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आपके सवाल, रवीश के जवाब

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक - The Free Voice, इश्क़ में शहर होना, हिन्दी मेरी जान, भोजपुरी मेरा ईमान.

सवाल

क्या आर्दशवाद कोरी कल्पना है...?

अक्षय शर्मा
जवाब

@अक्षय शर्मा , अक्षय, आदर्शवाद बिल्कुल कोरी कल्पना नहीं है. ज़रा-सा निश्चय हो और ईमानदार बने रहने की कोशिश जारी रहे, तो इस पर चला जा सकता है. इसके बिना कोई जी भी कैसे सकता है.

सवाल

सर, हमारे देश से भ्रष्टाचार कैसे खत्म हो सकता है...?

umashankar kumar
जवाब

@umashankar kumar , हमारे देश से भ्रष्टाचार कभी ख़त्म नहीं होगा. न मेरे जीवनकाल में, न आपके जीवनकाल में. हमारी राजनीति भ्रष्ट पैसे से चलती है और चलती रहेगी. समाज भी इसे पालता-पोसता है. जैसे दहेज लेना, किसी की संपत्ति हड़पना, किसी को रिश्वत देना. यह सब आम है. हमें लगातार लड़ते रहना है. पहले यह थमेगा, फिर कम होगा और फिर शायद ख़त्म भी होने लगे.

सवाल

सर, लोकसभा चुनाव 2019 से पहले आपको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू करना चाहिए... लोग आपसे ऐसी ही उम्मीद कर रहे हैं...

कर्म पाल सिंह
जवाब

@कर्म पाल सिंह , BJP मेरे कार्यक्रम में अपने प्रवक्ता नहीं भेजती है. दो साल से बहिष्कार कर रही है. मेरे ख़्याल से प्रधानमंत्री भी उसी पार्टी के हैं. आपको लगता है, वह मुझे इंटरव्यू देंगे. जब उनके प्रवक्ता मुझे फ़ेस नहीं कर पाते हैं, तो प्रधानमंत्री क्यों जोखिम लेंगे. वैसे भी वह रोज़ कहीं न कहीं भाषण देते ही रहते हैं. उन भाषणों को भी सुनकर तथ्यों की जांच की जा सकती है. आप यह काम हर भाषण के बाद कीजिए, इंटरव्यू से ज़्यादा मज़ा आएगा.

सवाल

आज के इस माहौल में 2019 (आम चुनाव) के संदर्भ में आप तीसरे मोर्चे को कहां देखते हैं, और इसमें अरविंद केजरीवाल की क्या भूमिका हो सकती है...?

Lalit Kumar
जवाब

@Lalit Kumar , मैं इस वक्त 2019 के हिसाब से कुछ भी नहीं सोच रहा. 2014 के हिसाब से सोचता हूं कि उस वक्त जो वादे किए गए, वे कहां गए. 2019 का चुनाव एक साल बाद होगा. अभी से इन फालतू बातों में टाइम बर्बाद करने का इरादा नहीं है.

सवाल

सर, क्या BJP का जम्मू एवं कश्मीर में गठबंधन को तोड़ना 2019 के लिए प्रचार की शुरुआत है...?

mahesh kumar yadav
जवाब

@mahesh kumar yadav , महेश, जम्मू-कश्मीर के मसले पर इतनी सरलता से नहीं कहा जा सकता है. चुनावी प्रचार में झूठ ही तो बोलना होता है नेताओं को. कश्मीर नहीं होगा, तो किसी और विषय पर बोल देंगे. इससे अच्छा यह है कि आप कश्मीर की जटिलता को समझें. उसके बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानने का प्रयास करें, ताकि आप अपनी जानकारी से कश्मीर को लेकर उठाए जा रहे कदमों को परख सकें.

सवाल

आप 'मोदी विरोधी' के रूप में क्यों जाने जाते हो...?

sudhir kumar jain
जवाब

@sudhir kumar jain , मुझे कौन किस रूप में जानता है, इसकी परवाह नहीं करता. मोदी का विरोध करना किसी का भी राजनीतिक अधिकार है और वह वैधानिक है. इस वक्त वह सत्ता में हैं. मैं उनसे सवाल करता हूं. यह मेरा काम है. उनसे पूछें कि क्या देश में दो प्रधानमंत्री हैं, नहीं न. एक ही हैं, तो सवाल उन्हीं से होंगे. यह झूठ मैंने नहीं बोला है कि भगत सिंह जब जेल में थे, तब कोई कांग्रेस से मिलने नहीं गया. यह झूठ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बोला है. अगर मैं उनके इस झूठ पर सवाल उठाता हूं, तो मैं मोदी जी का विरोधी नहीं होता, बल्कि पत्रकार के नाते सही सवाल करता हूं. वैसे राजनीतिक दल के लोग उनका विरोध करते हैं. मेरी राय में ठीक से विरोध नहीं करते हैं.

