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हैदराबादः 5700 करोड़ के फ्रॉड में फंसे CM चंद्रबाबू नायडू के करीबी सांसद के ठिकानों पर छापा, फरारी, रेंज रोवर, मर्सिडीज जैसी कारें जब्त

प्रवर्तन निदेशालय(ED) ने TDP सांसद वाइएस चौधरी की कंपनियों के ठिकानों पर 5700 करोड़ रूपये के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में छापामारी की है.

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हैदराबादः 5700 करोड़ के फ्रॉड में फंसे CM चंद्रबाबू नायडू के करीबी सांसद के ठिकानों पर छापा, फरारी, रेंज रोवर, मर्सिडीज जैसी कारें जब्त

प्रवर्तन निदेशालय का लोगो.

नई दिल्ली:

प्रवर्तन निदेशालय(ED) ने टीडीपी मुखिया और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के करीबी  सांसद वाइएस चौधरी की कंपनियों के ठिकानों पर छापेमारी की है. इस दौरान  फरारी, रेंज रोवर और मर्सिडीज बेंज सहित छह महंगी कारें जब्त की हैं. यह कार्रवाई 5700 करोड़ रूपये के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में हुई. सांसद को पूछताछ के लिए अगले सप्ताह तलब किया है. यह जानकारी अधिकारियों ने शनिवार को दी. 120 से अधिक कंपनियों को चलाने के पीछे सांसद का हाथ मिला. इसमें ज्यादातर कंपनियां कागज पर चलतीं मिलीं.  एजेंसी ने कहा कि उसने यह कार्रवाई सुजाना ग्रुप के हैदराबाद और दिल्ली स्थित आठ परिसरों में शुक्रवार को छापेमारी के बाद धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत की.प्रवर्तन निदेशालय के छापों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुजाना ग्रुप ऑफ कंपनीज ने एक बयान में कहा, ‘‘हमनें उनके द्वारा मांगी गई सभी जानकारियां साझा की हैं. कारोबार कानूनी तरीके से हो रहा है और हम उन खबरों की निंदा करते हैं जिनमें कहा गया है कि कुछ निदेशकों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है.''निदेशालय ने कहा कि तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के वर्तमान राज्यसभा सदस्य चौधरी वह व्यक्ति हैं जो सुजाना समूह की कंपनियों के पीछे हैं और उसने इस बारे में साक्ष्य एकत्रित किये हैं कि ‘‘सुजाना समूह की विभिन्न कंपनियों के सभी निदेशक उनके निर्देशन में कार्य करते हैं.'

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'एजेंसी ने कहा कि जो महंगी कारें जब्त की गई हैं वे छद्म कंपनियों के नाम से पंजीकृत हैं.तेदेपा सांसद को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं पार्टी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू का नजदीकी माना जाता है. चौधरी को 27 नवम्बर को मामले में पूछताछ के लिए तलब किया गया है.    नायडू के इस वर्ष के शुरू में राजग छोड़ने से पहले चौधरी केंद्रीय कैबिनेट में राज्य मंत्री थे. निदेशालय ने कहा कि उसने चेन्नई स्थित कंपनी मेसर्स बेस्ट एंड क्राम्प्टन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (बीसीईपीएल) के बैंक धोखाधड़ी मामले के सिलसिले में कंपनी (सुजाना समूह) में छापेमारी की. उसने कहा कि चेन्नई स्थित कंपनी के खिलाफ छापेमारी में सुजाना समूह से जुड़ी कथित मुखौटा कंपनियों से संबंधित दस्तावेज मिले हैं.    निदेशालय ने एक बयान में कहा, ‘‘जब्त दस्तावेजों या रिकार्ड से इसकी पुष्टि हुई कि बीसीईपीएल सुजाना समूह की अन्य कंपनियों के साथ वाई एस चौधरी की अध्यक्षता में कार्य कर रही थीं जो कि तेदेपा के वर्तमान राज्यसभा सदस्य हैं.''


 


इसमें कहा गया है, ‘‘जांच में इसका खुलासा हुआ कि सुजाना समूह की विभिन्न कंपनियों के सभी निदेशक चौधरी के निर्देशन में कार्य करते हैं जो कि बीसीईपीएल के निदेशकों के व्यापारिक/ आवासीय परिसरों से प्राप्त ईमेल पत्राचार और संचार से प्रमाणित होता है.''निदेशालय ने कहा कि इन आरोपों के प्रकाश में एजेंसी ने सुजाना समूह के आठ परिसरों पर शुक्रवार को छापे मारे जिससे ‘‘खुलासा हुआ कि समूह की कंपनियों द्वारा बैंकों से 5700 करोड़ रूपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई.''एजेंसी ने कहा कि दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि समूह 120 से अधिक कंपनियों का नियंत्रण कर रहा था और उनमें से अधिकतर चल नहीं रही थीं या उनका अस्तित्व केवल कागजों पर था. एजेंसी ने कहा कि प्रारंभिक बयानों से संकेत मिलता है कि समूह की कंपनियों को कुछ कर्ज चौधरी की निजी गारंटी पर मंजूर किये गए. (इनपुट-भाषा से)


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