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पुणे में संघ का सबसे बड़ा सम्‍मेलन, पठानकोट हमले पर रही चुप्‍पी

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पुणे में संघ का सबसे बड़ा सम्‍मेलन, पठानकोट हमले पर रही चुप्‍पी

संघ प्रमुख मोहन भागवत की फाइल फोटो

पुणे: डेढ़ लाख से ज्यादा स्वयंसेवक, हाज़िरी लगाते केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस और उनके कैबिनेट सहयोगी, लेकिन देश की सुरक्षा पर अक्सर हुंकारने वाले आरएसएस ने अपने सबसे बड़े जलसे में पठानकोट हमले पर कुछ नहीं कहा।

पुणे के मारुंजी में हुए इस कार्यक्रम को आरएसएस का अबतक का सबसे बड़ा आयोजन बताया गया। इस मौके पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा, 'हिन्दुत्तव का मतलब है सबको साथ लेकर चलना। राष्ट्रीयता को कायम रखने के लिए सरसंघचालक ने इस्राइल का भी जिक्र किया, बापू और बाबासाहेब को भी उद्धृत किया।

नेताओं की भारीभरकम फौज के बावजूद कहा कि आयोजन का मकसद सियासी नहीं है, आरएसएस नेता डॉ. श्रीरंग गोडबोले ने कहा, 'यहां संदेश सियासी नहीं है, हम समाज में एकजुटता चाहते हैं जिसका सियासी प्रतिफल हो सकता है।' वैसे इंदौर में आरएसएस के संयुक्त सचिव दत्तात्रेय होसबोले लगातार हमलों के बावजूद पाकिस्तान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों को जरूरी बता चुके हैं, और सदी के शायद सबसे बड़े कार्यकर्ता समागम में संघ प्रमुख की पठानकोट हमलों पर चुप्पी बताती है कि दल बदलने के साथ पड़ोसियों के प्रति उसके नजरिये में भी बदलाव हो जाता है।


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