यह ख़बर 14 अप्रैल, 2011 को प्रकाशित हुई थी

अरुणिमा को नौकरी की पेशकश, 2लाख का मुआवजा

अरुणिमा को नौकरी की पेशकश, 2लाख का मुआवजा

खास बातें

  • रेलवे ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है।
नई दिल्ली/बरेली:

बरेली के निकट सोमवार को चलती ट्रेन से लुटेरों द्वारा फेंके जाने पर अपना एक पैर खो चुकीं राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल और फुटबॉल खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा को गुरुवार को रेलवे ने नौकरी देने की पेशकश दी। रेलवे ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है। उधर, रेलवे ने सोनू को नौकरी देने तथा उसके इलाज का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की है, जबकि खेल मंत्रालय ने भी उसे दो लाख रुपये का मुआवज़ा देने का ऐलान किया है। तेईस वर्षीय अरुणिमा को 11 अप्रैल को तीन लुटेरों ने बरेली के समीप पद्मावत एक्सप्रेस से धक्का देकर नीचे फेंक दिया था जिससे उनका एक पैर कट गया। वह अस्पताल में भर्ती हैं। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विवेक सहाय ने कहा, हम उन्हें पूरी मदद और पुनर्वास मुहैया कराएंगे जिसमें रेलवे में उन्हें उचित नौकरी देना शामिल होगा। उन्होंने कहा, रेल मंत्री (ममता बनर्जी) ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर चिंता व्यक्त की है और अरुणिमा को पूरी वित्तीय सहायता और उचित चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने का आदेश दिया है। रेलवे की ओर से यह घोषणा ऐसे समय की गयी है जब युवा खिलाड़ी ने कहा है कि छोटी क्षतिपूर्ति राशि से उन्हें कोई मदद नहीं मिलेगी और उन्हें सरकार में स्थायी नौकरी चाहिए। अरुणिमा ने बरेली में कहा, कुछ हजार रुपये ज्यादा दिन तक साथ नहीं देंगे। मुझे पूरी जिंदगी जीनी है और मुझे क्षतिपूर्ति की छोटी राशि नहीं, बल्कि स्थायी सरकारी नौकरी चाहिए। रुणिमा को उनकी चेन खींचने की कोशिश कर रहे व्यक्तियों ने सोमवार रात ट्रेन से नीचे फेंक दिया। तब वह एक परीक्षा में सम्मिलित होने दिल्ली आ रही थीं। वह जैसे ही ट्रेन से गिरीं एक और ट्रेन उनके एक पैर के ऊपर से गुजर गई। उनके दूसरे पैर की हड्डी टूट गई है और उन्हें सिर में भी चोट आई है। अरुणिमा ने कहा कि उनके सपने टूट चुके हैं। उन्होंने कहा, मेरे साथ दिक्कत यह है कि अब मैं अपने सपने साकार नहीं कर पाउंगी। मैं सोच रही हूं कि मैं कैसे अपने सपने पूरे करूंगी। सरकारी रेलवे पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या के प्रयास) और धारा 393 (लूट की कोशिश) के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। मुरादाबाद रेल मंडल के अपर मंडलीय प्रबंधक एके सिंघल ने बताया कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन कर दिया गया है, जो हफ्ते भर में अपनी रिपोर्ट देगी। उन्होंने बताया कि जांच समिति में रेलवे सुरक्षा बल के सेनानायक, मंडलीय सुरक्षा अधिकारी, मंडलीय संचालन प्रबंधक और मंडलीय अभियंता शामिल हैं। खेल मंत्री अजय माकन ने 25,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की और अरुणिमा को हरसंभव मदद मुहैया कराने का आश्वासन दिया। उधर, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि कृत्रिम पैर स्थापित करने के लिए कुछ गैर-सरकारी संगठनों ने भी अरुणिमा से संपर्क किया है। उन्होंने कहा कि अरुणिमा को रेलवे दावा न्यायाधिकरण के जरिये क्षतिपूर्ति दिलाई जाएगी। न्यायाधिकरण क्षतिपूर्ति की राशि का फैसला करेगा। अरुणिमा की बहन लक्ष्मी ने कहा कि राष्ट्रीय खिलाड़ी की हालत स्थिर है, लेकिन उन्हें बुखार है। चिकित्सकों ने हमसे दो दिन इंतजार करने को कहा है, जिसके बाद उनकी शल्यक्रिया करनी पड़ सकती है। उन्होंने कहा, मैं राज्य सरकार से अपील करना चाहती हूं कि ट्रेनों में यात्रा करने वाली महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करायें ताकि किसी के भी साथ इस तरह का दर्दनाक हादसा नहीं हो। लक्ष्मी ने कहा कि आरपीएफ के एक अधिकारी दोपहर ढ़ाई बजे अस्पताल आए और इलाज के लिये पांच हजार रुपये की राशि दी। उन्होंने बताया कि जांच जारी है। उन्होंने कहा, अब तक इलाज लगभग नि:शुल्क हुआ है। हमें सिर्फ छोटी राशि खर्च करनी पड़ी है। उधर, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष यास्मीन अबरार ने कहा कि आयोग ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है। यास्मीन ने बताया कि कानून व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिये और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए। हमें इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ट्रेनों में रेलवे पुलिस कर्मियों की अधिक संख्या में तैनाती करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुछ राशि का मुआवजा देना पर्याप्त नहीं है। अरुणिमा के बेहतर भविष्य के लिए व्यापक योजना होनी चाहिए।

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