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वर्ल्डकप के दावेदार : सितारों से भरी है मेज़बान ब्राज़ील टीम

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वर्ल्डकप के दावेदार : सितारों से भरी है मेज़बान ब्राज़ील टीम
नई दिल्ली:

रिकॉर्ड पांच बार वर्ल्डकप का खिताब जीतने के बावजूद ब्राज़ील का दर्द यह है कि वह अपनी ज़मीन पर वर्ल्डकप नहीं जीत पाए हैं। वर्ष 1950 में ब्राज़ील में हुए वर्ल्डकप में उरुग्वे ने उसे शिकस्त दी और ब्राज़ील के फैन्स इस दर्द को पिछले 64 साल से अपने सीने में दबाए हुए हैं, सो, ज़ाहिर है, यह टीम इस बार उस दर्द से उबरकर रिकॉर्ड छठी बार खिताब अपने कब्ज़े में करने की योजना बना रही है।

वैसे, सिर्फ ब्राज़ील ही नहीं, दुनिया भर में सांबा-स्टाइल फुटबॉल के फैन्स इस टीम की कामयाबी को अपनी कामयाबी मानकर जश्न मनाते हैं, और इस बार भी दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल समारोह का दुनियाभर के फैन्स बेताबी से इंतज़ार कर रहे हैं।

ब्राज़ील और फुटबॉल... फैंटेसी और हकीकत की मिलीजुली ऐसी अनूठी मिसाल दुनिया में बहुत कम हैं। वर्ल्डकप कहीं भी हो, हर चार साल बाद सांबा-स्टाइल फुटबॉल का आकर्षण इस खेल की रौनक बढ़ा देता है। टूर्नामेंट से करीब साल भर पहले से चढ़ता वर्ल्डकप का बुखार जुनून में बदल जाता है तो उसकी एक बहुत बड़ी वजह सभी वर्ल्डकप में ब्राज़ील की मौजूदगी भी है।

रिकॉर्ड पांच बार की वर्ल्डकप विजेता ब्राज़ील ने दुनिया को पेले, गैरिंचा, दीदी, वावा, रोमारियो, रोनाल्डो, रोनाल्डिनो जैसे न जाने कितने एक से बढ़कर एक सुपरस्टार दिए। सब अपने फन में माहिर। सबने फुटबॉल के मैदान पर ऐसी तारीख लिखी, जो हमेशा के लिए फैन्स की ज़िन्दगी का हिस्सा बन गई। यही नहीं, इनकी कहानियां पीढ़ी दर पीढ़ी फैन्स की लोककथाओं में सरहदों को पार कर मिथकों का हिस्सा बनी रहेंगी।

वर्ष 1950 में हुए पहले वर्ल्डकप के बाद यह दूसरा मौका है, जब ब्राज़ील में वर्ल्डकप फुटबॉल का आयोजन किया जा रहा है, और हर बार की तरह एक बार फिर ब्राज़ील को टूर्नामेंट का मज़बूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि ब्राज़ील के खिलाड़ी यह नहीं मानते कि उन्हें घरेलू टीम होने का अतिरिक्त फायदा होगा।

ब्राज़ील के सितारे
4−4−2 की रणनीति से खेलने वाली ब्राज़ील की टीम इस बार भी ताकतवर मानी जा रही है। कोच लुई फिलिपे स्कोलारी वर्ष 2002 में टीम के साथ ख़िताब जीतने का स्वाद चख चुके हैं, और एक बार फिर उन्हीं के अनुभव के सहारे सितारों से सजी यह टीम किसी भी टीम में ख़ौफ पैदा करती है। प्लेमेकर नेइमार, स्ट्राइकर फ्रेड और जो, डिफेंडर कप्तान थियागो सिल्वा और डाविड लुइज़ के अलावा गोलकीपर हुलियो सीज़ार टीम की मज़बूत रीढ़ हैं, जिनके सहारे टीम विजयी अभियान शुरू कर सकती है।

ब्राज़ील की खासियत
इन्हीं सितारों के सहारे ब्राज़ील ने वर्ष 2013 फीफा कॉन्फेडेरेशन्स कप के फाइनल में वर्ल्ड चैम्पियन स्पेन को 3−0 से हरा दिया। दुनिया की दूसरी टीमों के लिए यह चैंपियन टीम की दस्तक है। लैटिन-अमेरिकी स्टाइल पर ब्राज़ील की मुहर लगी होती है। ज़बरदस्त पोज़ेशन, यानि गेंद को कब्ज़े में रखना, ड्रिबलिंग और निजी स्किल की वजह से यह टीम और इसके खिलाड़ी बिल्कुल अलग नज़र आते हैं।

ब्राज़ील की चुनौती
दुनिया में चौथे नंबर की ब्राज़ील टीम ग्रुप ए में 12 जून को क्रोएशिया के साथ मैच खेलेगी, और तब से दुनियाभर में फैले उसके फैन्स उसकी हर जीत के लिए दुआएं भी करेंगे. इसी ग्रुप में शामिल मैक्सिको और कैमरून की टीमें ब्राज़ील के सामने क्या चुनौती पेश कर पाएंगी, यह बहुत बड़ा सवाल है, लेकिन टीम की मुश्किल यह है कि फिलहाल टीम स्टार खिलाड़ी नेयमार पर ज़्यादा निर्भर दिखाई दे रही है, और ऐसे में दूसरी टीमें ब्राज़ील की रणनीति पर रोक लगा सकती हैं।

फिलहाल सबकी नज़रें इस बात पर भी हैं कि ब्राज़ील इस वर्ल्डकप का आयोजन कितनी कामयाबी से कर पाएगा। कहीं उसका हश्र वर्ष 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ खेलों की तरह तो नहीं होगा। वर्ष 1994 वर्ल्डकप विजेता टीम के स्टार खिलाड़ी अब भी ब्राज़ील में इस खेल के आयोजन का विरोध कर रहे हैं। रोमारियो का विरोध इन खेलों पर होने वाले बड़े खर्च को लेकर है।

अब ब्राज़ील के आयोजक और खिलाड़ी एक कामयाब वर्ल्डकप के लिए जीजान से जुटे हुए हैं, और इतना ज़रूर लगता है कि जैसे ही 12 जून को (भारतीय समयानुसार 13 जून को रात डेढ़ बजे) जैसे ही वर्ल्डकप की पहली सीटी बजेगी, सारे सवाल पीछे छूट जाएंगे, और अगर खिताब भी मेज़बान टीम ने जीत लिया, तो ब्राज़ील के फैन्स के लिए सोने पर सुहागा।

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