सवाल

रवीश जी, जिस तरह दलित वर्ग अपना सोशल और पॉलिटिकल पक्ष कुछ हद तक मज़बूत कर पाया है, आज़ाद भारत में वही चीज़ मुस्लिम वर्ग क्यों नहीं कर पाया...?

Titiksha
जवाब

@Titiksha , तितिक्षा, आपका सवाल अच्छा है और जटिल भी. इसके बहुत-से कारण है, इस वक्त किसी एक के बारे में कहना ठीक नहीं रहेगा और बहुत कुछ कहने के लिए वक्त नहीं है. सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के बाद से काफी बदलाव आया है, उनके बीच स्कूल से लेकर रोज़गार के सवाल महत्वपूर्ण हुए हैं. पिछड़ेपन की तस्वीर सामने आई है, मगर उनके सवाल को हमेशा सांप्रदायिक चश्मे से देखा जाता रहा है.

सवाल

इस देश में लड़कियों को अपनी राय रखने की आज़ादी बिना किसी खौफ के कब मिलेगी...? मैं भी एक लड़की हूं, जो अपनी आज़ादी चाहती है, बिना किसी खौफ के इस सिस्टम के बारे बोलना चाहती है, अपना हक़ चाहती है... हमारी आवाज़ को क्यों दबाया जाता है, धमकियां देकर, डराकर...? मैं इन सब चीज़ों से लड़ना चाहती हूं, आपके जैसा बनना चाहती हूं, लेकिन हमारे माता-पिता डरते हैं, मुझे रोकते हैं... मैं एक रिपोर्टर बनना चाहती हूं, सच बोलना चाहती हूं... अपने हक़ के लिए कैसे लड़ूं...? शुरुआत कैसे करूं...? कब 'फ्रीडम ऑफ स्पीच' का असली हक मिलेगा लड़कियों को...? रवीश कुमार जैसी हिम्मत कैसे बनाऊं...?

Mannat Sharma
जवाब

@Mannat Sharma , मन्नत, आप बोलते समय इतना ध्यान रखें कि जो बोल रही हैं, उसकी बातों के बारे में ठीक से सोच लिया है, तथ्यों की जांच कर ली है. इसके बाद बोल दीजिए. देश में बहुत-सी औरतें अब बोलती हैं. 1947 के पहले भी बोल रही थीं और अब भी बोल रही हैं. आपके पास हर तरह का संवैधानिक अधिकार है. बोला कीजिए.

सवाल

राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनने के बारे में क्यों नहीं सोचना चाहिए...? क्या सिर्फ और सिर्फ मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही इस पद के बारे में सोच सकते हैं...? मैं कहता हूं, इस देश के हर नागरिक को हक है कि वह इस पद पर पहुंचने के बारे में सोचे... क्या मैं गलत हूं...?

राहुल शर्मा
जवाब

@राहुल शर्मा , राहुल जी, आप बिल्कुल गलत नहीं हैं. राहुल गांधी भी प्रधानमंत्री बनने की सोच सकते हैं और राहुल शर्मा भी. लेकिन मंज़ूरी तो जनता की तरफ से होगी. वो जिसे मिल जाएगी, वही प्रधानमंत्री होगा.

सवाल

जब प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री जब स्वयं की पार्टी के चुनाव प्रचार हेतु दूर-दूर तक जाते हैं, तो उनका खर्च सरकार वहन करती है या उनकी पार्टी...? अगर सरकार वहन करती है, तो क्या यह वित्तीय अनियमितता नहीं कहलाती...?

अमित गोंड
जवाब

@अमित गोंड , प्रधानमंत्री का ख़र्च सरकार ही वहन करेगी, क्योंकि उनकी सुरक्षा की कुछ ज़िम्मेदारियां हैं, जो सरकार ही उठा सकती है. वह आम जहाज़ से नहीं चल सकते हैं. यह वित्तीय अनियमितता नहीं है, क्योंकि इस पद पर रहते हुए वह एक दिन क्या, एक पल के लिए भी सुरक्षा घेरे से बाहर नहीं जा सकते हैं. हां, जिस रैली में जाते हैं, उसका खर्च सरकार के खाते से नहीं होता है, वह उनकी पार्टी ही करती है.

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