NDTV Khabar
होम |   रवीश से पूछें 

आपके सवाल, रवीश के जवाब

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक - The Free Voice, इश्क़ में शहर होना, हिन्दी मेरी जान, भोजपुरी मेरा ईमान.

सवाल

कभी एक बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार, दूर के रिश्तेदारों तक के बारे में रिपोर्टिंग कीजिए... लोगों को पता चलना चाहिए कि PM मोदी ने कितना पैसा बनाया है...?

Sandeep
जवाब

@Sandeep , मेरी प्रधानमंत्री के परिवार में कोई दिलचस्पी नहीं है. मैं राजनीति को कथा-कहानी की तरह नहीं देखता. उनके परिवार की राजनीति में कोई भूमिका होती, तो ज़रूर देखता. मुझे अच्छा लगता, अगर प्रधानमंत्री की मां उनके साथ रहतीं. क्या आप प्रधानमंत्री बन जाने पर मां को साथ नहीं रखेंगे. कांशीराम ने अपने हाथों से एक आंदोलन बनाया, BSP बनाई और उसकी सरकार बनी, लेकिन वह अपने परिवार को लेकर न तो रोते थे, न गाते थे. तो ऐसे कई उदाहरण हैं.

सवाल

क्या आपको लगता है कि सरकार ने किसानों की आमदनी दोगुनी करने का भरसक प्रयास किया है...?

Shiva Verma
जवाब

@Shiva Verma , सरकार ने किसानों की आमदनी दोगुनी करने का कोई प्रयास नहीं किया है. ऐसा होता, तो किसानों को आंदोलन नहीं करना पड़ता. योजनाओं के ऐलान कर देने से प्रयास नहीं हो जाता है, या फिर स्लोगन गढ़ देने से प्रयास नहीं हो जाता. खेती की अर्थव्यवस्था में कोई बुनियादी बदलाव आया हो, तो मुझे भी बताएं. किसानों की मौजूदा आमदनी 2,000 मासिक के आसपास है. 2022 में इसे 4,000 कर देने के प्रयास या नारे को क्या आप पर्याप्त मानेंगे...?

सवाल

सर, कुछ मित्र, जो भक्त बन जाते हैं, उनसे अगर नेताओं को लेकर बहस होती है, तो हम चुप हो जाते हैं, ताकि दोस्ती बनी रहे, लेकिन इतनी नफरत उनमें आई कैसे, और यह कैसे खत्म होगी...?

अरविन्द यादव
जवाब

@अरविन्द यादव , जो भक्त बन गए हैं, उनका कुछ नहीं हो सकता, मगर फिर भी आप बहस करना न छोड़ें. रिश्तों को बनाए रखिए. नीतियों पर बहस कीजिए. अपनी समझ का भी विस्तार कीजिए. ऐसी राजनीति का साथ दीजिए, जिसमें मानवता हो, जिसमें हिंसा न हो, जिसकी भाषा उग्र न हो.

सवाल

एक इंसान के रूप में आप खुद को आस्तिक, नास्तिक या तर्कशास्त्री, क्या पाते हैं...?

रविन्द्र
जवाब

@रविन्द्र , मैंने खुद को कभी परिभाषित नहीं किया. मुझे दूसरों को ही देखने से फुर्सत नहीं होती. आप कुछ भी रहें, मोहब्बत से रहें. नफ़रत की बातों को या ऐसी बातों से, जो सही होने के नाम पर आपके भीतर नफरत पैदा करें, दूर रहें. हमेशा जीवन और लोकतंत्र को तर्क से देखते रहिए. बाकी आप क्या करते हैं. मेरे लिए खास महत्व नहीं रखता.

सवाल

क्या आपको नहीं लगता, सरकार जो अर्थव्यवस्था दिखा रही है, वह वास्तविक अर्थव्यवस्था से बिल्कुल भिन्न है...? भारत की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए रघुराम राजन जैसे व्यक्तियों को वित्त मंत्रालय दे दिया जाना चाहिए, या उन्हें कोई अहम जिम्मेदारी दी जानी चाहिए...?

संजय झा
जवाब

@संजय झा , बिल्कुल. भारत की जो अर्थव्यवस्था दिखाई जाती है, वह वास्तविकता से अलग है. एक समझ साफ होनी चाहिए. राजनीति से उसे ही आना चाहिए, जो राजनीतिक प्रक्रिया से गुज़रा हो. यह प्रक्रिया है जनता के बीच काम करते हुए हार और जीत की. रघुराम राजन जैसे लोग भी महत्वपूर्ण होते हैं, मगर सिर्फ इसी आधार पर उन्हें राजनीति का विकल्प नहीं बनाया जा सकता. अगर वह विकल्प बनना चाहते हैं, तो उनका राजनीति में स्वागत है.

12345»

Advertisement