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Pataakha Movie Review: फुस्स निकली 'पटाखा', देसी अंदाज में दिखीं दो बहनें तो नारद बने सुनील ग्रोवर

अक्सर उपन्यासों पर फ़िल्म बनाने वाले फिल्मकार विशाल भारद्वाज ने इस बार चरण सिंह पथिक की शार्ट स्टोरी दो बहनों को चुना और उस पर आधारित फिल्म बनाई पटाखा.

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Pataakha Movie Review: फुस्स निकली 'पटाखा', देसी अंदाज में दिखीं दो बहनें तो नारद बने सुनील ग्रोवर

पटाखा फिल्म में दो बहनें का रोल करने वाली एक्ट्रेस सान्या मल्होत्रा और राधिका मदान

नई दिल्ली: अक्सर उपन्यासों पर फ़िल्म बनाने वाले फिल्मकार विशाल भारद्वाज ने इस बार चरण सिंह पथिक की शार्ट स्टोरी दो बहनों को चुना और उस पर आधारित फिल्म बनाई पटाखा. इस फ़िल्म की कहानी है 2 बहनों बड़की और छुटकी की, जो एक दूसरे की बड़ी दुश्मन हैं और बात-बात पर बुरी तरह लड़ती हैं और खूब मारपीट करती हैं. इनके पिता इनसे बेहद प्यार करते हैं मगर इनकी लड़ाइयों से परेशान हैं. कुछ समय बाद इनकी शादी का निर्णय लिया जाता है मगर ये दोनों बहनें अपने अपने प्रेमियों के साथ भाग जाती हैं. उसके बाद क्या होता है.. इसके लिए आप फ़िल्म देखेंगे तो समझ आएगा कि नसीब इन्हें फिर किस तरह एक दूसरे के सामने खड़ा कर देता है. बड़की के रोल में राधिका मदान, छुटकी की भूमिका में सान्या मल्होत्रा और इनके पिता के किरदार में विजय राज़ हैं. फ़िल्म में सुनील ग्रोवर की भूमिका दिलचस्प है जो कभी नारद मुनि की तरह इन्हें लड़ता है तो कभी इन्हें दिशा दिखाता है.

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अपने देसी अंदाज़ की फिल्में बनाने की पहचान रखने वाले विशाल भारद्वाज की ये फ़िल्म भी पूरी तरह देसी है. राजस्थान में कहानी बसी है और फ़िल्म देखते समय लगता है कि हम एक गांव और उसके किरदार देख रहे हैं. फिल्म में कुछ दृश्य हंसाते हैं जिसके संवाद अच्छे हैं. पिता और बेटियों के प्यार को अच्छे से दर्शाया गया है. सानिया मल्होत्रा और राधिका मदान ने अपनी अपनी भूमिकाओं को अच्छे से निभाया है और उनकी मेहनत परदे पर दिखती है. सुनील ग्रोवर अपने किरदार में ज़बरदस्त हैं और विजय राज़ ने पिता कि भूमिका में जान डाली है.

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लेकिन फिल्म देखते समय ऐसा लगा कि हम दो बहनों के झगड़ों के बीच एक लम्बी और खींची हुई कहानी देख रहे हैं यानी फिल्म कि पटकथा थोड़ी कमज़ोर पड़ गई. इंटरवल के बाद खास तौर से फिल्म लम्बी और धीमी पड़ गई. फिल्म कई हिस्सों में थोड़ी लाऊड भी लगती है जो शायद बहुत सारे दर्शकों को पसंद न आए. फिल्म पटाखा में मनोरंजन की भी कमी लगती है. मुझे लगता है कि इस फिल्म से शायद बड़े शहर के दर्शक कनेक्ट नहीं कर पाएंगे. बहुत अच्छे संगीतकार होने के बावजूद भी विशाल ने इस फिल्म में कोई अच्छा गाना नहीं दिया है. 

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अगर आप विशाल भरद्वाज या उनके सिनेमा के फैन हैं तो पटाखा को एक बार देख सकते हैं क्योंकि इस फिल्म में भी देसी अंदाज़ नज़र आएगा. फिल्म पटाखा के लिए मेरी रेटिंग है 2.5 स्टार्स

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