MOVIE REVIEW: 'करीब-करीब सिंगल' के सफर की कहानी है मजेदार

फिल्म 'करीब-करीब सिंगल' की कहानी एक 35 साल की उम्र की विधवा महिला जया (पार्वती) और 40 साल की उम्र के कवि योगी (इरफान खान) के इर्द गिर्द घूमती है.

MOVIE REVIEW: 'करीब-करीब सिंगल' के सफर की कहानी है मजेदार

नई दिल्ली:

फिल्म 'करीब-करीब सिंगल' की कहानी एक 35 साल की उम्र की विधवा महिला जया (पार्वती) और 40 साल की उम्र के कवि योगी (इरफान खान) के इर्द गिर्द घूमती है. जया और योगी की मुलाकात एक डेटिंग साइट पर होती है उसके बाद ये एक कॉफी शॉप पर मिलते हैं. योगी अपनी 3 पुरानी गर्लफ्रेंड से मिलाने जया को लेकर सफर पर निकलता है जो देश के अलग अलग शहरों में रहती हैं. 

यह भी पढे़ं: ‘करीब करीब सिंगल’ में मस्तमौला इरफान खान के ये बिंदास डायलॉग बना देंगे आपको उनका फैन

वैसे इस फिल्म में 2 लोगों के सफर पर निकलने के सिवाय कहानी कुछ भी नहीं है, लेकिन फिल्म का विषय काफी अच्छा है. जहां एक 40 साल के योगी और 35 साल की महिला डेटिंग ट्रिप पर निकलते हैं. इरफान खान का बेबाक किरदार बेहतरीन है जो कभी कुछ भी बोल देता है जिसे देखने और सुनने में काफी अच्छा लगता है और हंसी आती है. फिल्म करीब करीब सिंगल की कहानी और डॉयलॉग्स काफी अच्छे हैं. इंटरवेल तक इस फिल्म की कहानी काफी मजेदार है. फिल्म में योगी का किरदार निभा रहे इरफान और जया का किरदार निभा रहीं एक्ट्रेस पार्वती की केमिस्ट्री अच्छी लगी है. अपने बेबाक अंदाज़ में इरफान की एक्टिंग काफी एंटरटेनिंग है.

यह भी पढ़ें: क्या अपनी एक्स-गर्लफ्रेंड से जयपुर में मिलेंगे इरफान खान?

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

लेकिन फिल्म का दूसरा भाग कमजोर पड़ गया. जहां इंटरवल के पहले स्टोरी में लोगों को बांधी हुई थी, वही दूसरे भाग में ऐसा लगने लगा की कहानी आगे ही नहीं बढ़ रही है. हालांकि दूसरा भाग भी बहुत बोर नहीं करता मगर क्लाइमेक्स तक पहुंचते पहुंचते फिल्म कमज़ोर लगने लगती है. आखिर में ऐसा लगता है की निर्देशक के पास कहने या दिखाने को कुछ भी नहीं बचा. आप इस फिल्म को एक बार देख सकते हैं क्योंकि फिल्म का विषय अच्छा है और सफर पर निकले इरफान और पार्वती की नोकझोंक और गलतियां हंसाती हैं. 

रेटिंगः 3 स्टार
डायरेक्टरः तनुजा चंद्रा
कलाकारः इरफान खान और पार्वती