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चुनावी ब्लॉग

  • चुनाव डायरी : मौका देखकर रंग बदलते नेता
    चुनावी मौसम में नेताओं के असली रंग दिखते हैं। ये मेंढक की तरह एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कूदते हैं, विचारधाराएं पीछे छूट जाती हैं, कुर्सी का मोह सर्वोपरि हो जाता है। वैसे तो ये प्रवृत्तियां हमेशा ही रहती हैं, मगर चुनाव के मौसम में खुलकर सामने आती हैं।
  • चुनाव डायरी : मेहंदी, चम्मच-थाली और टीवी - बीजेपी के नए हथियार
    6 अप्रैल को बीजेपी का स्थापना दिवस है। इसी दिन 1980 में बीजेपी का गठन हुआ था। इस बार ये स्थापना दिवस लोकसभा चुनाव के लिए मतदान शुरू होने से ठीक एक दिन पहले आया है। बीजेपी ने इस दिन का इस्तेमाल मतदाताओं के बीच बिताने और उन्हें पार्टी के लिए मतदान करने की अपील करने के लिए तय किया है।
  • चुनाव डायरी : प्रचार के लिए जरूरी बनता हेलीकॉप्टर
    चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं के लिए हेलीकॉप्टर बेहद जरूरी है। एक जगह से दूसरी जगह तुरंत पहुंचने के लिए इनका इस्तेमाल होता है। हेलीकॉप्टर की वजह से ही स्टार प्रचारक एक दिन में छह से आठ तक चुनावी सभाएं कर सकते हैं।
  • यह लोकसभा चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है। कांग्रेस की कमान राहुल गांधी संभाल रहे हैं तो भारतीय जनता पार्टी की नरेंद्र मोदी। इसके अलावा, बहुत कम समय में अरविंद केजरीवाल ने खुद को साबित किया है। उन्होंने एक ऐसा नया महल खड़ा किया है कि लोग आम आदमी पार्टी को एक विकल्प के रूप में देखने लगे।
  • चुनाव डायरी : क्या भाजपा ने सचमुच राहुल-सोनिया को चुनौती दी है...?
    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने राहुल-सोनिया के खिलाफ भारी-भरकम उम्मीदवार नहीं उतारे हैं... शायद इस उम्मीद में कि कांग्रेस भी बनारस में ऐसा ही करे... लेकिन राजनीति वह क्षेत्र है, जहां न स्थापित धारणाएं काम करती हैं, न ही प्रचलित सिद्धांत...
  • चुनाव डायरी : सबसे बड़ा रुपैया!
    सोनिया गांधी ने कहा कि कांग्रेस ने गंगा-जमुनी तहज़ीब को मजबूत किया है जबकि बीजेपी नफरत की राजनीति कर देश को कमजोर कर रही है। वहीं, नरेंद्र मोदी यूपीए सरकार की नाकामियों का जिक्र कर विकास को बड़ा मुद्दा बनाना चाह रहे हैं।
  • चुनाव डायरी : अपनों से ही जूझता बीजेपी नेतृत्व
    बीजेपी में इस वक्त 'फ्री फॉर ऑल' क्यों है? ऐसा क्यों लग रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व कमजोर पड़ रहा है? क्यों पार्टी के नेता आगे निकलने के चक्कर में एक-दूसरे के पैरों पर अपने पैर रख रहे हैं? अगर सरकार बनने से पहले ही आपसी लड़ाई का ये हाल है, तो सरकार बनने पर क्या होगा?
  • चुनाव डायरी : बीजेपी में नरेंद्र मोदी या फिर कोई नहीं
    बीजेपी के बारे में कहा जा रहा है कि उसमें दो धड़े हैं। एक '170 ग्रुप' जो चाहता है, पार्टी की सीटें 170 के ऊपर न जाएं, ताकि मोदी की जगह कोई और पीएम बन सके। दूसरा '270 ग्रुप', जो मोदी को प्रधानमंत्री बनाना चाहता है। जाहिर है ये काल्पनिक प्रश्न हैं, लेकिन राजनीति में कुछ भी हो सकता है।
  • चुनाव डायरी : अरविंद केजरीवाल पर क्यों बरसे नरेंद्र मोदी...?
    बनारस में केजरीवाल से मुकाबला कर रहे मोदी अपने विरोधी को अब हल्के में नहीं ले रहे, यह बात कम से कम उनके कल के हमलों से साफ हो जाती है... लेकिन देखना होगा कि अगर कांग्रेस बनारस में उनके खिलाफ कोई मजबूत उम्मीदवार उतारती है, तो क्या तब भी मोदी केजरीवाल पर ही हमला करते रहेंगे...?
  • चुनाव डायरी : जसवंत का मोदीत्व और नमो-नमो
    जसवंत का बीजेपी नेताओं पर हमला जारी है। वह पार्टी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर हमला करने में भी पीछे नहीं रहे हैं। बीजेपी में चल रहे नमो-नमो के जाप को उन्होंने आपातकाल की मानसिकता से जोड़ा है। लेकिन ठीक एक महीने पूर्व मोदी पर जारी किताब में जसवंत ने उनकी भरपूर तारीफ की है।
  • चुनाव डायरी : 'धुंधले' पड़ जाते हैं 'तारे ज़मीं पर'...
