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पुणे यूनिवर्सिटी ने शाकाहारी होने और नशा न करने पर गोल्ड मेडल मिलने वाला सर्कुलर वापस लिया

पुणे के सावित्रि बाई फुले विश्वविद्यालय के शाकाहारी वाले सर्कुलर पर बवाल मचने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उस सर्कुलर को वापिस ले लिया है.

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पुणे यूनिवर्सिटी ने शाकाहारी होने और नशा न करने पर गोल्ड मेडल मिलने वाला सर्कुलर वापस लिया

पुणे यूनिवर्सिटी (फाइल फोटो)

पुणे: पुणे के सावित्रि बाई फुले विश्वविद्यालय के शाकाहारी वाले सर्कुलर पर बवाल मचने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उस सर्कुलर को वापिस ले लिया है, जिसमें विश्वविद्यालय ने कहा था कि किसी भी छात्र को गोल्ड मेडल पाने के लिए जरूरी है कि वो कोई भी नसान करे और वो पूर्ण रूप से शाकाहारी हो. इस सर्कुलर पर शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया मिली थी. 

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार अरविंद शालीग्राम ने कहा कि हमने दस साल पुराने सर्कुलर पर आपत्ति दर्ज की जाने के बाद, उसे वापस ले लिया है. अब हम इस विशेष शर्त को खत्म करने के लिए शेलार परिवार को चिट्ठी लिखेंगे. बता दें कि उन्होंने कल कहा था कि ये सर्कुलर 2006 से जारी होता है. चूंकि ये मेडल शेलार परिवार की ओर से दिया जाता है, इसलिए उनकी अपनी शर्तें होती हैं.

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उन्होंने आगे कहा कि शेलार परिवार को छोड़कर किसी डोनर की इस तरह की शर्त नहीं है. अगर शेलार परिवार इस अनुरोध को नहीं मानती है तो यूनिवर्सिटी को शेलार परिवार के चंदे से से गठित गोल्ड मेडल निर्धारित करने वाली समिति को रद्द करने पर मजबूर होना पड़ेगा. उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास अन्य भी गोल्ड मेडल हैं, जिन्हें स्टूडेंट्स को दिये जा सकता हैं और उनमें ऐसी कोई शर्त भी नहीं है. 

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ये सर्कुलर 2006 का है. इस सर्कुलर के अनुसार, विज्ञान संकाय में यूनिवर्सिटी के दो टॉपर स्टूडेंट्स को शेलार परिवार की ओर से गोल्ड मेडल दिया जाता है, जिसकी राशि 1 लाख 20 हजार रुपये होती है. इसकी शर्त होती है कि टॉपर स्टूडेंट शाकाहारी हो और किसी तरह का नशा न करता हो. 

बता दें कि सर्कुलर के अनुसार 10 ऐसी शर्तें तय की गई हैं, जो महर्षि कीर्तंकर शेलार मामा गोल्‍ड मेडल के लिए पात्रता तय करते हैं. इनमें से सातवीं शर्त है छात्र को किसी भी तरह का नशा नहीं करना चाहिए और उसे शाकाहारी होना चाहिए.

इससे पहले विश्वविद्यालय ने अपने इस कदम का बचाव करते हुए कहा  था कि यह शर्त मेडल के प्रायोजकों द्वारा रखी गई है. एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि चूंकि सभी पुरस्‍कार बाहरी लोगों द्वारा स्‍पॉन्‍सर किए जाते हैं, तो हम उनके ही नियम व शर्तों का पालन करते हैं.

सर्कुलर पर शिवसेना और एनसीपी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की थी. शिवसेना के युवा सेना अध्यक्ष आदित्य ठाकरे ने विश्वविद्यालय की निंदा की. ठाकरे ने कहा कि कोई क्या खाए क्या ना खाए ये उसका अपना फैसला होना चाहिए. यूनिवर्सिटी को केवल पढ़ाई पर ध्‍यान देना चाहिए.

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