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केरल में एक साल में कुत्तों के काटने के 116000 मामले, सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने कहा केरल सरकार को कानूनी दायरे में रहकर इसका हल निकालना चाहिए, आवारा कुत्तों को भी जीने का अधिकार

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केरल में एक साल में कुत्तों के काटने के 116000 मामले, सुप्रीम कोर्ट सख्त

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. सभी आवारा कुत्तों को मार देने का आदेश नहीं दिया जा सकता
  2. जस्टिस एस श्रीजगन कमेटी की सिफारिशें चार हफ्ते में लागू करें
  3. कमेटी की सिफारिशों में जख्मी हुए लोगों को मुआवजा देने की बात
नई दिल्ली: केरल में पिछले एक साल में आवारा कुत्तों के काटने के एक लाख 16 हजार मामलों से सुप्रीम कोर्ट भी चिंतित है. सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार से कहा है कि लोगों को ऐसे मामलों से बचाने की जिम्मेदारी सरकार की है और सरकार को कानूनी दायरे में रहकर इसका हल निकालना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने केरल के चीफ सेक्रेट्री से चार हफ्ते के भीतर कुत्तों के काटने की घटनाओं और इसके कारणों पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों के पास भी जीने का अधिकार है और यह उनसे नहीं छीना जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार से कहा कि आवारा कुत्तों को मारते समय इस बात का ध्यान रहे कि उन्हीं को मारा जाए जो नियमों के तहत आते हैं.

कोर्ट ने कहा कि हम इस बात को मानते हैं कि यह लोगों के जीवन से जुड़ा मामला है. लेकिन हम ऐसा कोई आदेश नहीं दे सकते कि सभी आवारा कुत्तों को मार दिया जाए.अगर कोई व्यक्ति कुत्ते के काटने से मर जाता है तो यह एक घटना हो सकती है. ऐसी घटनाओं को लेकर सभी आवारा कुत्तों को मारने की इजाजत नहीं दी जा सकती.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि केरल सरकार जस्टिस एस श्रीजगन की कमेटी की सिफारिशों को चार हफ्ते में लागू करे जिसमें कुत्तों के काटने से जख्मी हुए लोगों को मुआवजा देने की बात कही गई है. कमेटी की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि इस संबंध में आठ रिपोर्ट सौंपी गई हैं. मुआवजा मांगने वाले 752 याचिकाकर्ताओं में से 154 मामले सैटल कर दिए गए हैं. लेकिन इस समस्या पर अंकुश नहीं लगाया जा पा रहा है.

वहीं केरल सरकार की ओर से कोर्ट को भरोसा दिलाया गया कि सरकार चार हफ्ते में इन सिफारिशों को लागू करेगी. सरकार ने कोर्ट को बताया कि सभी पंचायतों से पूछा गया है कि आवारा कुत्तों के लिए पुनर्वास की जगह के बारे में सरकार तो बताएं.

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आवारा कुत्तों को केवल नियम के मुताबिक ही मारा जाए, हम सभी आवारा कुत्तों को अविवेकी तरह से मारने की इजाज़त नहीं दे सकते. इससे पहले कोर्ट ने आदेश दिया था कि सभी बीमार या लोगों के लिए खतरा बने आवारा कुत्तों को मारने या हटाने के लिए कदम उठाए जाएं और यह कदम केंद्रीय नियमों के तहत उठाए जाएं.

केरल और बॉम्बे हाईकोर्ट ने अलग-अलग फैसलों में इस तरह के कुत्तों को मारने के फैसले को सही ठहराया था. इनमें कहा गया था कि लोगों की ज़िन्दगी आवारा कुत्तों से ज़्यादा ज़रूरी है. कई पशु अधिकार संस्थाओं ने इन फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है. खास तौर पर यह संस्थाएं केरल में आवारा कुत्तों को मारने के लिए चलाई जा रही मुहिम पर रोक की मांग कर रही हैं.


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