यह ख़बर 04 अगस्त, 2014 को प्रकाशित हुई थी

राष्ट्रमंडल खेल : आईओए महासचिव मेहता और कुश्ती रेफरी मलिक को सबूतों के अभाव में छोड़ा गया

राष्ट्रमंडल खेल : आईओए महासचिव मेहता और कुश्ती रेफरी मलिक को सबूतों के अभाव में छोड़ा गया

फाइल फोटो

ग्लासगो:

विभिन्न आरोपों में गिरफ्तार किए गए भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के महासचिव राजीव मेहता और कुश्ती रेफरी वीरेंदर मलिक के खिलाफ लग आरोपों की पुष्टि के लिए सबूतों की कमी की वजह से दोनों को छोड़ दिया गया।

भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों के मुताबिक दोनों अधिकारियों के खिलाफ आरोप वापस ले लिए गए हैं और यह मामला शेरिफ अदालत में सुनवाई के लिए नहीं आया।

इन दोनों अधिकारियों को छोड़ने का फैसला भारतीय दल के लिए काफी राहत लेकर आया है, जिसे इस प्रकरण के कारण 20वें राष्ट्रमंडल खेलों के अंतिम दिन काफी शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ा था।

मेहता को कथित तौर पर शराब पीकर गाड़ी चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था जबकि मलिक पर यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगा था। मलिक भारतीय दल का हिस्सा नहीं थे। ये दोनों हालांकि भारत के 215 सदस्यीय दल के साथ खेल गांव में नहीं रह रहे थे। ये दोनों कथित तौर पर स्थानीय होटल में रुके थे।

उच्चायोग के अधिकारियों ने बताया, 'साक्ष्यों के अभाव में इन दोनों के खिलाफ आरोप हटा दिए गए हैं। उन्हें बिना कोई आरोप तय किए छोड़ दिया गया।' एडिनबर्ग में भारतीय वाणिज्य दूतावास इस मामले में पुलिस के संपर्क में था।

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अदालत में मौजूद आईओए प्रतिनिधिमंडल में शामिल उत्तर प्रदेश ओलंपिक संघ के सचिव आनंदेश्वर पांडे ने बताया कि प्राथमिक जांच के बाद अधिकारियों को रिहा कर दिया गया। पांडे ने कहा, 'प्राथमिक जांच में उन्हें (स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस) आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। इसलिए उन्हें अदालत में पेश किए बिना ही छोड़ दिया गया।'

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घटना के बारे में अधिक जानकारी देते हुए पांडे ने कहा कि मेहता अपने मित्र की कार चला रहे थे और पार्किंग से बाहर आते हुए छोटी सी दुर्घटना हो गई।