    सितारे प्रवासी पक्षियों जैसे होते हैं, जो पांच साल में एक बार नजर आते हैं... जोश में लोग इन्हें वोट तो दे देते हैं और फिर पछताते हैं... इसीलिए राजनीतिक विश्लेषक पिछले अनुभवों को ध्यान में रखकर कहते हैं कि जनता के लिए फिल्मी सितारों को चुनने से बेहतर होगा कि वो खांटी नेताओं को चुनें...
  • चुनाव डायरी : अग्निपरीक्षा 'नरेंद्र मोदी के लेफ्टिनेंट' अमित शाह की...
    नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनने का सपना तभी पूरा होगा, जब पार्टी को यूपी में कामयाबी मिले... इसीलिए उन्होंने अपने करीबी अमित शाह को यह जिम्मेदारी दी... सो, अगर यहां कामयाबी मिली, तो शाह पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी संभालने के लिए अपनी जगह पक्की कर लेंगे...
  • चुनाव डायरी : 'असली बीजेपी, नकली बीजेपी'
    बीजेपी में कुछ लोग सवाल पूछ रहे हैं कि अगर जसवंत सिंह को बाड़मेर से टिकट मिल जाता, तो भी वह असली-नकली बीजेपी की बात करते। शिमला चिंतन बैठक के समय जब उन्हें बीजेपी से निकाला गया और जब आडवाणी के कहने पर उनकी वापसी हुई, तब वह असली बीजेपी थी या फिर नकली?
  • चुनाव डायरी : कहां गए भाजपा के 'हनुमान'?
    जसवंत सिंह और हरिन पाठक दोनों में एक समानता है। दोनों हनुमान कहे जाते हैं। जसवंत सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी के हनुमान तो हरिन पाठक लालकृष्ण आडवाणी के हनुमान। एनडीए की छह साल की सरकार में हर संकट में वाजपेयी को जसवंत सिंह याद आते थे।
  • चुनाव डायरी : बीजेपी के 'सागर' में बनता 'टापू'
    गुजरात और मध्य प्रदेश की मिलती सीमाएं, विदिशा-भोपाल की नजदीकियां और आडवाणी-सुषमा की करीबियां... यहीं पर खड़े मिलते हैं सुषमा-आडवाणी के करीबी कर्नाटक के अनंत कुमार, जो मध्य प्रदेश के स्थायी प्रभारी कहे जाते हैं और इन सबके बीच हैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान।
  • चुनाव डायरी : आडवाणी का 'अथक रथी' से 'अथक हठी' तक का सफर...
    लालकृष्ण आडवाणी से मिलने वाले तमाम नेता उनसे एक ही गुज़ारिश कर रहे हैं कि लोकसभा चुनाव 2014 में वह गांधीनगर से ही लड़ें और इस बारे में पार्टी का फैसला मान लें, लेकिन आडवाणी अब इसके लिए तैयार नहीं हो रहे हैं...
  • चुनाव डायरी : यूपी में 'डगमगाई' भाजपा की नैया
    भाजपा के लिए अब भी यूपी में उम्मीद की एक ही किरण बची है, कि आरएसएस कार्यकर्ता हर बूथ संभालें और भाजपा और मोदी के पक्ष में वोटरों को बूथ तक लाएं... लेकिन इतना तय है कि उम्मीदवारों के चयन में देरी और गलतियों ने भाजपा को करारा झटका दिया है...
  • चुनाव डायरी : कभी गरम, कभी नरम शरद पवार...
    हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान शरद पवार ने एनडीटीवी से कहा कि वर्ष 2002 के दंगों के लिए नरेंद्र मोदी को ज़िम्मेदार नहीं माना जा सकता... जब अदालत ने कुछ कहा है तो हमें स्वीकार करना चाहिए...
  • चुनावी डायरी : 'कम बोला, काम बोला', क्या वाकई?
    यह शायद पहली बार है जब चुनाव होने से पहले ही सत्तारूढ़ दल हथियार डालता दिख रहा है। चुनाव के परिणामों की प्रतीक्षा किए बगैर ही संभावित हार के लिए बलि का बकरा भी ढूंढ़ा जाने लगा है। प्रधानमंत्री पर धीरे-धीरे शुरू हुए इन हमलों के पीछे यही वजह मानी जा सकती है।
  • चुनाव डायरी : यूपी की बिसात पर बीजेपी का बड़ा दांव
    दिलचस्प बात यह है कि मीडिया में चाहे इसे लेकर सस्पेंस बना रहा हो, लेकिन खुद नरेंद्र मोदी यह फैसला पिछले साल जुलाई में ही कर चुके थे। पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं को यह जानकारी दे दी गई थी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेतृत्व से भी विचार-विमर्श कर लिया गया था।
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