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आपके सवाल, रवीश के जवाब

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक - The Free Voice, इश्क़ में शहर होना.

सवाल

सर, कश्मीर समस्या का समाधान आपकी नज़र में क्या हो सकता है...?

अमर दलपुरा
जवाब

@अमर दलपुरा , कश्मीर की समस्या जटिल है. उसका समाधान बताने से हम जैसे मामूली एंकरों को दूर रहना चाहिए. आप अगर हिन्दी के पाठक हैं, तो अशोक पांडे की कश्मीरनामा, इतिहास और समकाल पढ़ें. राजपाल प्रकाशन ने यह किताब छापी है.

सवाल

RSS और उसकी विचारधारा की काट क्या है...? हिन्दू भाइओं के दिल-ओ-दिमाग में जो दूसरे धर्मों के लिए ज़हर भरा गया है, 70-80 साल में, उसकी दवा क्या है...?

Sarfaraz
जवाब

@Sarfaraz , किसी भी विचारधारा की काट से पहले उसका अध्ययन और समझ देना ज़रूरी होता है. उस विचारधारा से लैस लोगों के व्यवहार को भी समझना होता है. वे बोलते क्या हैं, करते क्या हैं. फिर देखना होता है कि उस विचारधारा के पास कोई आर्थिक विकल्प है. इसके बाद विकल्प की विचारधारा का इसी तरह सख्ती से अध्ययन करना चाहिए. विचारधारा की काट निकालने का रास्ता मुश्किल है. काफी अध्ययन और समझदारी की ज़रूरत होती है. यकीन की ज़रूरत होती है कि जो ग़लत है, वह ग़लत है. ग़लत का विरोध करना सही काम है.

सवाल

सर, आप भी पत्रकार हैं, लेकिन आजकल जो कुछ न्यूज़ चैनलों पर दिखाया जाता है, उसके बारे में आप क्या कहेंगे...? इतनी उग्र, असयंमित भाषा, अपारदर्शिता एवं पक्षपात - क्या सच है और क्या झूठ, पता ही नहीं चलता... कभी-कभी लगता है, न्यूज़ नहीं, हिन्दी फ़िल्म देख रहे हैं...

Arup Majumdar
जवाब

@Arup Majumdar , अगर भारत की जनता मेरी बात मानती, तो मैं उससे यही निवेदन करता कि उसे न्यूज़ चैनल देखना बंद कर देना चाहिए. मैंने इस पर विस्तार से लिखा है. अब आप इन माध्यमों से बहुत उम्मीद न करें. इन पर सरकार और कॉरपोरेट का कब्ज़ा हो गया है. इनका काम है, सरकार के लिए भीड़ पैदा करना. पत्रकारिता करने के लिए जो संसाधन और सामर्थ्य होना चाहिए, वह अब किसी चैनल के पास नहीं है. चाटुकारिता ही पत्रकारिता है. चैनलों को यह फार्मूला मिल गया है.

सवाल

गठबंधन सरकार की क्या कमियां होती हैं...?

Dilip kumar singh
जवाब

@Dilip kumar singh , गठबंधन की सरकार की भी वही कमियां हो सकती हैं, जो एक दल की हो सकती हैं. एक दल की सरकार मनमानी भी कर सकती है, मगर गठबंधन की सरकार खींचतान में ही उलझी रह सकती है. भारत में गठबंधन की सरकारों की उपलब्धियां भी किसी एक दल के बहुमत वाली सरकार से कम नहीं रही हैं. ऐसा नहीं है कि गठबंधन की सरकार रहती है, तो देश नहीं चलता है. इन सबके बीच आपको देखना होगा कि दोनों की नीतियां क्या हैं. बेहतर है, आप राजनीति को नीतियों से देखें, नेता से नहीं. अगर आप सिर्फ नेता से देखेंगे, तो कोई फ्रॉड भी रंग-रूप बदलकर आपका विश्वास हासिल कर सकता है. आज न कल, हम सभी को नीतियों पर लौटकर आना ही होगा, उसी को लेकर बहस करनी होगी कि फलां नीति से किसे क्या फायदा है.

सवाल

कभी एक बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार, दूर के रिश्तेदारों तक के बारे में रिपोर्टिंग कीजिए... लोगों को पता चलना चाहिए कि PM मोदी ने कितना पैसा बनाया है...?

Sandeep Kumar singh
जवाब

@Sandeep , मेरी प्रधानमंत्री के परिवार में कोई दिलचस्पी नहीं है. मैं राजनीति को कथा-कहानी की तरह नहीं देखता. उनके परिवार की राजनीति में कोई भूमिका होती, तो ज़रूर देखता. मुझे अच्छा लगता, अगर प्रधानमंत्री की मां उनके साथ रहतीं. क्या आप प्रधानमंत्री बन जाने पर मां को साथ नहीं रखेंगे. कांशीराम ने अपने हाथों से एक आंदोलन बनाया, BSP बनाई और उसकी सरकार बनी, लेकिन वह अपने परिवार को लेकर न तो रोते थे, न गाते थे. तो ऐसे कई उदाहरण हैं.

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