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शशिकला से जेल में 'विशेष सलूक' होने का खुलासा करने वाली वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारी को सीएम सिद्धारमैया ने चेताया

सिद्धारमैया ने कहा कि डीआईजी (कारागार) डी रूपा वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अपने आरोपों के संबंध में अपने किसी भी वरिष्ठ से संपर्क कर सकती थीं.

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शशिकला से जेल में 'विशेष सलूक' होने का खुलासा करने वाली वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारी को सीएम सिद्धारमैया ने चेताया

डीआईजी (कारागार) डी रूपा की रिपोर्ट को लेकर बड़ा विवाद होने के बाद सरकार ने उनसे अपने आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देने को कहा. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. अधिकारी डी रूपा ने रिपोर्ट की जानकारी मीडिया को क्यों दी- राज्य सरकार
  2. डीआईजी (कारागार) डी रूपा अब भी अपनी बातों पर कायम हैं.
  3. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, 'यह एकदम नियमों के खिलाफ है'.
बेंगलुरू: अन्नाद्रमुक (अम्मा) नेता ​वीके शशिकला के साथ जेल में कथित तौर पर 'विशेष सलूक' किए जाने पर विवादास्पद रिपोर्ट देने वाली वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारी डी रूपा को राज्य सरकार ने नोटिस जारी किया है. साथ ही सरकार ने उनसे यह स्पष्ट करने को कहा है कि उन्‍होंने मीडिया को इसकी जानकारी क्यों दी. वहीं, अधिकारी डी रूपा अपनी बातों पर कायम हैं और उन्‍होंने कहा है कि उन्होंने किसी भी आचरण नियम का उल्लंघन नहीं किया.

डीआईजी (कारागार) डी रूपा की रिपोर्ट को लेकर बड़ा विवाद होने से शर्मसार सरकार ने उनसे अपने आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देने को कहा. 

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, 'यह एकदम नियमों के खिलाफ है'. सिद्धारमैया ने उप महानिरीक्षक (कारागार) डी रूपा के अपनी रिपोर्ट पर सार्वजनिक टिप्पणी करने को लेकर खुलेआम नाराजगी जताई. रूपा की रिपोर्ट ने उनके वरिष्ठ और अन्य कारागार अधिकारियों को रिश्वतखोरी के आरोपों के घेरे में ला दिया था.

सिद्धारमैया ने कहा कि वह वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अपने आरोपों के संबंध में अपने किसी भी वरिष्ठ से संपर्क कर सकती थीं. मुख्‍यमंत्री ने मैसुरू में मीडिया से कहा, 'मीडिया के साथ विवरण साझा करना उनकी तरफ से अनुचित है'. उन्होंने कहा कि मुख्यधारा और सोशल मीडिया पर आरोपों से पुलिस विभाग शर्मसार हुआ है. मुख्यमंत्री ने कहा कि रूपा से उन्हें दिए गए नोटिस का जवाब देने को कहा गया है. उन्होंने यह भी कहा कि डीजीपी (कारा) एचएन सत्यनारायण राव के खिलाफ रूपा ने जो आरोप लगाए हैं उनकी जांच के आदेश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि एक सेवानिवृत्त अधिकारी को रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच के लिये नियुक्त किया गया है.

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इस सब से बेपरवाह रूपा ने कहा, 'मैं अपनी रिपोर्ट पर कायम हूं. मैंने कहीं भी रिपोर्ट की सामग्री का ब्योरा नहीं दिया है'. उन्‍होंने कहा कि 'मैंने आरोपों का ब्योरा किसी को नहीं दिया है, बल्कि किसी और ने ऐसा किया है और इसलिये मैंने आचरण नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया है'. उन्‍होंने कहा कि डीजीपी (कारागार) ने पहले रिपोर्ट के बारे में बात की और उसके बाद उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी.

रूपा ने कहा, 'मीडिया से बचने का गलत अर्थ निकाला जाएगा और इसलिए मुझे स्पष्ट करना पड़ा कि मैंने रिपोर्ट दी'. उन्होंने यह भी कहा कि वह सरकार द्वारा उनके खिलाफ आरोपों की उच्चस्तरीय जांच का आदेश दिए जाने का स्वागत करती हैं.

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उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री ने जो भी जांच का आदेश दिया है, उसका स्वागत है और मुझे इसको लेकर कोई पछतावा नहीं है. वह सही हैं और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. मैं सहयोग करूंगी और सच्चाई सामने आनी चाहिए'. रूपा ने यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ जेल में कृत्रिम हड़ताल आयोजित की गई.

उन्होंने कहा, 'उनसे (अधिकारियों से) अपेक्षा की जाती है कि वे इस तरह के प्रदर्शन को रोकेंगे और अगर वे इसका आयोजन करते हैं और मीडिया को हड़ताल का फुटेज जारी करते हैं तो उसकी भी जांच की जानी चाहिए'. अपने वरिष्ठ अधिकारी एचएन सत्यनारायण राव को सौंपी गई रिपोर्ट में रूपा ने आरोप लगाया कि इस बात की चर्चा है कि शशिकला के साथ तरजीही सलूक करने के लिए दो करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई और यह भी कहा कि उनके (राव के) खिलाफ भी आरोप हैं.

राव ने रूपा द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए इसे 'एकदम गलत और निराधार' बताया. उन्होंने कहा कि वह अपने कनिष्ठ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे. उन्होंने कहा कि शशिकला के साथ कोई विशेष बर्ताव नहीं किया जा रहा है.

गत 10 जुलाई को केंद्रीय कारागार का दौरा करने के बाद अपनी चार पन्ने की रिपोर्ट में रूपा ने कहा था कि नियमों का
उल्लंघन करके यहां कारागार में शशिकला के लिए विशेष रसोईघर की व्यवस्था है. शशिकला आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी ठहराई गई हैं.

शशिकला को फरवरी में आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद से प्रपन्न अग्रहार केंद्रीय कारागार में रखा गया है. उनके साथ उनके दो रिश्तेदारों वीएन सुधाकरन और इलावरासी को भी दोषी ठहराया गया है. सभी चार साल के कारावास की सजा काट रहे हैं.

केंद्रीय कारागार में अनियमितता के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए सिद्धारमैया ने गुरुवार को जांच का आदेश दिया और चेतावनी दी कि गडबड़ी में अगर कोई शामिल पाया गया तो जांच रिपोर्ट के आधार पर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

(इनपुट भाषा से)


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