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वर्ल्डकप के दावेदार : शुरू से चौकन्ना रहना होगा इटली को

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वर्ल्डकप के दावेदार : शुरू से चौकन्ना रहना होगा इटली को
नई दिल्ली:

फीफा विश्वकप में अब तक सबसे कामयाब रहे ब्राज़ील की दावेदारी ही सबसे बड़ी मानी जा रही है तो उसकी कई वजहें हैं - जिनमें से एक यह भी है कि ब्राज़ील मेज़बान है और उसे घरेलू मैदान और समर्थकों का फायदा मिलेगा, लेकिन फुटबॉल की दुनिया में इटली की दावेदारी भी कभी कम नहीं आंकी जाती। इटली के नाम चार वर्ल्डकप खिताबों के अलावा एक यूरोपियन चैम्पियनशिप और एक ओलिम्पिक खिताब हासिल करने का भी गौरव दर्ज है।

लेकिन इटली के फैन्स अपनी टीम को लेकर बड़ी दावेदारी इसलिए पेश नहीं कर रहे हैं, क्योंकि वर्ष 2006 में खिताब जीतने के बाद यह टीम वर्ष 2010 में पहले ही राउंड में बाहर हो गई थी। पिछली दफा ग्रुप स्टेज में इटली ने पैराग्वे और न्यूज़ीलैंड के खिलाफ मुकाबला ड्रॉ खेला और फिर स्लोवाकिया ने इटली को 3-2 से हराकर उसे राउंड ऑफ सिक्सटीन में नहीं पहुंचने दिया। इस बार भी इटली (9) को ग्रुप-डी में उरुग्वे (7) कोस्टारिका (28) और इंग्लैंड (10) का सामना करना है। इसे ग्रुप ऑफ डेथ भी माना जा रहा है और इटली के लिए पहली बाधा पार करना भी अच्छी-खासी चुनौती साबित हो सकती है।

इसके बावजूद सिर्फ आठ साल पहले वर्ल्डकप ट्रॉफी को अपने नाम करने का गौरव हासिल करने वाली यह टीम एक बार फिर खिताब के लिए दावेदारी पेश कर रही है तो उसे दूसरी टीमें बेहद गंभीरता से ले रही हैं। भले ही इटली वर्ष 2010 में पहले राउंड से आगे नहीं बढ़ पाई थी, लेकिन इसके फैन्स को भरोसा है कि इस बार गोलकीपर कप्तान गियांलुइगी बफॉन अपने कारनामों से टीम की सूरत बदल देंगे।

वर्ष 2006 में मिडफील्डर एन्ड्रिया पर्लो के साथ वर्ल्डकप विजेता टीम का हिस्सा रहे 37 साल के कप्तान बफॉन जानते हैं कि एक और खिताब उनकी टीम को ब्राज़ील जैसी कामयाब टीम की बराबरी करवा सकता है। वर्ष 1934, 1938, 1982 और आखिरी बार 2006 में ट्रॉफी उठाने वाली टीम के फैन्स उससे पांचवें खिताब की उम्मीद लगा रहे हैं। Azurri का मंत्र जपते हुए इसके फैन्स दुनिया के किसी भी स्टेडियम में 12वें खिलाड़ी का रोल अदा करते नज़र आते हैं।

इस टीम ने छह बार फाइनल तक का सफर किया, एक बार तीसरे और एक बार चौथे स्थान पर रही। बड़ी बात यह है कि ब्राज़ील के बाद दुनिया की दूसरी सबसे कामयाब टीम ने इस बार क्वालिफाइंग और अभ्यास मैचों में अपना दम दिखाया है। इटली की टीम मैदान पर सुपरमॉडल्स से सजी नज़र आती है, और शातिर तरीके से विपक्षियों को मात देने का शानदार नमूना पेश कर रही है।

इटली के सितारे
4-3-3 के फॉर्मेशन से खेलने वाली इस टीम को स्ट्राइकर बालोटेली के साथ मिडफील्डर डि रॉस्सी से बड़ी उम्मीदें हैं। कप्तान बफॉन और मिडफील्डर पर्लो को वर्ष 2006 में ट्रॉफी उठाने की अहमियत मालूम है और पूरी टीम धीरे-धीरे लय में आ रही है।

इटली की खासियत
आमतौर पर रक्षात्मक तरीके से खेलती इटली के किले को भेद पाना किसी भी टीम के लिए बेहद मुश्किल साबित होता है। इसके अलावा इटली के गोलकीपर हमेशा से इटली की ताकत साबित होते रहे हैं।

इटली की चुनौती
इटली की सबसे बड़ी चुनौती उसके पिछले वर्ल्डकप में पहले ही राउंड में बाहर हो जाने का दर्द है। इटली को इस बार शुरुआत में ही अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है। ग्रुप ऑफ डेथ में होने की वजह से इटली को शुरू से ही चौकन्ना रहने की ज़रूरत होगी।

इन सबके बावजूद 56 साल के कोच सेज़र प्रान्देली अपनी टीम को पहले ही मैच में इंग्लैंड के खिलाफ ज़ोर लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। टीम एक बार फिर ऐतिहासिक ऊंचाइयों तक कैसे पहुंचेगी, इसका तिलिस्म इंग्लैंड के खिलाफ पहले मैच की रणनीति के साथ ही दुनिया के सामने आ जाएगा।

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