चिन्ह के बारे में बता रही है। पर्चे के आखिर में क्रम संख्या 3 के साथ मोदी का नाम और कमल निशान के साथ फोटो दिया गया है, ताकि वोटरों को पहचानने में आसानी हो।
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