वर्ल्डकप के दावेदार : 'आउट ऑफ द बॉक्स' रणनीति की ज़रूरत है फ्रांस को...

वर्ल्डकप के दावेदार : 'आउट ऑफ द बॉक्स' रणनीति की ज़रूरत है फ्रांस को...

नई दिल्ली:

फ्रेंच फुटबॉल की बात करते ही फैन्स के जेहन में सबसे पहली तस्वीर जीनियस जिनेडिन जिडान के दो हेडर की आती हैं। आठ साल के अंतराल में लगाए गए जिडान के दोनों हेडर दुनियाभर में खूब चर्चित रहे। यह बात दीगर है कि वर्ष 2006 के फाइनल में जिडान के हेड-बटर ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था, जबकि पहले वाले वर्ष 1998 के हेडर ने न सिर्फ जिनेडिन जिडान को फ्रेंच फुटबॉल के इतिहास में अमर कर दिया, बल्कि फ्रांस को खिताब भी दिलाया।

फ्रांस ने 1998 में अपनी ही जमीन पर दुनिया की सबसे कामयाब और डिफेंडिंग चैम्पियन ब्राजील की टीम को फाइनल में 3-0 से शिकस्त दी और पूरा फ्रांस जश्न में झूम उठा। हालांकि फ्रांस की टीम अब तक सिर्फ एक बार वर्ष 1998 में ही खिताब अपने नाम करने में कामयाब रही है, लेकिन वर्ष 1958 और 1986 में यह टीम तीसरे और वर्ष 1982 में चौथे नंबर पर रही थी, और अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया था।

वर्ष 2006 में इटली का खिलाड़ी मार्को मातेराज़ी फाइनल में जिडान को भड़काने में कामयाब रहा, और वर्ल्डकप के खत्म होने के बावजूद जिडान का हेड-बट फैन्स की चटपटी कहानियों में शामिल हो गया। इटली ने चौथी बार वर्ल्डकप का खिताब अपने नाम कर लिया। फ्रेंच टीम और फैन्स मायूसी के साथ लौटे।

फ्रांस के सितारे
हालांकि फ्रैंक रिबेरी टूर्नामेंट से बाहर हैं, लेकिन फिर भी उनकी रक्षापंक्ति बेहद मजबूत है। फ्रांस के शानदार गोलकीपर ह्यूगो लौरिस के अलावा अनुभवी डिफेंडर पैट्रिस एव्रा, लॉरेन्ट कोसाइनली, और रफाएल वरान टीम की ताकत हैं। इसके अलावा जानकारों की नजर में मिडफील्डर पॉल पोग्बा अपने फॉरवर्ड खिलाड़ी करीम बेंजेमा और ऑलिवर जिरू के लिए मैजिक पास देकर गोल के मौके बना सकते हैं, जिनके सहारे फ्रांस कामयाबी की कहानी लिख सकता है।

फ्रांस की खासियत
आमतौर पर 4-2-3-1 के फॉर्मेशन से खेलने वाली यह टीम प्रतिभाशाली मानी जाती है। हालांकि यह टीम वर्ष 2008 के यूरो कप और वर्ष 2010 के वर्ल्डकप में कोई मैच जीतने में नाकाम रही, लेकिन माना जा रहा है कि 45 साल के कोच कोच डिडिए डेशॉम्प्स मौजूदा टीम से विपक्षी टीमों को चौंकाने की योजना बना चुके हैं।

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फ्रांस की चुनौती
फ्रांस की मुश्किल यह है कि वर्ष 1998 में वर्ल्डकप जीतने के बाद वर्ष 2002 और 2006 में उपविजेता रहने के बाद वर्ष 2010 में यह टीम ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई। ग्रुप ई में फ्रांस (17) को स्विटजरलैंड (6), इक्वाडोर (26) और होंडूरास (33) के साथ जह मिली है। पहले राउंड की बाधा पार करने के बाद भी उसे अर्जेन्टीना, बोस्निया और नाइजीरिया जैसी टीमों के साथ टक्कर लेनी पड़ सकती है, इसलिए उनकी राह शुरुआत से ही आसान नहीं दिख रही है।

सबसे बड़ी मुश्किल तो यह है कि टूर्नामेंट से पहले उनके सुपरस्टार फ्रैंक रिबेरी पीठ में चोट की वजह से टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं, तो अब अगर फ्रांस को ब्राजील में अपना जादू बिखेरना है तो फ्रांस के पूर्व कप्तान और मौजूदा कोच डिडिए डेशॉम्प्स को 'आउट ऑफ द बॉक्स' रणनीति बनाने की जरूरत होगी, जिसके लिए वह जाने भी जाते हैं।