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कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स 2018 के दौरान शर्मसार हुए भारतीय एथलेटिक्‍स महासंघ ने उठाया यह कड़ा कदम....

कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स के दौरान सुई रखने के आरोप में दो एथलीटों को स्वदेश वापिस भेजे जाने के कारण भारतीय एथलेटिक्‍स जगत को शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी.

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कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स 2018 के दौरान शर्मसार हुए भारतीय एथलेटिक्‍स महासंघ ने उठाया यह कड़ा कदम....

प्रतीकात्‍मक फोटो

खास बातें

  1. नीडल रखने पर भारत के दो एथलीट स्‍वदेश भेजे गए थे
  2. एथलेटिक्‍स महासंघ ने नो नीडल पॉलिसी लागू करने की
  3. यह नीति सभी शिविरों और प्रशिक्षण केंद्रों में तुरंत लागू हुई
नई दिल्ली: कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स के दौरान सुई रखने के आरोप में दो एथलीटों को स्वदेश वापिस भेजे जाने के कारण भारतीय एथलेटिक्‍स जगत को शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी. इस घटना से सबक लेते हुए भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने अपने सभी राष्ट्रीय शिविरों और प्रशिक्षण केंद्रों में सख्त ‘नो नीडल’ नीति लागू करने का फैसला किया है.‘नो नीडल ’ नीति लागू करने वाले पहले राष्ट्रीय खेल महासंघों में से एक एएफआई ने प्रोटोकाल तैयार किया है जो सभी एथलीटों को भेजा जाएगा. एएफआई अध्यक्ष आदिले सुमरिवाला ने कहा कि कल घोषणा के बाद से ‘नो नीडल’ नीति तुरंत प्रभावी हो गई है.

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उन्होंने कहा ,‘हमने कल ‘नो नीडल’ नीति का ऐलान किया और इसे तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है. हमने दो पन्नों का एक प्रोटोकाल तैयार किया है तो देशभर में राष्ट्रीय शिविरों और प्रशिक्षण केंद्रों में खिलाड़ियों को भेजा जाएगा.’सुमरिवाला ने कहा,‘खिलाड़ियों द्वारा प्रतिबंधित दवाओं का इस्तेमाल कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हम पहले एनएसएफ है जिसने देश में नो नीडल नीति का ऐलान किया है. हमने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) को भी इसके बारे में सूचित कर दिया है । ’’

भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने भी कहा है कि वह खेल मंत्रालय से ‘नो नीडल’ नीति को सभी खेलों में राष्ट्रीय शिविरों में लागू करने की अपील करेंगे.(इनपुट: एजेंसी)


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