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चंद्रबाबू नायडू का पलटवार, कहा - अमित शाह का खत ‘झूठ का पुलिंदा

चंद्रबाबू नायडू ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा राजग से तेलुगू देशम पार्टी के अलग होने का ठीकरा उनके सिर फोड़े जाने पर उनकी आलोचना की और कहा कि यह फैसला पूरी तरह से राज्य के हित में लिया गया.

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चंद्रबाबू नायडू का पलटवार, कहा - अमित शाह का खत ‘झूठ का पुलिंदा

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. 'खत में आंध्र से जुड़े मुद्दों के समाधान के बारे में कोई बात नहीं'
  2. खत में इस्‍तेमाल भाषा ‘एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष जैसी नहीं है’
  3. तेदेपा अध्यक्ष ने कहा, ‘क्या इस खत में कोई गरिमा है?
अमरावती: एनडीए से अलग होने के बाद बीजेपी और तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के बीच आलोचनाओं का दौर जारी है. शनिवार को ही बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह ने टीडीपी प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्‍यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को चिट्ठी लिखकर उनके इस फैसले को एकतरफा और राजनीति से प्रेरित बताया था. अब नायडू ने भी पलटवार करते हुए शाह की चिट्ठी को झूठ का पुलिंदा बताया है. चंद्रबाबू नायडू ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा राजग से तेलुगू देशम पार्टी के अलग होने का ठीकरा उनके सिर फोड़े जाने पर उनकी आलोचना की और कहा कि यह फैसला पूरी तरह से राज्य के हित में लिया गया और इसके पीछे कोई ‘राजनीतिक सोच’ नहीं थी. इस संबंध में शाह के आरोपों को खारिज करते हुये नायडू ने भाजपा अध्यक्ष द्वारा उन्हें लिखे गये नौ पन्नों के खत को ‘झूठ का पुलिंदा’ बताया.

यह खत 16 मार्च को नायडू द्वारा भेजे गए उस खत का जवाब है जिसमें उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए से टीडीपी के अलग होने के कारण विस्तार से बताये थे. आंध्र प्रदेश विधानसभा में मुद्दा उठाते हुये नायडू ने कहा, ‘‘शाह ने जो लिखा है वह झूठ का पुलिंदा और अधूरा सच है. यह न सिर्फ अपमानजनक बल्कि आंध्र प्रदेश के लोगों को भड़काने वाला है. इसमें कोई गरिमा नहीं है.’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि खत में इस्तेमाल की गई भाषा ‘एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष जैसी नहीं है.’’ तेदेपा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘क्या इसमें कोई गरिमा है? खत विसंगतियों और गलतियों से भरा है. इसमें मेरी गलतियां तलाशने के अलावा आंध्र प्रदेश से जुड़े मुद्दों के समाधान के बारे में कोई बात नहीं है.’’ उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार से पूछा कि क्या उसमें आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 को लागू किये जाने की समीक्षा करने और संसद के समक्ष तथ्यों को रखने की हिम्मत है.

नायडू ने यह भी पूछा कि जब नरेंद्र मोदी 10-12 साल मुख्यमंत्री थे तो क्या गुजरात सरकार ने केंद्रीय योजनाओं के लिये तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी की तस्वीरों का इस्तेमाल किया था? केंद्र सरकार की योजनाओं का श्रेय राज्य सरकार द्वारा केंद्र को नहीं दिये जाने को लेकर की जा रही आलोचना के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘‘क्या उनमें यह कहने की हिम्मत है? क्या वह ऐसी तस्वीरें दिखा सकते हैं.’’

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VIDEO: NDA से अलग हुई चंद्रबाबू नायडू की पार्टी TDP

(इनपुट भाषा से...)


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