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आपके सवाल, रवीश के जवाब

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक - The Free Voice, इश्क़ में शहर होना.

सवाल

वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में कोई एक विशेष अंतर क्या है...?

Shashikant
जवाब

@Shashikant , बहुत अंतर है. 2019 में 2014 को भुला दिया गया है.

सवाल

क्या इस बार का लोकसभा चुनाव मूल मुद्दों पर नहीं, एक दूसरे को बदनाम करने के लिए लड़ा जा रहा है...?

Ankit kumar
जवाब

@Ankit kumar , हम लोग हर चुनाव इसी तरह लड़े जा रहे हैं. मूल मुद्दे ग़ायब रहते हैं. नेता तो गायब कर ही देते हैं और जनता भी वही करती है. अभी 'बिजनेस स्टैंडर्ड' में योगेंद्र यादव का विश्लेषण पढ़ रहा था. बेरोज़गारी मुद्दा है, मगर नौजवान इसके लिए सरकार को ज़िम्मेदार नहीं मानता. तो फिर बेरोज़गारी कैसे मुद्दा है, किस लिए है.

सवाल

भारतीय राजनीति में यदि ऐसा ही होता रहा, तो क्या एक समय ऐसा आएगा, जब सच्ची पत्रकारिता हमारे देश से समाप्त हो जाएगी...?

Mohammed Shamimul Haque
जवाब

@MD. Shamim , भारत में पत्रकारिता अब बहुत सीमित होती है. इसके कुछ बुनियादी कारण हैं. एक ही उद्योगपति के हाथ में सारे चैनल या अधिकतम चैनल होते जा रहे हैं. आपको क्यों लगता है कि उनकी दिलचस्पी पत्रकारिता में होगी, अपने धंधे में नहीं. इसे बदला नहीं जा सकेगा.

सवाल

सर, क्या आपको लगता है कि कन्हैया कुमार बेगूसराय में गिरिराज सिंह को टक्कर दे पाएंगे...?

Amarjeet yadav
जवाब

@Amarjeet yadav , बेगूसराय में हमने कोई सर्वे नहीं किया. कन्हैया की चर्चा तो है. यह अच्छी बात है कि नए उम्मीदवार को भी चर्चा में जगह मिल रही है. हार-जीत तो वहां की जनता के हाथ में है. बेगूसराय पर लोगों की निगाहें तो हैं कि वहां की जनता किसे चुनती है.

सवाल

क्या इस चुनाव के बाद पत्रकारिता के स्तर में कोई सुधार होगा...?

Mohamed Khalid Rasheed
जवाब

@Mohamed Khalid Rasheed , मुझे नहीं लगता कि पत्रकारिता में सुधार होगा. मुझे ऐसी कोई उम्मीद नहीं है. पाठक और दर्शक ही बदलाव के लिए दबाव डाल सकते हैं.

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