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आपके सवाल, रवीश के जवाब

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक - The Free Voice, इश्क़ में शहर होना, हिन्दी मेरी जान, भोजपुरी मेरा ईमान.

सवाल

2019 के आम चुनाव में जातिवाद की राजनीति कितना प्रभाव डालेगी...?

गौरव कुमार
जवाब

@गौरव कुमार , भारत का हर चुनाव धर्म और जाति से प्रभावित होता है. इसका प्रभाव होगा. जो जितना फेल होगा, वही उतना ज़्यादा जाति-जाति या धर्म-धर्म चिल्लाएगा. आप व्हॉट्सऐप यूनिवर्सिटी में ठेले जा रहे मीम, यानी पोस्टरों को पढ़कर अंदाज़ा लगा सकते हैं कि धर्म का इस्तेमाल कौन ज़्यादा कर रहा है. कौन सोचने-समझने की ताकत को कुंद करता है.

सवाल

केरल में भारी तबाही के बावजूद भारत सरकार द्वारा विदेशी मदद स्वीकार करने से इंकार करने का क्या कारण हो सकता है, जबकि केंद्र सरकार खुद उतनी मदद नहीं दे रही है, जितनी केरल के मुख्यमंत्री मांग रहे हैं... इसके पीछे सरकार की क्या नीति है...?

Agradeep Singh
जवाब

@Agradeep Singh , विदेशी मदद लेने में कोई बुराई नहीं है. भारत भी मदद करता है और मदद लेता है. यह सब बचकानी सोच है, जो ज़्यादातर सोशल मीडिया पर अपने समर्थक गिरोह को खुश करने के लिए किया जाता है. केरल की बाढ़ ही नहीं, किसी भी राज्य की बाढ़ को लेकर कोई नीति नज़र नहीं आती है. हर राज्य अपनी मांग लिए भटक रहा है.

सवाल

नोटबंदी को GST लागू करने से पहले क्यों किया गया...? क्या होता, अगर GST लागू होने के छह महीने बाद नोटबंदी की जाती...? कृपया इस सवाल का जवाब दें, क्योंकि मेरे अनुमान से बहुत कुछ बदल जाता...

आदिल हुसैन
जवाब

@आदिल हुसैन , नोटबंदी एक फेल आइडिया थी. इसे आप कभी भी लागू करते, नतीज़ा ज़ीरो ही होना था. देश की अर्थव्यवस्था के साथ किया गया फ्रॉड है. जो लक्ष्य हासिल करने की बात हो रही है, 'डिजिटल इकोनॉमी' का, वह नोटबंदी के बग़ैर भी हासिल किया जा सकता था. दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाएं डिजिटल हो चुकी हैं, उन्होंने अपने यहां नोटबंदी नहीं की.

सवाल

आप राहुल गांधी का इंटरव्यू क्यों नहीं लेते...?

Yadvendra K. Gupta
जवाब

@Yadvendra K. Gupta , आपका यह सवाल अच्छा है. यही सवाल लोग पूछते हैं कि मैं प्रधानमंत्री का इंटरव्यू क्यों नहीं लेता. राहुल गांधी भले मुझे इंटरव्यू न दें, लेकिन कई जगहों पर वह बड़ी संख्या में पत्रकारों से मिल रहे हैं और अब सवालों के जवाब दे रहे हैं. इंदौर में पढ़ा था कि 90 से अधिक पत्रकार थे और राहुल अकेले जवाब दे रहे थे. लोकतंत्र में विपक्ष के नेता की कड़ाई से परीक्षा होनी चाहिए, मगर प्रधानमंत्री को भी ऐसा ही करना चाहिए. उनके पास राहुल गांधी से ज्यादा बताने के लिए है, हमारे पास भी पूछने के लिए बहुत है. प्रधानमंत्री का इंटरव्यू अभी तक रहस्य बना हुआ है.

