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चुनावी ब्लॉग

  • चुनाव डायरी : पलटवार के लिए ज़रूरी है भाषा की धार...
    मां ने, जो अपने बेटे को प्रधानमंत्री देखना चाहती है, भी काफी मेहनत की होगी कि राहुल राजनीतिक भाषा की गहराई को पकड़ें, ताकि वह न सिर्फ अपने, अपनी पार्टी और सरकार पर लगने वाले आरोपों का सटीक भाषा में जवाब दे सकें, बल्कि अपने बयानों से विरोधी दलों पर धारदार हमला भी बोल सकें।
  • चुनाव डायरी : 'नीच राजनीति' पर मोदी का पलटवार
    'नीच राजनीति' करने के प्रियंका गांधी के आरोप का नरेंद्र मोदी ने अपने ही अंदाज़ में जवाब दिया है। मोदी ने इसे अपनी पिछड़ी जाति की पृष्ठभूमि से जोड़ दिया है। मंगलवार सुबह उन्होंने एक के बाद एक इस मुद्दे पर चार ट्वीट किए।
  • चुनाव डायरी : दादा, दीदी या मोदी?
    वैसे तो बंगाल में चार पार्टियों में मुकाबला है। तृणमूल और लेफ्ट परंपरागत विरोधी हैं। कांग्रेस और बीजेपी भी अपनी ओर से दम मारते रहे हैं। लेकिन मोदी के अभियान और बीजेपी पर तृणमूल के लगातार हमलों से ऐसा आभास दिया जा रहा है कि जैसे मुकाबला बीजेपी और तृणमूल के बीच ही हो रहा है। जबकि हकीकत में ऐसा नहीं है।
  • चुनाव डायरी : मोदी पर एफआईआर के मायने
    चुनाव आयोग ने कहा है कि मोदी ने जनप्रतिनिधित्व कानून की दो धाराओं 126 (1)(a) और 126 (1) (b) के उल्लंघन किया है।
  • कितने करोड़ का है बीजेपी का अभियान?
    कांग्रेस आरोप लगा रही है कि बीजेपी ने प्रचार पर पानी की तरह पैसा बहाया है। कांग्रेस के मुताबिक, बीजेपी ने चुनाव अभियान पर दस हज़ार करोड़ रुपये से भी ज़्यादा खर्च किया है, लेकिन क्या वाकई ऐसा है?
  • चुनाव डायरी : प्रियंका पर क्यों बरस रही है बीजेपी
    चुनाव के ऐलान के साथ ही कांग्रेस पार्टी और खुद राहुल गांधी की तरफ से यह साफ कर दिया गया था कि प्रियंका गांधी न तो चुनाव लड़ने जा रही हैं और न ही देशभर में घूमकर प्रचार करने।
  • चुनाव डायरी : कांग्रेस को मिला प्रियंका का सहारा
    मीडिया की सुर्खियों में सोनिया गांधी-राहुल गांधी पीछे चले गए हैं, जबकि प्रियंका नरेंद्र मोदी से दो-दो हाथ करती दिख रही हैं।
  • चुनाव डायरी : बासी कढ़ी में आया उबाल
    सोनिया, राहुल और मनमोहन यूपीए की सरकार फिर बनने का दावा कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस के भीतर से आवाज़ें उठना शुरू हो गई हैं कि लेफ्ट फ्रंट को साथ लेकर सरकार बनाई जानी चाहिए। इसी के साथ तीसरे मोर्चे, वैकल्पिक मोर्चे या 'सेक्यूलर' सरकार बनाने के लिए खिचड़ी पकाने की सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
  • चुनाव डायरी : दिल्ली वाया पूर्वांचल
    जिस पूर्वांचल में बनारस, गोरखपुर, बांसगांव और आज़मगढ़ को छोड़ बीजेपी बाकी 29 सीटों में सब दूर साफ है, वहां मोदी के प्रति इस तरह का उत्साह यहां बदली हवा का एहसास करा रहा है।
  • चुनाव डायरी : 'वोट से ज्यादा जरूरी है पेट'
    बात लालू की चली तो एक ने कहा, लालू जो किए भुगत लिए और भुगत रहे हैं। ये तो जातिवाद है, जिसके चलते वे वापस आने की गुंजाइश में हैं। ऐसा गढ्ढा खोदे थे कि दलदल बन गया था।
  • चुनाव डायरी : तीन 'देवियों' से नरेंद्र मोदी की टक्कर
    राजनीति की तीन 'देवियों' के नाम से मशहूर इन तीनों ही कद्दावर महिला नेताओं ने मोदी पर निशाना साधकर इन अटकलों को विराम देने की कोशिश की है कि चुनाव के बाद वे बीजेपी के साथ जा सकती हैं, लेकिन क्या वाकई ऐसा है?
