मद्रास हाईकोर्ट ने कहा- सार्वजनिक स्थलों पर इबादत के लिए अतिक्रमण की इजाजत नहीं

मद्रास उच्च न्यायालय ने साफ कर दिया है कि इबादत के लिये सार्वजनिक स्थलों का अतिक्रमण नहीं किया जा सकता है.

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा- सार्वजनिक स्थलों पर इबादत के लिए अतिक्रमण की इजाजत नहीं

मद्रास उच्च न्यायालय ने साफ कर दिया है कि इबादत के लिये सार्वजनिक स्थलों का अतिक्रमण नहीं किया जा सकता है.

खास बातें

  • कोर्ट ने कहा- इबादत के लिये सार्वजनिक स्थलों का अतिक्रमण नहीं
  • इबादत करने का अधिकार है, लेकिन दूसरों के लिए समस्या न बने
  • कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए की टिप्पणी
चेन्नई:

मद्रास उच्च न्यायालय ने साफ कर दिया है कि इबादत के लिये सार्वजनिक स्थलों का अतिक्रमण नहीं किया जा सकता है. इसके साथ ही अदालत ने नुंगबक्कम इलाके में एक खास धर्म के कुछ लोगों द्वारा किये गए अतिक्रमण को हटाने का आदेश दिया है. अदालत ने पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों को इबादत के लिये रास्ते पर लगाए गए शमियाने को हटाने को कहा. अदालत ने कहा कि लोगों को इबादत करने का अधिकार है, लेकिन वे दूसरों के लिये समस्या पैदा नहीं कर सकते.  
जनहित याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यद्यपि अधिकारियों ने भवन को पूरी तरह सील कर दिया है, लेकिन कुछ लोगों ने रास्ते पर शमियाना लगाकर अतिक्रमण किया है और वे प्रार्थना कर रहे हैं.  न्यायमूर्ति एन किरुबाकरन और न्यायमूर्ति कृष्णन रामास्वामी की पीठ ने इससे पहले चेन्नई नगर आयुक्त कार्तिकेयन और चेन्नई मेट्रोपोलिटन विकास प्राधिकरण के सदस्य सचिव राजेश लाखोनी को अदालत के समक्ष उपस्थित होकर अनधिकृत निर्माण के खिलाफ उठाए गए कदमों के बारे में बताने को कहा था. अदालत के निर्देश के अनुसार आज दोनों मौजूद थे. 

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आपको बता दें कि पिछले दिनों दिल्ली से सटे गुरुग्राम में कथित रूप से सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने को लेकर काफी हंगामा हुआ था. दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े लोगों का कहना था कि कुछ लोग जमीन हड़पने की कोशिश कर रहे हैं. इसके बाद  हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा था कि सार्वजनिक स्थानों की जगह नजाम सिर्फ मस्जिद या ईदगाह के अंदर ही पढ़नी चाहिए.उन्होंने कहा कि नमाजियों को गुड़गांव में सड़क किनारे, उद्यानों और खाली सरकारी जमीनों पर नमाज अदा करने की इजाजत नहीं है. (इनपुट-भाषा) 

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