राजस्थान: सरकारी दस्तावेजों से हटाई जाएगी दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर, 2017 में लगाने का दिया गया था आदेश

वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने दिसंबर 2017 में सर्कूलर जारी करके सभी विभागों को आदेश दिए थे कि उनके लेटर पैड पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर का लोगो के रूप में इस्तेमाल करें.

राजस्थान: सरकारी दस्तावेजों से हटाई जाएगी दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर, 2017 में लगाने का दिया गया था आदेश

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत.

खास बातें

  • पिछली सरकार ने दिया था आदेश
  • अब गहलोत सरकार ने लिया वापस
  • अब किसी कागजात पर नहीं होगी दीन दलाय उपाध्याय की तस्वीर
जयपुर:

राजस्थान सरकार (Rajasthan Govt) ने सभी सरकारी दस्तावेजों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय (Deendayal Upadhyay)की तस्वीर हटाने का आदेश बुधवार को जारी किया है. वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने दिसंबर 2017 में सर्कूलर जारी करके सभी विभागों को आदेश दिए थे कि उनके लेटर पैड पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर का लोगो के रूप में इस्तेमाल करें. अब अशोक गहलोत सरकार ने उस सर्कूलर को वापस ले लिया है. 

राज्य के मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग की ओर से दीनदयाल की तस्वीर हटाने का आदेश जारी किया गया. अतिरिक्त मुख्य सचिव रवि शंकर श्रीवास्तव की ओर से जारी इस आदेश के अनुसार राज्य मंत्रिमंडल की 29 दिसम्बर को हुई बैठक में किए गए फैसले के अनुसार यह कदम उठाया गया है. इसके तहत राज्य के समस्त राजकीय विभागों, निगमों,बोर्ड एवं स्वायत्तशासी संस्थाओं के लेटर पैड पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर का लोगो के रूप में प्रयोग/मुद्रण करने के संबंध में 11 दिसंबर, 2017 को जारी परिपत्र को वापस लिया जाता है.

राजस्थान में अशोक गहलोत ने वसुंधरा सरकार के कई फैसले पलटे, पंचायत चुनाव के लिए शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता भी खत्म

बता दें, राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री शोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने वसुंधरा सरकार के कई फैसलों को पलट दिया था. नई सरकार ने पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार के पार्षदी और सरपंची चुनाव में शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता के फैसले को खत्म कर दिया. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में हुई प्रदेश मंत्रिमंडल की पहली बैठक में किसानों का कर्ज माफ करने की पात्रता व मापदंड तय करने के लिए अंतर्विभागीय समिति गठित करने, वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाने जैसे कई अहम फैसले भी लिए गए थे. दरअसल वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार ने 2015 में स्थानीय निकाय चुनावों में उम्मीदवारों के न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता संबंधी प्रावधान लागू किए गए थे. 

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सूचना व जनसंपर्क मंत्री रघु शर्मा ने बताया था कि इसके साथ ही पूर्ववर्ती सरकार द्वारा पिछले छह महीनों में लिए गए फैसलों की समीक्षा भी की जाएगी. उन्होंने कहा कि किसानों के अल्पकालीन फसली कर्ज की माफी के सवाल पर मंत्रिमंडल ने अंतर्विभागीय समिति गठित करने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री गहलोत यह समिति गठित करेंगे. शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक व भूमि विकास बैंक से कर्जमाफी की पात्रता व मापदंड क्या होंगे, इसको लेकर भ्रांतियां फैलाने की कोशिश की गई हैं लेकिन जल्द ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी. उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर विधि विश्वविद्यालय व हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय फिर शुरू किया जाएगा.

(इनपुट- भाषा)

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