  • चुनाव डायरी : बदहाल है हिन्दुस्तान का 'पाकिस्तान'
    यह नाम आपको जरूर चौंकाएगा, लेकिन बिहार के पूर्णियां जिले में एक गांव का नाम है पाकिस्तान टोला। सबसे दिलचस्प बात है कि नाम बेशक पाकिस्तान हो, लेकिन यहां एक भी मुसलमान नहीं रहता है। यह संथाल आदिवासियों की बस्ती है। यहां करीब दो दर्जन घर हैं।
  • चुनाव डायरी : राज (नाथ) की टोपी, मोदी का राज (तिलक)?
    देश की राजनीति का जैसा स्वरूप हो गया है, उसमें टोपी, तिलक, पगड़ी या हैट सब पहनने या न पहनने के अपने सांकेतिक महत्व बनाए जा रहे हैं। इफ्तार की राजनीति से चला यह प्रचलन धीरे-धीरे तुष्टिकरण के प्रतीकों में शामिल होता जा रहा है।
  • चुनाव डायरी : गुरु की नगरी में कांटे की टक्कर
    बीजेपी के शीर्ष नेताओं में से एक और पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के बेहद करीबी अरुण जेटली अमृतसर में अपने पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से कांटे की टक्कर में उलझे हुए हैं।
  • चुनाव डायरी : 'कम बोला, काम बोला', पर ये कौन बोला?
    प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रह चुके संजय बारू की किताब 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' ने इन दिनों तहलका मचा रखा है। यह पुस्तक एक तरह से बीजेपी के उन आरोपों की पुष्टि करती है कि मनमोहन सिंह बेहद कमज़ोर प्रधानमंत्री थे और सत्ता का संचालन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हाथों में था।
  • चुनाव डायरी : पटरी से उतरता कांग्रेस का अभियान?
    आखिर क्या वजह है कि हर चुनावी सभा में सूचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और भोजन का अधिकार देने की बात करने वाले राहुल के भाषणों का ज्यादातर हिस्सा अब मोदी पर हमलों में केंद्रित होने लगा है।
  • चुनाव डायरी : नरेंद्र मोदी पर राहुल गांधी के हमले के मायने
    विडंबना यह है कि जब-जब मोदी की सांप्रदायिक छवि को लेकर सवाल उठाए गए, गुजरात में उन्होंने इसका फायदा उठाया। अब सवाल यह है कि राहुल के ताज़ा हमलों के बाद क्या होगा? मोदी इसका किस तरह से जवाब देते हैं और असली मुद्दों से भटके इस चुनाव में क्या प्रचार फिर पटरी पर वापस आ पाएगा?
  • चुनाव डायरी : क्या दिल्ली में चल पाएगा मोदी का जादू?
    दिल्ली में 10 अप्रैल को मतदान है। वैसे तो यहां लोक सभा की सिर्फ सात सीटें हैं। मगर पिछले साल दिसंबर में आए यहां के विधानसभा चुनाव के नतीजों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। पंद्रह साल से सत्ता में काबिज कांग्रेस का पूरी तरह से सफाया हो गया।
  • चुनाव डायरी : नरेंद्र मोदी का एजेंडा आया सामने
    आखिरकार बीजेपी का घोषणापत्र जारी हो ही गया। तमाम बड़े नेताओं के एक साथ दिल्ली में न जुट पाने के कारण इस घोषणापत्र को जारी करने में देरी हो रही थी। हालांकि ऐसी भी अटकलें लगाई गईं कि मुरली मनोहर जोशी द्वारा तैयार किए गए घोषणापत्र से पार्टी खुश नहीं थी और इसलिए उसमें कुछ परिवर्तन किए गए।
  • चुनाव डायरी : पीछे छूटता विकास का मुद्दा
    क्या बीजेपी को लगने लगा है कि मुजफ्फरनगर जैसे दसियों दंगों से प्रभावित उत्तर प्रदेश में बिना हिंदुत्व का कार्ड खेले उसे वह चुनावी कामयाबी नहीं मिल सकती, जिसके जरिये वह लखनऊ से दिल्ली का रास्ता तय करना चाहती है...
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