सवाल

क्या देश की जनता इतनी जागरूक है कि वह पिछली और मौजूदा सरकार की सफलता व असफलता के बीच अंतर समझ सके...?

angad yadav
जवाब

@angad yadav , किसी भी सरकार का मूल्यांकन तभी किया जा सकता है, जब उसके राज में मीडिया स्वतंत्र हो. मैं नहीं मानता कि भारत का मीडिया स्वतंत्र है. इसलिए जनता मूल्यांकन करेगी भी, तो किस आधार पर. मीडिया के फैलाए झूठ के आधार पर आप क्या मूल्यांकन करेंगे. 'गोदी मीडिया' किसी काम की नहीं है.

सवाल

गाय के बदले मुस्लिम को मार देने पर मुजरिम को बेल कैसे मिल जाती है...? क्या इससे बाकी भगवा आतंकियों का हौसला नहीं बढ़ता है...? क्या खूनी मुस्लिम होता, तो उसे बेल मिल जाती...?

bilal ahmad
जवाब

@bilal ahmad , हमारे देश में पुलिस का इस्तेमाल राजनीतिक काम में ज्यादा होता है. ऐसा होना नहीं चाहिए, क्योंकि कई मामले में ऐसा हुआ है. लेकिन दूसरे अन्य मामलों में पुलिस का यही व्यवहार रहा है. दुःखद है. वह ठीक से जांच करती और हत्यारों को जेल पहुंचाती, तो गाय के नाम पर कई मुस्लिमों की हत्या में शामिल कई नौजवान हत्यारे बनने से बच जाते. वैसे गाय के नाम पर हिन्दू भी इस हिंसा का शिकार होने लगे हैं. एक सनकी भीड़ तैयार हो गई है, जो दिन-रात हिन्दू-मुस्लिम राजनीति करती रहती है.

सवाल

अगर 2019 के आम चुनाव में BJP जीत जाती है, तो क्या पूरी तरह इंडिया में डेमोक्रेसी की हत्या हो जाएगी, आपका क्या विचार है...?

Rajeev
जवाब

@Rajeev , अगर-मगर का मतलब नहीं है. कई संस्थाएं आज ही चरमरा गई हैं. हमें देखना चाहिए कि किसी के हारने या जीतने से संस्थाओं की स्वायत्तता पर फर्क न पड़े. यह काम नागरिक का है.

सवाल

क्या आज के वक्त में हम दिखावे की राजनीति से ऊपर उठकर सामाजिक सरोकार की राजनीति कर पाएंगे, जैसी नेहरू, पटेल, गांधी के समय के नेता किया करते थे...? अगर हां, तो उसका रास्ता क्या होगा...?

रवि राज
जवाब

@रवि राज , हमारी राजनीति फटीचर हो चुकी है. जो जितना झूठ बोलेगा, कुतर्क करेगा, वही कामयाब होता रहा है. लेकिन हमारी राजनीति की एक खूबी और है. वह जब भी फटीचर होती है, ख़ूबसूरत होने का रास्ता खोजने लगती है. वक्त लग जाता है, मगर कब तक आप गाली-गलौज की राजनीति करेंगे और मीडिया के ज़रिये प्रोपेगैंडा की राजनीति झेलेंगे. मुझे नहीं लगता कि आप इसे और झेल पाएंगे.

सवाल

राम मंदिर का झगड़ा कब खत्म होगा...?

Md Sufyan
जवाब

@Md Sufyan , राम मंदिर का झगड़ा राम मंदिर तक ही सीमित नहीं है. झारखंड के पाकुड़ में जब लोग स्वामी अग्निवेश को लात-घूंसों से मार रहे थे, तब 'जय श्री राम' का नारा लगा रहे थे. वहां तो कोई मंदिर का मसला नहीं था. क्या राम का नाम किसी बुज़ुर्ग को मारने के लिए लिया जाना चाहिए...?

सवाल

चुनाव का मौसम आने वाला है, सो, इस मौके पर कोई ऐसा कार्यक्रम क्यों न चलाया जाए, जिससे लोगों में आपस में भाईचारा बढ़े, नफरत नहीं...?

Azaz Anjum
जवाब

@Azaz Anjum , अंजुम जी, चुनाव नहीं भी होता है, तब भी हम ऐसे ही कार्यक्रम चलाते हैं, जिनसे मोहब्बत बढ़े और उन्माद में लोग भीड़ का हिस्सा न बनें. यह काम रोज़ का है.

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