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मूवी रिव्यू

  • Movie Review: नए पैकेट में पुराना माल है वरुण धवन की जुड़वां-2
    इस फिल्‍म की कहानी वही पुरानी ‘जुड़वां’ वाली है. प्रेम और राजा (वरुण धवन) दो भाई हैं और वे दोनों एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं. लेकिन फिर भी वे एक-दूसरे से जुड़े हैं. एक टपोरी टाइप का है जबकि दूसरा डिसेंट. एक कमजोर है दूसरा ताकतवर. इसी बीच में ग्लैमरस का छौंक लगाने के लिए एंट्री होती है तापसी और जैक्लिन की.
  • Movie Review: चाह कर भी श्रद्धा कपूर नहीं बन पायी असली  ‘हसीना पारकर’!
    दाऊद के भाई की गिरफ़्तारी के बाद उसकी बहन हसीना पारकर की ज़िंदगी पर बनी फ़िल्म 'हसीना द क्वीन ऑफ़ मुंबई' रिलीज़ हो गई है.
  • Movie Review: जेब पर डाका डालेगी ‘हसीना पारकर’!
    हसीना पारकर के डायरेक्टर अपूर्वा लाखिया ने 2003 में फिल्में बनानी शुरू की थीं लेकिन अभी तक वे सिर्फ एक ही हिट फिल्म दे सके हैं और वह ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’. ‘हसीना पारकर’ अपूर्वा की सातवीं फिल्म है, और यह फिल्म भी बुरी तरह से निराश करती है.
  • Movie Review: ‘भूमि’की घिसीपिटी कहानी में दमदार हैं संजय दत्त
    फ़िल्म 'भूमि' की कहानी है एक बाप और बेटी की जो अपनी ज़िंदगी में खुश हैं. संजय दत्त की बेटी भूमि यानी अदिति राव हैदरी की शादी होने वाली है मगर शादी से ठीक पहले भूमी के एक पुराने आशिक़ ने, जो एकतरफा प्यार करता था, अपने साथियों के साथ मिलकर उसका बलात्‍कार करता है
  • Movie Review: सॉलिड संजू बाबा लेकिन कमज़ोर ‘भूमि’
    भूमि संजय दत्त की कमबैक फ़िल्म है और संजय से जैसी उम्मीद थी उन्होंने वैसा ही काम किया. संजय दत्त को बड़े परदे पर देखना आज भी किसी ट्रीट से कम नहीं है.
  • Movie Review: ये 5 बातें बनाती हैं Newton को मस्ट वॉच फिल्‍म
    राजकुमार राव तेजी के साथ अपने पीढ़ी के कलाकारों को पीछे छोड़ते जा रहे हैं. हर फिल्म के साथ वे एक्टिंग की कुछ पायदानों की छलांग लगा जाते हैं. कुछ दिन पहले ही उनकी ‘बरेली की बर्फी’ आई थी, और फिल्म हिट रही थी. इसमें सबसे सशक्त कैरेक्टर राजकुमार राव का ही था और उनकी काफी तारीफ भी हुई थी.
  • Movie Review: रहस्यों से भरी है 'द फाइनल एग्जिट'
    फिल्म 'द फाइनल एग्जिट' की कहानी है एक फोटोग्राफर की जो हैलुसिनेशन का शिकार हो जाता है और ऐसी-ऐसी चीजें देखने लगता है जो असल में कुछ है ही नहीं
  • Movie Review: फरहान अख्तर की औसत फिल्म है ‘लखनऊ सेंट्रल’
    बॉलीवुड की यह खासियत बन चुकी है कि उसे अच्छे-खासे विषय का बंटाधार करना आता है. 'लखनऊ सेंट्रल' भी इसी की मिसाल है. फरहान अख्तर की बतौर एक्टर कुछ सीमाएं हैं और लखनऊ सेंट्रल के इस किरदार में वे सीमाएं नजर आ जाती हैं.
  • Movie Review: धमाकेदार कंगना रनोट, कमजोर ‘सिमरन’
    कंगना रनोट ‘सिमरन’ के रिलीज होने से काफी पहले से ही सुर्खियों में थीं. वजह कंगना रनोट की फिल्‍म 'सिमरन' नहीं बल्कि ऋतिक रोशन के साथ उनका अफेयर और आदित्य पंचोली के साथ उनका विवाद रहा. कंगना रनोट हर मामले पर बड़ी बेबाकी से बात कर रही थीं, लेकिन इस सब के चक्कर में उनकी फिल्म कहीं पीछे छूट गई थी.
  • Movie Review: बिना मसाले वाली ठंडी फिल्‍म है 'लखनऊ सेंट्रल'
    आज बॉक्‍स ऑफिस पर दो बड़ी फिल्‍में बॉक्‍स ऑफिस पर टकरा रही हैं. एक है हंसल मेहता की 'सिमरन' और दूसरी है निर्देशक रंजीत तिवारी की 'लखनऊ सेंट्रेल'. 'लखनऊ सेंट्रल' किशन गिरहोत्रा (फरहान अख्तर) की कहानी है, जो उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर मुरादाबाद का रहने वाला है.
