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आपके सवाल, रवीश के जवाब

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक - The Free Voice, इश्क़ में शहर होना.

सवाल

सर, जब भी वर्तमान में किसी भी सरकार - केंद्र या राज्य - से किसी पार्टी द्वारा कोई सवाल पूछा जाता है, तो वह पूछने वाली पार्टी के इतिहास में क्यों चली जाती है, और कहती है कि आप के समय में भी ऐसा हुआ था, वैसा हुआ था... आखिर किसी सवाल का मूल जवाब कब मिलेगा, क्या यह लोकतंत्र के लिए अच्छा है...?

बृजेश कुमार यादव
जवाब

@बृजेश कुमार यादव , सवाल का जवाब नहीं देना चाहती है, इसलिए सब इतिहास का सहारा लेते हैं. दरअसल, किसी भी दल के पास कोई नया आइडिया नहीं है. नेताओं को ही सत्ता मिलेगी, मगर सत्ता पाकर वे कुछ नया नहीं कर पाते, तो उसकी जगह मूर्ति बनाते हैं, स्मारक बनाते हैं, ताकि सबको लगे कि कोई नया काम हुआ है.

सवाल

सर, आपको क्या लगता है, भारत में स्वतंत्र मीडिया का उदय कब होगा...?

SUNIL KUMAR AHIRWAR
जवाब

@SUNIL KUMAR AHIRWAR , भारत का मीडिया, खासकर जो पहले से जमा-जमाया मीडिया है, वह अपने इस स्तर के साथ सामंजस्य बिठा चुका है. उसे बिके रहने में कोई दिक्कत नहीं है. बिका हुआ मीडिया भी करोड़ों लोगों के ज़रिये दिखा और पढ़ा जाता है. बिकने से लाभ ज़्यादा होता है, खूब विज्ञापन मिलते हैं, सत्ता का संरक्षण मिलता है, पाठक भी मिलते हैं. बस, उसकी जगह एक ही काम नहीं करना पड़ता है, और वह काम है पत्रकारिता.

सवाल

सर, आपके द्वारा आपका ट्विटर एकाउंट बंद करने का क्या कारण है...?

Zafar Khan
जवाब

@Zafar Khan , 2015 से ही ट्विटर पर लिखना बंद कर दिया हूं. उसकी जगह मैं फेसबुक पर विस्तार से लिखता हूं. घड़ी-घड़ी लिखने और हर बात पर लिखने की आदत के लिए काफी वक्त चाहिए. मैं रोज़ सुबह दो-तीन घंटे लगाकर लंबा लेख लिखता हूं, जिससे खुद भी सीखता हूं और पढ़ने वालों का भी काम आसान होता है. मेरा फेसबुक पेज है @RavishKaPage, ट्विटर का अकाउंट चालू है, बस, लिखता नहीं.

सवाल

क्या इंडिया कभी वर्ल्ड लीडर (सुपरपॉवर) बन सकता है...? अगर हां, तो कैसे, और अगर नहीं, तो क्यों...? पांच प्वाइंट में जवाब दें, प्लीज़...

RAJESH
जवाब

@RAJESH , न्यूज़ चैनल देखने से तो भारत सुपरपॉवर नहीं बनेगा. सुपरपॉवर से आप क्या समझते हैं...? अगर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतरी की बात करते हैं, तो मुझे नहीं लगता है कि हम इस सेक्टर में अगले 10 साल तक किसी स्तर पर पहुंचने वाले हैं. कोई इम्तिहान नहीं होता है कि पास कर सुपरपॉवर बन गए. बड़ा और सक्षम देश बना जाता है, ग़रीबी से लड़ते हुए और सबके लिए अवसरों को पैदा करते हुए. बाकी जो आप इस सवाल के आस-पास सुनते हैं, वह सब प्रोपेगैंडा और ड्रामा है.

सवाल

क्या भारतीय प्रधानमंत्री आत्ममुग्धता से ग्रस्त हैं...?

अमर दलपुरा
जवाब

@अमर दलपुरा , बिल्कुल... हमारे प्रधानमंत्री आत्ममुग्धता के शिकार हैं. आत्ममुग्धता के अलावा कैमरामुग्धता के भी शिकार हैं. हर समय टीवी पर दिखने या किसी न किसी बहाने लोगों के बीच दिखने की उनकी राजनीतिक रणनीति भले स्मार्ट है, मगर वह एक प्रधानमंत्री हैं. अधिकांश छोड़िए, अगर उनके समय का मामूली से ज़्यादा हिस्सा भी इन सब पर खर्च हो रहा है, तो यह उनके काम और देश का नुकसान है. जनवरी आते ही वह एक सौ सभाओं को करने निकल गए. अगर पांच घंटे भी एक सभा पर लगते हैं, तो इस हिसाब से वह 20 दिन के बराबर सभाएं ही कर रहे हैं. क्या यह सवाल नहीं होना चाहिए...?

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