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केंद्र सरकार ने ठुकराई कर्नाटक की अलग ध्वज की मांग, कहा - संविधान में है 'एक देश, एक झंडा' का सिद्धांत

केंद्र सरकार ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री एस सिद्धारमैया की पृथक राज्य ध्वज की मांग को खारिज कर दिया.

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केंद्र सरकार ने ठुकराई कर्नाटक की अलग ध्वज की मांग, कहा - संविधान में है 'एक देश, एक झंडा' का सिद्धांत

कर्नाटक सरकार ने 9 सदस्यों की एक कमेटी बनाई है, जिसे झंडा डिज़ाइन करने का ज़िम्मा दिया गया है...

खास बातें

  1. कर्नाटक सरकार ने राज्य की खातिर एक अलग झंडे की कवायद शुरू की
  2. भाजपा समेत विपक्षी पार्टियों ने विरोध किया, सिद्धारमैया ने बचाव किया
  3. कर्नाटक सरकार ने झंडे का डिजाइन तय करने के लिए समिति का गठन किया
नई दिल्ली:

केंद्र सरकार ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री एस सिद्धारमैया की पृथक राज्य ध्वज की मांग को खारिज करते हुए कहा कि संविधान में राज्यों के अलग झंडे का कोई प्रावधान नहीं है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संविधान में 'एक देश एक झंडा' के सिद्धांत के आधार पर स्पष्ट किया है कि तिरंगा ही पूरे देश का ध्वज है.

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा कि हम एक देश हैं हमारा एक झंडा है. उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है जो राज्यों के लिये अलग झंडे की अनुमित देता हो या ऐसा करने को प्रतिबंधित करता हो. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि कर्नाटक का अपना एक झंडा है जो जनता का प्रतिनिधित्व करता है सरकार का नही. राज्य में तमाम बड़े जनआयोजनों में इस झंडे का इस्तेमाल किया जाता है. इस झंडे को स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस या अन्य सरकारी कार्यक्रमों में सरकार द्वारा नहीं फहराया जा सकता है.

आज यह विवाद कर्नाटक सरकार द्वारा राज्य के लिये अलग झंडा इस्तेमाल किये जाने की पहल से शुरू हुआ. विपक्षी दलों द्वारा सरकार की इस पहल का विरोध करने पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सरकार की पहल का बचाव भी किया. गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि कर्नाटक में दो झंडों के इस्तेमाल को कुछ लोगों ने अदालत में भी चुनौती दी है और इस पर अभी फैसला आना बाकी है. कांग्रेस की अगुवाई वाली कर्नाटक सरकार ने राज्य ध्वज का डिजाइन तय करने के लिये आठ सदस्यीय समिति का गठन किया है.


कर्नाटक के स्थापना दिवस के अवसर पर हर साल एक नवंबर को राज्य के कोने-कोने में अभी जो झंडा फहराया जाता है, वह मोटे तौर पर लाल एवं पीले रंग का 'कन्नड़ झंडा' है. इस झंडे का डिजाइन 1960 के दशक में वीरा सेनानी एम ए रामामूर्ति ने तैयार किया था. सिद्धारमैया सरकार की ओर से समिति के गठन का कदम पिछली भाजपा सरकार के रूख से अलग है.

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अपने कदम का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "क्या संविधान में ऐसा कोई प्रावधान है ? क्या आपने संविधान में ऐसा कोई प्रावधान देखा है ? क्या भाजपा के लोगों को ऐसे किसी प्रावधान के बारे में पता है ? तो वे यह मुद्दा क्यों उठा रहे हैं?" साल 2018 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह कदम उठाने के बाबत उन्होंने कहा, "चुनाव अप्रैल-मई के महीने में होंगे, अभी नहीं, कल नहीं, न ही अगले महीने." भाजपा पर निशाना साधते हुए सिद्धारमैया ने कहा, "क्या भाजपा के लोगों ने कहा कि वे कर्नाटक राज्य के लिए अलग झंडा नहीं चाहते? उन्हें बयान जारी करने दें कि 'हम कर्नाटक राज्य के लिए झंडा नहीं चाहते'." केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि वह सिर्फ राष्ट्रीय ध्वज के बारे में जानते हैं और राज्य के लिए अलग झंडे की कर्नाटक सरकार की योजना को समझ नहीं पा रहे हैं.
(इनपुट भाषा से)
 



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