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Omerta Movie Review: आतंकी दिमाग में झांकने की कोशिश है ‘Omerta’, राजकुमार राव फिर से बेमिसाल

Omerta (ओमर्टा) के जरिये राजकुमार राव और हंसल मेहता का डेडली कॉम्बिनेशन एक बार फिर दर्शकों के सामने है. यही वही जोड़ी है जिसने ‘सिटीलाइट्स’, ‘शाहिद’ और ‘अलीगढ़’ जैसी असल जिंदगी की हकीकत दिखाती फिल्में दी हैं.

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Omerta Movie Review: आतंकी दिमाग में झांकने की कोशिश है ‘Omerta’, राजकुमार राव फिर से बेमिसाल

ओमर्टा मूवी रिव्यूः राजकुमार राव की शानदार एक्टिंग

खास बातें

  1. राजुकमार राव हैं लीड एक्टर
  2. हंसल मेहता हैं फिल्म के डायरेक्टर
  3. आतंकी के दिमाग को बताती है फिल्म
नई दिल्ली: Omerta (ओमर्टा) के जरिये राजकुमार राव और हंसल मेहता का डेडली कॉम्बिनेशन एक बार फिर दर्शकों के सामने है. यही वही जोड़ी है जिसने ‘सिटीलाइट्स’, ‘शाहिद’ और ‘अलीगढ़’ जैसी असल जिंदगी की हकीकत दिखाती फिल्में दी हैं. हंसल की खासियत रही है कि वे सोचने पर मजबूर कर देने वाली फिल्में बनाते हैं और उनमें जिंदगी की कड़वी हकीकत होती है. इन फिल्मों के असल जिंदगी के किरदारों को जिंदा करने का काम राजकुमार राव करते हैं. ऐसा ही कुछ ‘Omerta (ओमर्टा)’ में भी हैं. फिल्म ओमार सईद शेख की कहानी है, एक ऐसा आतंकी जिसने पूरी दुनिया को अपनी खौफनाक हरकतों से दहला दिया है. फिल्म अच्छी है लेकिन डॉक्यु-ड्रामा जैसी लगती है. ‘ओमर्टा’ किसी आंतकी या उसकी हरकतों को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बताती है बल्कि आतंकियों के अंदर क्या चलता है उसे बताने की कोशिश है. बता दें कि ‘ओमर्टा’ इटैलियन शब्द है, जो अपराधियों और माफिया में एक-दूसरे के प्रति वफादार रहने की कसम होती है.

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‘Omerta (ओमर्टा)’ की कहानी खतरनाक आतंकवादी ओमार शेख सईद की है. कहानी 2002 में ब्रिटिश पत्रकार डेनियल पर्ल की बेरहमी से हत्या, 1994 में कश्मीर में विदेशी पर्यटकों के अपहरण जैसी घटनाओं के ईर्द-गिर्द घूमती है. ओमार उन तीन आतंकियों में शामिल था जिन्हें 1999 में अपहृत विमान को छोड़ने की एवज में रिहा करने के लिए कहा गया था. किस तरह वह घटनाओं को अंजाम देता है, किस तरह शांत दिखने वाला हाईली एजुकेटेड युवा आतंकवाद को चुनता है. उसके मन में क्या चलता है और किस तरह वह प्लानिंग करता है, और उन्हें अंजाम देता है. पाकिस्तान की आतंक को हवा देने में भूमिका, जैसी बातें सामने आती हैं, और किसी रिपोर्ताज की तरह लगती है. फिल्म डॉक्युमेंट्री जैसा एहसास देती है, और इसमें कुछ भी ऐसा नहीं है जो बहुत नया हो.

एक्टिंग के मोर्चे पर तो राजकुमार राव कमाल हैं. हंसल मेहता का साथ मिलते ही उनकी एक्टिंग निखरकर सामने आती है. ऐसा ही कुछ इस बार भी हुआ है. इस डार्क कैरेक्टर को उन्होंने शानदार ढंग से निभाया है. लेकिन जिस आसानी से वे किरदार में उतर जाते हैं, वह वाकई कमाल है. फिल्म के बाकी सभी साथी कलाकार ठीक-ठाक हैं लेकिन राजकुमार राव शानदार है.

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‘ओमर्टा’ कई पुरस्कार समारोहों में अपना डंका बजा चुकी है. लेकिन एक खास तरह के ऑडियंस को टारगेट करती है. फिर इसके तेवर भी कुछ-कुछ डॉक्युमेंट्री जैसे हैं. लेकिन कैरेक्टराइजेशन के साथ ही फिल्म की कम अवधि इसकी यूएसपी हैं. आतंकी के दिमाग को समझने के लिए यह एक अच्छी कोशिश है. 

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रेटिंगः 3.5 स्टार
डायरेक्टरः हंसल मेहता
कलाकारः राजकुमार राव, टिमोथी रेयान, केवल अरोड़ा और राजेश तैंलंग

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