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आपके सवाल, रवीश के जवाब

प्राइम टाइम एंकर, तीन बार रामनाथ गोयनका पुरस्कार से सम्मानित, 20 साल की पत्रकारिता, ब्लॉगर, फेसबुक पेज @RavishKaPage, ट्विटर @ravishndtv, लेखक - The Free Voice, इश्क़ में शहर होना, हिन्दी मेरी जान, भोजपुरी मेरा ईमान.

सवाल

एक इंसान के रूप में आप खुद को आस्तिक, नास्तिक या तर्कशास्त्री, क्या पाते हैं...?

रविन्द्र
जवाब

@रविन्द्र , मैंने खुद को कभी परिभाषित नहीं किया. मुझे दूसरों को ही देखने से फुर्सत नहीं होती. आप कुछ भी रहें, मोहब्बत से रहें. नफ़रत की बातों को या ऐसी बातों से, जो सही होने के नाम पर आपके भीतर नफरत पैदा करें, दूर रहें. हमेशा जीवन और लोकतंत्र को तर्क से देखते रहिए. बाकी आप क्या करते हैं. मेरे लिए खास महत्व नहीं रखता.

सवाल

क्या आपको नहीं लगता, सरकार जो अर्थव्यवस्था दिखा रही है, वह वास्तविक अर्थव्यवस्था से बिल्कुल भिन्न है...? भारत की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए रघुराम राजन जैसे व्यक्तियों को वित्त मंत्रालय दे दिया जाना चाहिए, या उन्हें कोई अहम जिम्मेदारी दी जानी चाहिए...?

संजय झा
जवाब

@संजय झा , बिल्कुल. भारत की जो अर्थव्यवस्था दिखाई जाती है, वह वास्तविकता से अलग है. एक समझ साफ होनी चाहिए. राजनीति से उसे ही आना चाहिए, जो राजनीतिक प्रक्रिया से गुज़रा हो. यह प्रक्रिया है जनता के बीच काम करते हुए हार और जीत की. रघुराम राजन जैसे लोग भी महत्वपूर्ण होते हैं, मगर सिर्फ इसी आधार पर उन्हें राजनीति का विकल्प नहीं बनाया जा सकता. अगर वह विकल्प बनना चाहते हैं, तो उनका राजनीति में स्वागत है.

सवाल

क्या आपको नहीं लगता, मीडिया भी नेताओं जैसा बन गया है...?

Ravi Kumar
जवाब

@Ravi Kumar , भारत का TV मीडिया बर्बाद हो चुका है, इसमें अब खास कंटेंट नहीं बचा है. आप खुद भी देखें कि आप TV में क्या देख रहे हैं. क्या इससे आपकी समझ बढ़ रही है...? आपको जवाब मिलता चला जाएगा. ज़रा हिन्दी अखबारों की तरफ भी ध्यान दें. ज्यादातर हिन्दी अखबार की ख़बरें रद्दी होती जा रही हैं.

सवाल

भ्रष्टाचार को कौन बढ़ावा देता है - राजनेता या आम जनता...?

Ravi Kumar
जवाब

@Ravi Kumar , भ्रष्टाचार को कौन बढ़ावा देता है, इसका वस्तुनिष्ठ उत्तर नहीं दिया जा सकता. यानी अ, ब, स और ग में किसी एक को नहीं चुना जा सकता. हमारे यहां भ्रष्टाचार राजनीतिक है, मगर उसे सामाजिक मान्यता हासिल है. समाज में अनैतिकता के कई दरवाज़े हैं, जो राजनीति के ज़रिये होने वाले भ्रष्टाचार में सहभागी होते हैं, लाभ प्राप्त करते हैं और संरक्षण देते हैं.

सवाल

क्या हमारे नेताओं ने हमें वोटर की जगह उस लाश जैसा समझ लिया है, जिस पर वे अपनी प्रैक्टिस कर रहे हैं. अगर हां, तो वोट देने वाला व्यक्ति क्या करे?

Mohit jha
जवाब

@Mohit jha , मोहित जी, जनता फिर क्यों लाश बनी हुई है ? अगर नेता लाश समझते हैं तो। जनता सतर्क रहेगी और सही प्रश्न करेगी तो नौटंकीबाज़ नेताओं को समझ आ जाएगा.

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