  • Movie Review: 'डैडी' के डैडी अर्जुन रामपाल तो अच्‍छे हैं, पर ठंडी है फिल्‍म
    शुक्रवार को रिलीज हुई फिल्‍म 'डैडी' कहानी है गैंगस्टर से एक राजनीजिज्ञ बनने वाले अरुण गवली की. इसमें अरुण गवली (अर्जुन रामपाल) की 1976 से 2012 तक की जिंदगी को समेटने की कोशिश की गयी है, फिल्‍म में दिखाया गया है की कैसे एक गरीब मिल मजदूर का बेटा गरीबी के चलते अपराध जगत की राह पकड़ लेता है और फिर उस दौर के भाई से भिड़ जाता है, जिसका राज पूरी मुंबई पर था
  • Movie Review: कॉमेडी और मैसेज का कॉकटेल है सनी देओल की Poster Boys
    बॉलीवुड में देसी और दिल के करीब लगने वाली कहानियों का दौर है. सनी देओल, बॉबी देओल और श्रेयस तलपडे की Poster Boys ऐसी ही फिल्म है
  • Movie Review: रूटीन गैंगस्टर मूवी है अर्जुन रामपाल की Daddy
    डैडी अरुण गवली की ज़िंदगी पर बनी फ़िल्म है. फ़िल्म में अरुण गवली की ज़िंदगी को कई किरदारों के माध्यम से दिखाया गया है. फ़िल्म पूरी तरह से एक गैंगस्टर मूवी है. फ़िल्म की कहानी कुछ भी एक्सेप्शनल नहीं है. 1976 से फ़िल्म की शुरुआत होती है और 2012 तक जाती है. डैडी में एक गैंगस्टर के रॉबिनहुड बनने तक की कहानी है. डैडी कुल मिलाकर एक रूटीन गैंगस्टर मूवी है जिसमें कुछ भी याद रखने लायक नहीं है.
  • Movie Review: मुसलमान, राजनीति, एटीएस और बम धमाकों का सच है जीशान अयूब की 'समीर'
    आज जब अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर सवाल उठ रहे हैं, ऐसे में 'समीर' जैसी फिल्म का आना अच्छी बात है. फिल्म कई तरह के सवाल उठाती है जो आज के दौर में पूरी तरह से प्रासंगिक हैं.
  • Movie Review: मसाला फिल्‍म के गुणो से भरपूर सुस्‍त कहानी है 'बादशाहो'
    'बादशाहो' कहानी है 1975 में लगी इमरजेंसी के वक्‍त की, जहां सरकार को पता चलता है की महारानी गीतांजलि के पास एक खजाना है.
  • Movie Review: हंसाते-हंसाते सब कुछ कह जाएगी   ' शुभ मंगल सावधान '
    फिल्‍म 'शुभ मंगल सावधान' कहानी है मुदित( आयुष्मान) और सुगन्धा (भूमि पेडणेकर) के प्रेम की और ये दोनों शादी भी करना चाहते हैं. यहां तक तो सब ठीक है लेकिन फिर इन दोनों के शादीशुदा जीवन की शुरुआत से पहले आड़े आती है एक चिंता कि कहीं आयुष्‍मान शादी में अपने कर्तव्य पूरी तरह निभा पायेगे या नहीं.
  • Movie Review: एक्शन से भरपूर है ' Baadshaho', पर नया कुछ भी नहीं है...
    मिलन लूथरिया और अजय देवगन की जोड़ी जब भी साथ आती है, तो दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब रही है. फिर वह चाहे ‘कच्चे धागे’ हो या फिर ‘वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई'.
  • Movie Review: फुली एंटरटेनर है 'शुभ मंगल सावधान...'
    बॉलीवुड में इस समय देसी कहानियों का दौर चल रहा है. हर हफ्ते एक न एक ऐसी फिल्म आ रही है जो देसीपन के रंग में रंगी हैं और हमें असली भारत के करीब लेकर आती है. यह सफर अक्षय कुमार की ‘टॉयलेटः एक प्रेम कथा’से होते हुए 'बरेली की बर्फी', ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज' से होता हुआ इस हफ्ते रिलीज हुई ‘शुभ मंगल सावधान’ तक आ गया है.
  • Movie Review: मसाला तो सारा है पर फिर भी फीका है यह 'जेंटलमैन'
    फिल्‍म 'ए जेंटलमैन' की कहानी घूमती है गौरव, ऋषि और काव्या के इर्द गिर्द जो कभी मायामी, कभी मुम्बई और कभी गोआ में बसती है.
  • Movie Review: रिस्की है सुंदर सुशील ‘A Gentleman’
    बेहतरीन लोकेशन, हसीन चेहरे, सिक्स पैक एब्स, ढेर सारा एक्शन और फिल्म पर ढेर सारा पैसा खर्च करना... कभी-कभी यह सब मिलकर भी एक अच्छे प्रोडक्ट की गारंटी नहीं दे पाते और कुछ ऐसा ही हुआ है सिद्धार्थ मल्होत्रा और जैकलीन फर्नांडिस की फिल्‍म ‘ए जेंटलमैनः सुंदर सुशील रिस्की’ के साथ.
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