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आपके सवाल, रवीश के जवाब

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक - The Free Voice, इश्क़ में शहर होना.

सवाल

रवीश जी, नमस्कार... भारतीय लोकतंत्र को बचाने में आम नागरिक क्या योगदान कर सकते हैं, जब सारे राजनैतिक दल एक ही अवधारणा पर काम कर रहे हैं - भारतीय को भारतीय से लड़ाना...

कमलेश पान्डे
जवाब

@कमलेश पान्डे , कमलेश, यह तभी संभव होगा, जब जनता सवाल करेगी. सवाल करने के लिए सूचनाओं को महत्व देगी. आज सारे दल बिज़नेस घरानों के लिए काम करने लगे हैं, उन्हीं के इशारे पर चलते हैं. जनता को बिज़नेस की खबरों को ध्यान से पढ़ना चाहिए. प्रोपेगैंडा को समझना चाहिए.

सवाल

एग्ज़िट पोल पर आपके क्या विचार हैं...? ये भी तो एक 'फेक' माहौल बनाते हैं...

Mohd Quasim
जवाब

@Mohd Quasim , एग्ज़िट पोल और ओपिनियन पोल कौन करता है, कैसे करता है, इस पर उसकी विश्वसनीयता निर्भर करती है. मैं इन सबमें विश्वास नहीं रखता. इनके कारण मुद्दे खत्म हो जाते हैं. बहुत ज़्यादा चर्चा होती है इनकी. पूरा चुनाव सर्वे बनकर रह जाता है. यह अच्छा नहीं है. जीतना तो है ही किसी न किसी को, मगर बात इस पर होनी चाहिए कि क्यों जीतना है.

सवाल

क्या NDA सरकार ने पांच वर्ष के कार्यकाल में 'सबका साथ, सबका विकास' नारे को सही मायने में चरितार्थ किया है...?

राज बहादुर
जवाब

@राज बहादुर , NDA का दावा है कि सबका किया है. असलियत कुछ और है. विकास हुआ होता, तो इस चुनाव में 'स्किल इंडिया' और 'मेक इन इंडिया' के नतीजे रैलियों में लहराए जाते. उन सब पर कहीं कोई बात नहीं है. तब दावे किए जाते थे कि पलायन रुकेगा, एक भी पलायन नहीं रुका है. इस वक्त चुनाव हो रहा है, और बिहार के सहरसा ज़िले से मज़दूरों का पलायन जारी है.

सवाल

सर, क्या आपको लगता है, भारत की सबसे बड़ी समस्या शिक्षा है...?

Manauwar
जवाब

@Manauwar , सबसे बड़ी समस्या से क्या फर्क पड़ता है, मगर शिक्षा समस्या है. यह किसी के लिए मुद्दा नहीं है. सरकारी शिक्षा व्यवस्था को इसलिए घटिया किया गया है, ताकि गरीब बच्चों की तरक्की नहीं हो सके, उनका आत्मविश्वास नहीं बदल सके. इसके कारण भारत में ज्ञान की असमानता काफी बढ़ती जा रही है.

सवाल

हिन्दी के 100 से ज्यादा न्यूज़ चैनल आते हैं, उनमें से 99 एक ही दिशा में भाग रहे हैं, और आप दूसरी दिशा में. ऐसा क्या है, जो उन्हें ऐसा करने पर मजबूर कर रहा है और आपको नहीं, और क्या इस बात की उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले समय में हालात सुधरेंगे...?

Gautam Goswami
जवाब

@Gautam Goswami , 99 चैनल किसी दूसरी दिशा में भागते हुए दिखाई दे रहे हैं, वह दिशा है लोकतंत्र और लोक के खात्मे की दिशा. अगर मीडिया के ज़रिये दर्शकों और मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को फंसाकर रखा जाए, उलझाकर रखा जाए, तो उस भगदड़ का लाभ उठाकर सरकारी खजाने को लूटने का काम आसानी से हो सकता है. मीडिया के हालात अब नहीं सुधरेंगे. रिपोर्टिंग ध्वस्त है, लोगों की समस्या को सुनने और समझने के लिए रिपोर्टर का होना ज़रूरी है. चैनलों के पास सूचना के नाम पर मोदी और राहुल के बयान हैं. मेरी राय में यह पत्रकारिता नहीं है. मैंने न्यूज़ चैनल नहीं देखने की अपील की है.

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