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केरल में बाढ़ का पानी घटा, राहत एवं बचाव में जुटी एजेंसियों के सामने महामारी रोकने की चुनौती

केरल में बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को बचाने में जुटी एनडीआरएफ ने अब बाढ़ पीड़ितों तक खाने-पीने के सामान के अलावा दवाएं पहुंचाना शुरू कर दिया है.

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केरल में बाढ़ का पानी घटा, राहत एवं बचाव में जुटी एजेंसियों के सामने महामारी रोकने की चुनौती
नई दिल्‍ली: केरल के कई इलाकों में बाढ़ का पानी घटने से हालात में सुधार है. लेकिन राहत-बचाव में जुटी सरकारी एजेंसियों को अब एक नई चुनौती से जूझना है. बाढ़-प्रभावित इलाकों में किसी महामारी को रोकने की चुनौती. केरल में बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को बचाने में जुटी एनडीआरएफ ने अब बाढ़ पीड़ितों तक खाने-पीने के सामान के अलावा दवाएं पहुंचाना शुरू कर दिया है. राहत शिविरों में अब हेल्थ कैंप भी लगाए जा रहे हैं. बाढ़ पीड़ितों के लिए 3757 मेडिकल कैंप लगाए जा चुके हैं. 90 तरह की दवाएं पहुंचायी जा चुकी हैं. ख़ास ध्यान तेज़ी से फैलने वाली बीमारियों पर है. तबाह हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को फिर से बहाल किया जा रहा है. केंद्र सरकार भी स्वास्थ्य के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीमें भेजेगी. तैयारी किसी भी महामारी को फैलने से रोकने की है.

एनडीआरएफ के डीजी संजय कुमार ने एनडीटीवी से कहा, "महामारी की किसी भी संभावना से निपटने के लिए अब NDRF मेडिकल कैंप्स सेटअप कर रही है जहां डॉक्टरों और पैरा-मेडिक स्टाफ को भी तैनात किया जा रहा है. बाढ़ का पानी निकलने के बाद बाढ़-प्रभावित इलाकों में ज़्यादा डॉक्टरों और पैरा-मेडिक स्टाफ की ज़रूरत होगी. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आम लोगों को भी महामारी के खतरे से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है.

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राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य कमल किशोर ने एनडीटीवी से कहा, "हम बाढ़ प्रभावित लोगों को सोशल मीडिया और ब्रॉडकास्ट मीडिया के ज़रिये आगाह कर रहे हैं कि किसी बीमारी से वो कैसे बच सकते हैं." तैयारी बाढ़ के पानी का स्तर घटने के बाद फोकस बुनियादी ढ़ांचा को फिर से बहाल करने पर भी है. फिलहाल वहां कई इलाक़ों में बिजली-पानी-फोन कुछ नहीं चल रहा.

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भारत सरकार के पर्यटन मंत्री के जे अल्फोन्स ने कहा कि कैरल को सैकड़ों इलेक्ट्रीशियन, प्लंबरों और दूसरे मैकेनिक्स की ज़रूरत है ज़िदगी फिर से बहाल करने के लिए. साफ है कि बाढ़ को लेकर बड़ी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं.

केरल में आई बाढ़ ‘गंभीर प्रकृति की आपदा’ घोषित
गृह मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि केरल में आई भीषण बाढ़ ‘गंभीर प्रकृति की आपदा’ घोषित की गई है. गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘केरल में आई बाढ़ और भूस्खलन की प्रबलता को देखते हुए सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए यह गंभीर प्रकृति की एक आपदा है.’’ केरल में इस मॉनसून और खासतौर पर पिछले एक हफ्ते में बारिश और बाढ़ के चलते हुए नुकसान पर विचार करते हुए यह फैसला किया गया. केरल में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन में कम से कम 216 लोगों की मौत हुई है जबकि 7.24 लाख विस्थापित लोगों ने 5,645 राहत शिविरों में शरण ले रखी है. जब कोई आपदा ‘‘दुर्लभ गंभीरता वाली/ गंभीर प्रकृति’’ की घोषित की जाती है, तब राज्य सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर सहायता मुहैया की जाती है. केंद्र राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) से भी अतिरिक्त सहायता देने पर विचार करता है. एक आपदा राहत कोष (सीआरएफ) स्थापित किया जाता है, और इसमें केंद्र और राज्य की साझेदारी तीन अनुपात एक (3:1) की होती है. जब सीआरएफ में संसाधन कम पड़ता है, तब राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक कोष (एनसीसीएफ) से अतिरिक्त सहायता देने पर विचार किया जाता है. एनसीसीएफ में 100 फीसदी राशि केंद्र प्रदान करता है. आपदा को जब ‘गंभीर’ घोषित कर दिया जाता है तब प्रभावित लोगों को ऋणों के पुर्नभुगतान में राहत और रियायती शर्तों पर नया ऋण दिया जाता है.


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